राजनीति
लेकिन मोदी के लिए, सिक्किम का नया हवाई अड्डा अभी भी निर्माणाधीन होगा
सिक्किम का नया हवाई अड्डा अभी भी निर्माणाधीन

प्रसंग
  • वर्ष 2015 तक निर्माण की धीमी गति के साथ सिक्किम हवाई अड्डा का ‘कार्य प्रगति पर’ बना रहा। इसके बाद ही गति में तेजी आई और अब हवाई अड्डा उड़ान भरने के लिए तैयार है।

सिक्किम के पकयोंग हवाई अड्डे को तैयार होने में 17 वर्ष का लंबा समय लगा है, जिसका उद्घाटन सोमवार (24 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। अगर यह प्रधान मंत्री के लिए तैयार नहीं हो रहा होता तो यह अभी भी निर्माणाधीन होता.

ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का निर्माण, जिसकी नींव 2002 में (तत्कालीन) उपराष्ट्रपति कृष्णा कांत द्वारा रखी गयी थी, 2015 तक धीमी गति से प्रगति कर रहा था। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हवाईअड्डे का निर्माण कई इंजीनियरिंग मुद्दों और अपर्याप्त एवं देरी से मिलने वाले मुआवजे को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा विरोधों से ग्रस्त था। पूर्वी हिमालय अस्थिर है और ढीली मिट्टी, चट्टानों और बजरी ने एक जबरदस्त समस्या उत्पन्न की है। गुफा में दीवारों को बनाए रखना, उनका ढहना एवं निर्माणकार्य एक बड़ी चुनौती थी।”

वर्ष 2015 की शुरुआत में, सत्ता में आने के एक साल से भी कम समय में ही प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी परियोजना की समीक्षा का आदेश दिया और एएआई, जिसने हवाई अड्डे के निर्माण की देखरेख का कार्य किया था, समेत नागरिक उड्डयन मंत्रालय से सभी मुद्दों को हल करने और 2018 के अंत से पहले हवाई अड्डे के निर्माण को पूरा करने के लिए कहा। एएआई के अधिकारी ने कहा, “इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी), खड़गपुर के विशेषज्ञों को इंजीनियरिंग और निर्माण में समस्याओं का समाधान करने के लिए अनुबंधित किया गया था और 165 परिवारों, जिनकी भूमि हवाई अड्डे के लिए अधिग्रहित की गई थी, एवं 55 परिवारों, निर्माण के कारण जिनके घरों को नुकसान पहुँचा था, के मुआवजे की पूरी धनराशि राज्य सरकार को जारी कर दी गयी थी।”

हवाई अड्डा इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है क्योंकि इसको बनाने के लिए पूरे पहाड़ी इलाके के पेड़ों को काटना पड़ा था। एक अधिकारी ने बताया कि “हवाई अड्डे के लिए एक समतल भूमि हासिल करने के लिए करीब 200,000 वर्ग मीटर पहाड़ियों को साफ और समतल करना पड़ा था। हम लोगों को एक टेबलटॉप रनवे बनाने और अक्सर बारिश के कारण होने वाले भूस्खलन के चलते निर्माण में होने वाली देरी के लिए कोई संस्थागत अनुभव नहीं था। राज्य में सन् 2011 में तबाही मचाने वाले भूकंप ने एक साल से ज्यादा समय के लिए निर्माण कार्य बाधित कर दिया था। इसमें तर्कसंगत समस्याएं और श्रम विवाद भी सामने आए।”

हालांकि, 533 करोड़ रुपये की लागत वाले इस एयरपोर्ट की नींव 2002 में रखी गई थी जबकि असल में इसका काम 2009 में शुरू हुआ। इस एयरपोर्ट को 2012 में शुरू किया जाना था। लेकिन 2015 तक इसमें बहुत ही कम प्रगति हो पाई। केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने बताया कि 2015 की शुरूआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को एयरपोर्ट का दौरा करने के लिए कहा था। सिक्किम सरकार से भी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा पूछताछ की गई थी जिसको मोदी द्वारा कार्यों पर बारीकी से नजर रखने, निर्माण कार्य में तेजी लाने और मुआवजे संबंधी मुद्दों से निपटने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भूमि के मुआवजे का मुद्दा अभी भी चल रहा है।

प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप और जुलाई 2016 में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने वाले जयंत सिन्हा द्वारा लगातार समीक्षा बैठकें की गईं, जिससे इस परियोजना को गति मिली। मंत्रालय के एक निदेशक स्तर के अधिकारी ने बताया, “सिन्हा के लिए, राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति में एक अहम भूमिका निभाने के बाद से यह परियोजना उनके दिल के बहुत ही करीब थी, ‘उड़े देश का आम नागरिक’ (यूडीएएन) नामक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना इस नीति का एक अहम हिस्सा है। सिन्हा ने इसमें व्याप्त सभी मुद्दों का समाधान करने में काफी दिलचस्पी दिखाई और यह सुनिश्चित किया कि इसके लिए एक समय-सारिणी निर्धारित की जाए और कड़ाई से इसका पालन किया जाए।”

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के विशेषज्ञों ने भूस्खलन और पहाड़ से चट्टान की फिसलन को रोकने के लिए तकनीकें जुटा ली हैं। एक एएआई इंजीनियर ने बताया, “कुछ जलभराव वाले क्षेत्र ऐसे थे जिन्हें आईआईटी इंजीनियरों की मदद से बनाया जाना था। आईआईटी इंजीनियरों द्वारा भूस्खलन को रोकने के लिए 1700 मीटर लंबे रनवे, जिसके चारों ओर मजबूत दीवारें हों, को स्थापित करने के लिए एक विशेष इंजीनियरिंग तकनीक तैयार की गई थी। अगर पहाड़ों की चोटियाँ काटने के लिए परंपरागत तरीका प्रयोग में लाया जाता तो वर्ष 2020 तक भी हवाई अड्डा तैयार होना मुश्किल था। आईआईटी इंजीनियरों ने उस काम को जल्दी समाप्त करने के लिए जमीन-काटने की एक विशेष तकनीक तैयार की।”

लेकिन हवाई अड्डे के निर्माण से प्रभावित लोगों और इसके लिए अपनी भूमि देने वालों को मुआवजा देना सबसे मुश्किल मुद्दा साबित हुआ। वास्तव में, जब मोदी सोमवार (24 सितंबर) को हवाई अड्डे का उद्घाटन कर रहे थे तब सिक्किम उच्च न्यायालय इस परियोजना से प्रभावित लोगों की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था (इसे और इस रिपोर्ट को पढ़ें)। उच्च न्यायालय ने पहले कई बार राज्य सरकार से प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा प्रदान करने के लिए कहा था। उन परिवारों ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने पर्याप्त मुआवजे को मंजूरी देते हुए संपूर्ण राशि राज्य सरकार को सौंप दी है, लेकिन राज्य सरकार इसको दबाए बैठी है और वह पूर्ण धनराशि उन लोगों को वितरित नहीं कर रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सिक्किम सरकार से इस साल के अंत तक प्रभावित परिवारों की परेशानियां दूर करने के लिए कहा है।

202 एकड़ में फैला हुआ पकयोंग हवाई अड्डा सालाना पांच लाख यात्रियों को संभाल सकता है। पहली कमर्शियल फ्लाइट 4 अक्टूबर को कोलकाता से पकयोंग में उतरेगी, जबकि एक और फ्लाइट गुवाहाटी से पकयोंग तक 16 अक्टूबर से शुरू हो जाएगी। हवाईअड्डा अभी केवल एटीआर और बॉम्बार्डियर सीआरजे विमान को ही संभाल सकता है, हलांकि अगले वर्ष तक एयरबस ए-319 और ए-320 और बोइंग 737-800 विमानों की लैंडिंग को सक्षम करने के लिए रनवे को अपग्रेड करने की योजना है। पकयोंग भारत का 100वां हवाई अड्डा है। 2014 तक, भारत में 65 हवाई अड्डे थे, जिनमें से कई ब्रिटिशेर्स द्वारा बनवाए हुए थे। अब चार साल के बाद, देश के विमानन मानचित्र में 35 हवाई अड्डों को जोड़ा गया है और, नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु के अनुसार, अगले दशक में सौ और हवाईअड्डे परिचालित हो जाएंगे।

सिक्किम से व्यापार और निर्यात को बढ़ावा देने के अलावा, भारत-तिब्बत सीमा से केवल 60 किमी दूर स्थित हवाई अड्डा देश की सुरक्षा में सैन्य शक्ति को भी जोड़ देगा। पकयोंग भारतीय वायुसेना के लड़ाकू जेट और परिवहन विमान आसानी से संभाल सकता है और इस प्रकार यह हमारी सैन्य ताकत में बढ़ोत्तरी है. इसके वाणिज्यिक और सामरिक महत्व के अलावा, पकयोंग एयरपोर्ट से टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान आसपास के परिदृश्य के लुभावने दर्शन भी होते हैं। उत्तर-पूर्व-दक्षिण-पश्चिम अक्ष पर स्थित यह हवाई क्षेत्र, सुन्दर पहाड़ों से घिरा हुआ है और, किसी साफ दिन, पूरी कंचनजंघा रेंज यात्रियों के लिए एक देखने वाला नजारा होता है।

जयदीप मजूमदार ‘स्वराज’ में एक सहयोगी संपादक हैं।