राजनीति
2019 के चुनावों में एनडीए के लिए महत्त्वपूर्ण हैं बिहार की सीटें, देखें आँकड़े

आशुचित्र- हिंदी राज्यों में सीटों के नुकसान के बावजूद बिहार और महाराष्ट्र के सफल समीकरणों से 2019 में मोदी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के अवसर अधिक हैं।

नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) द्वारा बिहार में सीट विभाजन की घोषणा दो बातों की ओर संकेत करती है- पहली यह कि तीन हिंदीभाषी राज्यों में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन के लिए सहयोगियों को महत्त्व देने लगी है और दूसरी, यह गठबंधन महाराष्ट्र में भाजपा व शिवसेना की संधि का शुभ संकेत देता है।

तय सीटों के अनुसार भाजपा व जनता दल (युनाइटेड) 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, वहीं राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी छः सीटों पर। इसका मतलब यह कि 2014 में जीती हुई कई सीटों को भी भाजपा त्याग चुकी है। लोजपा को पिछले चुनावों में जीती हुई सारी सीटें दी गई हैं और साथ ही पासवान को राज्य सभा में सीट का वादा किया गया है। इसका अर्थ यह कि उपेंद्र कुशवाह की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के साथ छोड़ने का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अगर वह एनडीए के साथ रहता तो भाजपा का अधिक नुकसान होता।

2014 चुनावों में भाजपा, जदयब और लोजपा का वोट प्रतिशत क्रमशः 29.4 प्रतिशत, 15.8 प्रतिशत व 6.4 प्रतिशत रहा था जो कुल मिलाकर 51 प्रतिशत से अधिक है। यदि यह मानकर भी चलें कि इस गठबंधन को अल्पसंख्यक मतों में थोड़ा नुकसान होगा, फिर भी 45-47 मत प्रतिशत के साथ यह एक आरामदायक जीत हासिल कर सकता है। बिहार की 40 सीटों में से इस गठबंधन का लक्ष्य 25-30 सीटें जीतना होगा।

बिहार की इस संधि के बाद महाराष्ट्र के लिए भी शुभ संकेत मिलता है, जहाँ शिव सेना पिछले चुनावों जीतने ही मत हासिल करने की अपेक्षा कर रही है। 2014 में सामूहिक रूप से भाजपा व शिव सेना ने 48 प्रतिशत मत अर्जित किए थे और अन्य सहयोगियों से क्रमशः 48 सीटों में से 23 व 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा और शिवसेना ने 47 प्रतिशत मत हासिल किए थे लेकिन अब वे एक असंतुष्ट गठबंधन में हैं। हालाँकि बिहार के बाद सेना भी अपेक्षा करेगी कि उसे चुनाव लड़ने के लिए पिछली बार जितनी सीटें मिलें।   

बिहार की संधि का महत्त्वपूर्ण परिणाम है कि भाजपा को हानि पहुँचाकर एनडीए को लाभ पहुँचाया जा रहा है, जिसकी दो उलझनें हैं- पहला यह कि एनडीए को अधिक सीटें मिलेंगी लेकिन 2019 में गठबंधन पार्टियाँ मंत्रालयों व मंत्रीमंडल के लिए मोदी व शाह से अच्छा सौदा करेंगी।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और गुजरात जैसे राज्यों में सीटों का नुकसान होने के बावजूद यदि बिहार की तरह महाराष्ट्र में भी संधि हो जाती है तो 2019 में मोदी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के अवसर बढ़ जाते हैं।

नीचे दो तालिकाएँ दी हुई हैं- एक भाजपा/एनडीए की सबसे खराब हालत को दर्शाती है और दूसरी सर्वश्रेष्ठ अंकों को। अभी कहा नहीं जा सकता यदि अप्रिल-मई 2019 तक मोदी और शाह अपना कोई और पत्ता खोलें तो उसका क्या परिणाम होगा लेकिन बिहार की संधि के बाद ये यथार्थवादी आँकड़े हैं।

नोट- चुनावी हवा को परे रखें तो दोनों ही दृश्यों में विपक्षी दल 272 का बहुमत का आँकड़ा छूने में सक्षम हैं लेकिन इन क्षेत्रीय पार्टियों में आपसी मनमुटावों (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम बनाम द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, त्रिणमूल कांग्रेस बनाम वामदल, तेलंगाना राष्ट्र समिति बनाम कांग्रेस, तेलुगु देसम पार्टी बनाम वाईएसआर कांग्रेस, युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट बनाम लेफ्ट डेमोर्केटिक फ्रंट आदि) से दृश्य परिवर्तित हो सकता है। अगर एनडीए सरकार 272 का आँकड़ा नहीं छू पाती तो इसे बिजू जनता दल या वाईएसआर कांग्रेस या दोनों को अपने साथ मिलाने का प्रयास करना चाहिए।

2019 में एनडीए के लिए सबसे खराब हालत की सीट तालिका

2019 में एनडीए के लिए सर्वश्रेष्ठ दृश्य की सीट तालिका