राजनीति
सीबीआई ने कैंब्रिज एनालिटिका व ग्लोबल रिसर्च लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया

सोशल नेटवर्किंग मंच से भारतीयों के अवैध निजी डाटा को एकत्रित करने के लिए प्रारंभिक जाँच (पीई) शुरू करने के दो वर्ष से अधिक समय बाद केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने ब्रिटेन की कैंब्रिज एनालिटिका और ग्लोबल रिसर्च लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया।

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने सितंबर 2018 में कैंब्रिज एनालिटिका और सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक के खिलाफ प्रारंभिक जाँच शुरू की थी। 2019 में यह दोनों सीबीआई द्वारा मांगी गई पूरी जानकारी देने में विफल रही थी।

सीबीआई को दोनों कंपनियों से उनके सवालों के जवाब मिले थे लेकिन उसने कुछ विशिष्ट प्रश्नों पर उनसे अधिक विवरण मांगे थे। एजेंसी ने गत सितंबर को उनके द्वारा अपनाई गई डाटा संग्रह अभ्यास की जानकारी मांगी थी।

यह आरोप है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने ग्लोबल साइंस रिसर्च से डाटा प्राप्त किया, जो फेसबुक का उपयोग कर भारतीयों के व्यक्तिगत डाटा को एकत्र करता है। भारत में फेसबुक के 20 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। प्रारंभिक जाँच यह तय करने का पहला कदम है कि क्या आरोपों की एफआईआर के माध्यम से पूर्ण जाँच की जा रही है या नहीं।

कैंब्रिज एनालिटिका ने पहले भी इस तरह के आरोपों का सामना किया था कि उसने डोनाल्ड ट्रंप को 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीतने में मदद करने के लिए 8.7 करोड़ फेसबुक खातों से व्यक्तिगत जानकारियों को एकत्र करके उनका उपयोग किया था।

25 जुलाई 2018 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जाँच एजेंसी को पत्र लिखा था। सोशल मीडिया और फर्जी समाचारों के दुरुपयोग पर कार्रवाई के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कानून एवं न्याय और आईटी मंत्री ने कहा था, “इसने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और आईपीसी का उल्लंघन किया है इसलिए जाँच सीबीआई को सौंपी गई है।”

2018 में संसद में बताया गया कि यह पता चला कि कैंब्रिज एनालिटिका ने भी सरकार द्वारा बाद में नोटिस का जवाब नहीं दिया था। इस वजह से यह संदेह लगता है कि कैम्ब्रिज एनालिटिका भारतीयों का अवैध रूप से डाटा संग्रहित करने में शामिल हो सकती है।

आगे बताया गया था कि फेसबुक ने जवाब दिया कि वे व्यक्तिगत डाटा से निपटने के बारे में अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को कारगर बनाएँगे। उन्होंने कहा कि कैम्ब्रिज एनालिटिका का मामला विश्वास के उल्लंघन का था। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कई अन्य कदम उठाने का वादा किया कि इस तरह के उल्लंघनों की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, कैम्ब्रिज एनालिटिका ने प्रारंभिक प्रतिक्रिया दी कि भारतीयों के डाटा का उल्लंघन नहीं किया गया था लेकिन यह फेसबुक द्वारा बताई गई जानकारी के अनुरूप नहीं था।