राजनीति
कांग्रेस उसी कारण से विफल हो रही है जिससे पाकिस्तान: भारत-विरोधी संदेश

आशुचित्र- स्वतंत्रता के समय कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाली एक हिंदू पार्टी थी। आज यह न हिंदू है और न धर्मनिरपेक्ष।

2019 में भी कांग्रेस पार्टी की दुर्गति के कई कारण में से एक है कि इसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सफलता सूत्र को बिना पूर्ण रूप से समझे इसकी नकल उतारनी चाही।

लोकसभा चुनावों में पार्टी ने अपनी सोशल मीडिया टीम को सुदृढ़ किया, बूथ स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति सुनिश्चित की, इस कार्य के लिए आवश्यक दृढ़ संकल्प के बिना उन्होंने अमित शाही की कार्यशैली की नकल उतारनी चाही, इसके अंतर्गत नए डाटा विश्लेषण प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती नियुक्त किए गए जिन्होंने प्रोजेक्ट शक्ति के तहत पार्टी समर्थकों का डाटाबेस तैयार किया और पार्टी संदेश उन तक पहुँचाया ताकि वे उसे वाइरल कर सकें। इस बात को समझते हुए कि भाजपा हिंदू मतों के बल पर आगे बढ़ रही है, 2012 से राहुल गांधी ने मंदिरों के दर्शन करना शुरू किया और स्वयं को शिव-भक्त भी घोषित कर दिया।

शहरी मध्यम वर्ग के साथ सोशल मीडिया संबंध मज़बूत था लेकिन प्रोजेक्ट शक्ति वास्तविकता में विफल हुआ। यदि आप जानना चाहते हैं क्यों तो इकोनॉमिक टाइम्स पढ़ें जिन्होंने आज (17 जून को) आधे पृष्ठ में इसे विस्तृत रूप से समझाया है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस राजनेताओं ने कृत्रिम रूप से सदस्यता की संख्या में बढ़ोतरी कर दी थी। इसलिए जिन संदेशों को वाइरल होना था, वे वास्तविकता में कमज़ोर पड़ गए। और राहुल गांधी के मंदिर दर्शन को उसी तरह देखा गया जैसा वह था- हिंदी पहचान और संवेदनाओं से लाभ उठाने का माध्यम।

कांग्रेस की समस्या को सरलता से समझना आवश्यक है- डाटाबेस के स्थान पर संदेश महत्व रखता है। प्रोजेक्ट शक्ति में नामांकित संख्या नहीं बल्कि सूचीबद्ध सदस्यों की प्रतिबद्धता अधिक मायने रखती है। यह कारण था जिसने भाजपा और इसके वरिष्ठ नेताओं को विजय के घाट उतारा  जबकि कांग्रेस शुरू में ही इटक गई। द्रमुक के कारण तमिल नाडू में मिली सीटों के कारण ही यह अपने पिछले बार के आँकड़े को पार कर पाई। डाटा विश्लेषण की टीम नियुक्त की जा सकती है- प्रशांत किशोर सदैव तैयार हैं- लेकिन आप किस चीज़ के लिए खड़े हो, अंततः वहीं चीज़ वोट खींचती है। डाटा विश्लेषक अंकों से खेल सकते हैं लेकिन मतदाताओं में उत्साह नहीं भर सकते।

महाभारत में एक कथा है जहाँ अर्जुन और दुर्योधन कृष्ण के यहाँ पहुँचते हैं और वे सो रहे होते हैं। कुरुक्षेत्र युद्ध के पहले दोनों उनकी सहायता के अभिलाषी होते हैं। जब कृष्ण उठते हैं तो वे उनसे सहायता माँगते हैं। कृष्ण कहते हैं कि उन्होंने अर्जुन को पहले देखा इसलिए अर्जुन को वे उनकी सेना और उनमें चुनने का अवसर पहले देंगे। अर्जुन कृष्ण को चुनते हैं और दुर्योधन को उनकी सेना मिल जाती है। लेकिन हम जानते हैं कि कृष्ण की सहायता से युद्ध कौन जीता।

इस कहानी का उपदेश है कि प्रतिबद्धता के साथ कोई व्यक्ति अधिक संसाधनों वाले व्यक्ति से आगे होता है।

कांग्रेस पार्टी के लिए सीख यह है कि वह सच्ची प्रतिबद्धता तलाशे और न ही अधिक लोगों को जो डाटा विश्लेषक और नए सदस्य के रूप में सम्मिलित हों। ये लाभ से ज़्यादा नुकसान पहुँचाते हैं।

राहुल गांधी और उनकी पार्टी के साथ समस्या यह है कि वे विस्वसनीय नहीं लगते हैं। यदि वे चक्रवर्ती की बातों का समर्थन सिर्फ इसलिए करते हैं कि वह तमिल कानों को अच्छा लगता है या जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के टुकड़े-टुकड़े गैंग का समर्थन सिर्फ इसलिए करते हैं कि भाजपा इसका विरोध करती है, इसका अर्थ हुआ कि कांग्रेस सिर्फ किसी के विरोध में खड़ी होती है यह जताने के लिए यह भाजपा से अलग है।

कांग्रेस पार्टी और इसके डाटा विश्लेषकों की दूसरी समस्या यह है कि वे सोचते हैं कि भाजपा के पास बहुत पैसे हैं और वे कई ट्रॉल और लोगों को अपने अभियान के लिए खरीद सकते हैं।

भले ही भाजपा यह कर रही हो लेकिन इसके कुशल अभियान का यह कारण नहीं है। मुख्य कारण यह है कि सभी “भक्त” पार्टी के सच्चे समर्थक हैं और अगर पार्टी नहीं तो कम से कम नरेंद्र मोदी के तो। कई समर्थकों ने पार्टी के सहयोग के बिना अपने बलबूते पर प्रचार किया। इन्होंने पार्टी का समर्थन सिर्फ इसलिए किया क्योंकि वे ऐसा चाहते थे।

उदाहरण के लिए जेएनयू के टुकड़े-टुकड़े कांड में भाजपा के राष्ट्रवाद से अधिकांश समर्थक सहमत थे लेकिन अधिकांश कांग्रेस समर्थक अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य की बात कहने के बावजूद कांग्रेस की मुद्र से सहज नहीं थे। जब तक कांग्रेस सोचेगी कि यह कुछ लड़ाकों की सहायता से जीत सकती है, तब तक यह गलत दिशा में निाना साध रही है।

भाजपा तीन कारणों से जीती- इसके प्रशंसक हर हाल में इसका समर्थन करते हैं, भले ही अपने मूल्य पर। यदि वे कोर एजेंडा को लेकर पार्टी से खुश नहीं हैं तब भी पार्टी के संदेश के लिए समर्थन करते हैं। दूसरा कारण है कि पार्टी केवल डाटा विश्लेषक नहीं, संदेश पर भी भरोसा करती है। अभियान के दौरान भाजपा ने दो चीज़ों पर ध्यान केंद्रित किया- मोदी और राष्ट्रवाद। कांग्रेस का मुद्दा केवल भाजपा-विरोध और मोदी-विरोध था। अपनी नीतियों में विश्वास जताने की बजाय इसने भाजपा की नीतियों के प्रति अविश्वास जताया।

गांधी परिवार वोट खींचने में असमर्थ है और कांग्रेस जिन चीज़ों के लिए स्वतंत्रता संग्राम में खड़ी हुई थी, उनके समेत किसी भी चीज़ के लिए खड़ी न होकर अपनी चिता को अग्नि दे रही है। स्वतंत्रता के समय कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाली एक हिंदू पार्टी थी। आज यह न हिंदू है और न धर्मनिरपेक्ष।

पाकिस्तान जिसने अपनी राज्य विचारधारा हिंदू-विरोध और भारत-विरोध के आधार पर बनाई थी, वह अब क्षीण हो रही है। पाकिस्तान स्वयं किसी चीज़ के लिए नहीं खड़ा होता है।

कांग्रेस उसी कारण से विफल हो रही है, जिस कारण से पाकिस्तान हो रहा है।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। उनका ट्वीटर हैंडल @TheJaggi है।