राजनीति
भगवा ध्वज लगाने पर बिहार पुलिस द्वारा दर्ज मामला “शक्ति का दुरुपयोग”- विधिविद

आशुचित्र- बजरंग दल के लोगों द्वारा भगवा ध्वज लगाने पर बिहार पुलिस की कार्रवाई आलोचनाओं के घेरे में आई है।

बिहार के नालंदा जिले में पुलिस ने कई लोगों को हिंदू दुकानदारों की दुकानों पर भगवा ध्वज लगाने को कहकर “दूसरे संप्रदाय की धार्मिक भावना आहत करने” का आरोप लगाया है जिसे कानून जानकार “शक्ति का सकल दुरुपयोग” मानते हैं।

नालंदा के बिहार शरीफ के लहेरी पुलिस थाने में प्राथमिकी (क्रमांक 147/2020) दर्ज की गई है। यह एफआईआर बिहार शरीफ के प्रखंड विकास पदाधिकारी राजीव रंजन की शिकायत पर 20 अप्रैल को दर्ज की गई।

शिकायत

रंजन की शिकायत (जिसकी प्रति स्वराज्य  के पास है) में कहा गया- 18 अप्रैल को दोपहर 12.15 बजे के आसपास उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी मिली कि बजरंग दल के सदस्य एक चौक के निकट हिंदुओं की दुकानों पर भगवा ध्वज लगा रहे हैं।

शिकायत में कहा गया कि बजरंग दल सदस्य हिंदुओं को केवल हिंदुओं की दुकान या भगवा ध्वज लगी दुकानों से फल, सब्ज़ी और किराना खरीदने को कह रहे थे। शिकायत का यह भी कहना है कि ऐसे कृत्यों के कारण सांप्रदायिक सद्भावना आहत हो सकती है और सांप्रदायिक तनाव भी उत्पन्न हो सकता है।

शिकायत के अंत में कहा गया, “जाँचोपरांत यह भी ज्ञात हुआ कि बजरंग दल नालंदा के उक्त सदस्यों द्वारा @rahulprince1432 आईडी से सोशल साइट ट्विटर पर उपरोक्त बातों को ट्वीट किया गया है एवं दुकानों पर भगवा ध्वज लगाते हुए छायाचित्र प्रसारित किए गए हैं।” शिकायत में दो “बजरंग दल सदस्यों” के नाम लिखे गए- कुंदन कुमार और धीरज कुमार।

लहेरी पुलिस थाने के थाना गृह अधिकारी (एसएचओ) रंजीत राय ने संवाददाता को फ़ोन पर बताया कि कुंदन कुमार, धीरज कुमार और ट्विटर आईडी चलाने वाले को “चार-पाँच अज्ञात लोगों” के साथ आरोपी बनाया है। उनपर आईपीसी की धारा 147,149, 188, 153ए, 295ए और आईटी अधिनियम की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आईपीसी धारा 147 दंगा, 149 समान लक्ष्य का अभियोजन करने में विधिविरुद्ध जनसमूह, 188 जनसेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा, 153ए धार्मिक आधार पर दो समूहों के बीच शत्रुता प्रोत्साहित करने और 295ए धर्म और धार्मिक मान्यताओं का अपमान कर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए हैं।

सोशल मीडिया पर कानूनविदों ने इसे “शक्ति का सकल दुरुपयोग” कहा है। अधिवक्ता राकेश सिंह का कहना है कि धारा 295ए का लगाना गलत है।

ट्विटर पर पोस्ट शृंखला के माध्यम से उन्होंने अपनी बात समझाई, “एफआईआर का दुरुपयोग है। धारा 295ए का उद्देश्य धर्म और धार्मिक मान्यताओं का अपमान कर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए जान-बूझकर और दुर्भावना से किए गए कृत्यों को दंडित करना है।”


@realitycheckind नामक हैंडल से निरंतर अपने विचार प्रकट करने वाले ने कहा कि धारा 295ए का लगाया जाना “ऊटपटांग” है।

“यह ऊटपटांग है, कोई अन्य वैधानिक विकल्प नहीं है। राज्य को पुलिस के इस दुस्साहस पर प्रहार करना चाहिए। ‘दूसरों की भावनाओं को आहत करने’ में सक्रिय आपत्तिजनक तत्व होना चाहिए।”, उन्होंने लिखा।


दूसरे वकील निखिल मेहरा ने ट्विटर पर लिखा, “वे हिंदू पहचान की अभिव्यक्ति को उकसावा समझ रहे हैं। इसका कोई वैधानिक आधार नहीं है।”


जब संवाददाता ने एसएचओ रंजीत राय से पूछा कि दूसरों की धार्मिक भावना आहत करने और दंगे का आरोप क्यों लगाया गया है तो उन्हेंने कहा, “गूगल करें और जान लें।”

शिकायतकर्ता राजीव रंजन ने एफआईआर के आरोपों पर कुछ कहने से मना कर दिया। “मैं इन सबके बारे में नहीं जानता। मैंने एक वरिष्ठ के निर्देशों के आधार पर शिकायत दर्ज की है।”, संवाददाता को उन्होंने बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े बजरंग दल के उत्तर बिहार के लिए सह-संयोजक शुभम भारद्वाज ने संवाददाता से कहा कि एफआईआर बिहार पुलिस के हिंदुओं के विरुद्ध भेदभावपूर्ण व्यवहार का सूचक है।

“मुस्लिमों की सैकड़ों दुकाने हैं जो हरा झंडा लगाते हैं और होर्डिंग पर ‘मुस्लिम’ लिखते हैं। पुलिस उन्हें दूसरों की भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं पकड़ती। क्यों केवल हिंदू?”, उन्होंने कहा।

भारद्वाज ने यह भी कहा कि सार्वजनिक रूप से सदस्यों ने हिंदुओं को हिंदुओं से ही खरीदने की कोई बात नहीं कही है। “साक्ष्य कहाँ है? हमें दिखाइए।”, उन्होंने कहा। भारद्वाज ने बताया कि संस्था इस मामले के लिए वकीलों के संपर्क में है।

स्वाति गोयल शर्मा स्वराज्य में वरिष्ठ संपादक हैं और वे @swati_gs के माध्यम से ट्वीट करती हैं।