राजनीति
कोयला बिजली संयंत्रों के प्रदूषण से छुटकारा, जी.ई. को मिला एन.टी.पी.सी. से 1,783 करोड़ रुपए का अनुबंध

जी.ई. पावर इंडिया लिमिटेड ने आज (1 नवंबर को) घोषणा की कि इसे एन.टी.पी.सी. से कुल 1,783 करोड़ रुपए के चार अनुबंध मिले हैं जिसके अनुसार इसे भारत के कोयला बिजली संयंत्रों में आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति करनी है।

महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में एन.टी.पी.सी. की परियोजनाओं के लिए वेट फ्लू गैस डीसल्फराइज़ेशन (वेट एफ.जी.डी.) की आवश्यकता है। इसके माध्यम से प्रदूषण कम किया जा सकेगा और भारत के कोयला संयंत्र स्वच्छ बिजली का उत्पाद कर पाएँगे।

“छः वेट एफ.जी.डी. 4 मिलियन क्युबिक मीटर प्रति घंटे की दर से अधिक फ्लू गैस का उपचार कर सकेंगे जिससे प्रति वर्ष जारी होने वाली 5,40,000 टन सल्फर डाइऑक्साइड को जिप्सम में परिवर्तित किया जा सकेगा जिसका प्रयोग निर्माण उद्योग में होगा।”, जी.ई. ने नई प्राप्त परियोजनाओं के विषय में कहा।

सल्फर डाइऑक्साइड प्रदूषक श्वास और हृदय संबंधी परेशानियाँ उत्पन्न करता है।

वेट एफ.जी.डी. का प्रयोग पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के नए उत्सर्जन नियमों का पालन करने के लिए किया जा रहा है।

मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना में भारत के सभी बिजली संयंत्र में एफ.जी.डी. सुविधा होनी चाहिए जिससे सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जकों से निपटा जा सके। कहा जा रहा है कि पहली इकाई के वेट एफ.जी.डी. की स्थापना 33 महीनों में पूर्ण कर दी जाएगी। दूसरी इकाई में 39 महीनों का समय लगेगा।