राजनीति
काल के अंतराल में ‘कालांतर’ रह गया पीछे- कम्युनिस्ट बंगाली दैनिक को नहीं मिले निवेशक

मंगलवार शाम को ‘कालांतर’ के संपादक कल्याण बनर्जी ने यह घोषणा की कि यह दैनिक अपना अंतिम संस्करण 1 नवंबर 2018 को प्रकाशित करेगा, द हिंदू  ने रिपोर्ट किया। कालांतर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (सी.पी.आई.) का मुखपत्र है।

इस बंगाली दैनिक ने 7 अक्टूबर 1966 को प्रकाशन शुरू किया था और 90 के दशक में यह इतना लोकप्रिय था कि एक दिन में इसकी 50,000 प्रतियाँ बिकती थीं और फिर असफलताओं के बावजूद पिछले सात सालों में आठ पन्नों का यह अखबार प्रकाशित होता आ रहा था।

“जबसे त्रिणमूल कांग्रेस की सरकार बनी इस समाचार-पत्र को 2011 से कोई सरकारी विज्ञापन नहीं मिला। और फिर केंद्र सरकार के विज्ञापन भी बंद हो गए।”, पश्चिम बंगाल के सी.पी.आई. के सचिव स्वपन बनर्जी ने द हिंदू  को बताया।

कालांतर के 62 कर्मचारियों का भविष्य अब अनिश्चित है। इस प्रकाशन ने सोमनाथ लाहिरी और भबानी सेन जैसे प्रतिष्ठित कम्युनिस्टों को अपने संपादक के रूप में देखा है। 2011 के पहले इस प्रेस को पश्चिम बंगाल सरकार से छपाई के कुछ ऑर्डर मिल जाते थे जिससे यह प्रकाशन संचालित होता रहा था।