राजनीति
गौरक्षक बनना और गौमांस माफिया के खिलाफ खड़ा होना आसान नहीं

प्रसंग
  • गौरक्षक सिर्फ गायों की रक्षा ही नहीं करते हैं, बल्कि वे अपनी आजीविका, अपनी जीवन शैली, अपनी संपत्ति और अपने परिवारों की रक्षा के लिए भी संघर्ष करते हैं

यदि अलवर का उल्लेख खतरे की घंटी है तो सम्भावना है कि यह मॉब लिंचिंग के सन्दर्भ में है|  गायों को ढोने वाले मुस्लिम लोगों पर ग्रामीणों द्वारा हमलों और कुछ मामलों में उनकी मृत्यु के इसी क्षेत्र से प्राप्त हुई है | पहला सबसे बड़ा मामला था पहलू खान का, जिसकी मृत्यु पिछले साल अप्रैल में एक भारी भीड़ द्वारा हमले के बाद हुई थी | दूसरा मामला दो महीने पहले 29 वर्षीय रकबर खान का सामने आया।

इन मामलों ने अलवर को हमलावरों के एक ऐसे गढ़ के रूप में चित्रित किया जिनका खास निशाना सिर्फ मुसलमान हैं।  इससे किसी के भी दिमाग पर यह छाप पड़ती है कि यहाँ के हिन्दू ग्रामीण गायों को ला रहे-ले जा रहे मुसलमानों को देखना बर्दाश्त नहीं कर सकते। या फिर उनके दिमाग में शक इस कदर घर कर गया है कि किसी भी मुसलमान के साथ अगर गाये है तो वो उसे गौकशी के लिए ही ले जा रहा है।

हालाँकि इस कहानी में त्य यह है कि एक और सीमावर्ती जिले भरतपुर के साथ-साथ अलवर घातक गौ-तस्करों का एक गढ़ है जो चोरी करते हैं, लूटते हैं, गोली मार देते हैं और हत्या कर देते हैं |आधी रात में मीट माफिया अपने काम में लग जाते हैं, सड़कों और घरों से गायों को उठाते हैं और अंततः मांस के लिए क़त्ल करने के लिए उन्हें अमानवीय तरीके से वाहनों में ठूंस कर भर देते हैं | इस अपराध का अड्डा है हरियाणा का मेवात क्षेत्र जहाँ लगभग मियो मुस्लिम ही रहते हैं |

एक दशक पहले इन मामलों में तेजी आने के बाद गाँव वालों को रात में निगरानी रखनी पड़ी। जिससे धीरे- धीरे स्थानीय स्तर पर गौरक्षा के लिए समर्पित दलों का गठन हुआ।

समाचार रिपोर्टों पर एक सरसरी नज़र से पता चलता है कि इन कार्यकर्ताओं द्वारा दी गयी चेतावनियों की मदद से गौ तस्करों को लगभग हर दूसरी रात गिरफ्तार किया जाता है | वे चोरी की हुई गायों को जंगलो में खींच कर ले जाते हुए और वाहनों में ले जाते हुए पकड़े जाते हैं|

जैसा कि स्वयं अलवर के पुलिस अधीक्षक राजेंद्र सिंह द्वारा स्वीकार किया गया कि ये गौरक्षक पुलिस के लिए मुखबिर की तरह काम करते हैं और जब कभी भी संदिग्ध गतिविधि की आहट होती है तो सूचना देते हैं | सिंह ने ‘स्वराज्य’ को बताया, “गौरक्षक हमारी मदद करते हैं |”

हालाँकि, पिछले तीन वर्षों में पुलिस कार्यवाही के बावजूद गाय की तस्करी का खतरा कम नहीं हुआ है|

रकबर खान को 21 जुलाई को रात 12 से 1 बजे के बीच गायों को खेतों से होते हुए ले जाते समय धरा गया था। गौ रक्षकों और ग्रामीणों को यह संदेह था कि वह एक तस्कर था |

जांच जारी है लेकिन यह सामने आया है कि अलवर के लल्लनवाड़ी गाँव के जिस रास्ते पर ग्रामीणों से उसका आमना-सामना हुआ वह तस्करों के लिए एक नियमित रास्ता है| खेत के मालिक कैलाश यादव ने हिंदी दैनिक ‘पत्रिका ‘ को बताया कि वह अक्सर रात में उठकर लोगों और जानवरों के पैरों के निशान देखते थे और फसलों को कुचला हुआ पाते थे| इस तरह की कई घटनाओं की पुनरावृत्ति के बाद स्थानीय निवासियों ने जाल बिछाने और अपराधियों को पकड़ने का निर्णय लिया| जब उन्होंने रकबर खान को पकड़ा और तब पुलिस के हवाले कर दिया|

हालाँकि उसी रात अज्ञात परिस्थितियों में रकबर खान की मौत के बाद एक विवाद उत्पन्न हुआ| रकबर खान की पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट कहती है कि उसके पूरे शरीर में अंदरूनी चोटें, फ्रैक्चर और रगड़ के निशान थे| शुरुआत में हमले का आरोप ग्रामीणों पर लगाया गया लेकिन तस्वीरें रकबर खान को जिन्दा और पुलिस वाहन के सामने बैठा हुआ दिखा रही हैं, जिसने अब पुलिस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है| कैलाश के बेटे धर्मेन्द्र यादव समेत कई ग्रामीणों पर लगाये गए आरोपों पर अब सवाल उठाया जा रहा है|

रकबर खान की तस्वीरें अलवर के सबसे प्रसिद्ध गौरक्षक नवल किशोर शर्मा द्वारा ली गयीं थीं| तस्करों के निशाने पर रहने वाली रामगढ़ तहसील के निवासी शर्मा ने ‘स्वराज्य’ को बताया कि ग्रामीणों द्वारा रकबर खान के पकड़े जाने की सूचना उन्होने ने ही पुलिस को दी थी|

शर्मा ने ‘स्वराज्य’ को बताया, “हालाँकि मैं रामगढ़ में 15 सालों से रह रहा हूँ, लेकिन मैं लल्लनवाड़ी का रहने वाला हूँ और गाँव के सभी रास्तों से परिचित हूँ| जब मुझे लल्लनवाड़ी से सूचना मिली कि उन्होंने एक तस्कर को पकड़ लिया है तब मैं अपने घर में सो रहा था, इसलिए मैंने अपनी जान पहचान के एक पुलिस अधिकारी को फ़ोन किया| लेकिन मेरा फ़ोन एक नए पुलिसकर्मी मोहन सिंह ने उठाया,जिन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने उसी दिन ड्यूटी ज्वाइन की है और पिछले पुलिस अधिकारी का तबादला हो गया है| मोहन सिंह ने मुझसे अनुरोध किया कि मैं लल्लनवाड़ी तक उनके साथ चलूँ क्योंकि वह इस क्षेत्र में नए थे| अतः हम साथ में लल्लनवाड़ी गए, रकबर को लिया और रामगढ़ वापस आ गए| 3 बजे के आस-पास मैं बचायी गयी गाय को सौंपने के लिए गौशाला गया| जब मैं पुलिस स्टेशन वापस आया, रकबर खान की मौत हो चुकी थी|”

शर्मा ने कहा कि रामगढ़ के रास्ते पर उन्होंने रकबर की तस्वीरें ली थीं। जब हम शनिवार (19 अगस्त) को रामगढ़ में शर्मा के निवास पर उनसे मिले तो उन्होने बताया कि “तस्वीरें स्पष्ट रूप यह दर्शाती हैं कि रकबर को पुलिस को सौपने तक वह एकदम ठीक और जिंदा था। उसने रास्ते में चाय भी पी थी। उसकी मौत पुलिस हिरासत में ही हुई होगी।“

शर्मा ने कहा, “धर्मेंद्र भी मेरे साथ थे। उन्होंने रकबर को पुलिस वाहन में कपड़े बदलवाए। लेकिन खुद को बचाने के चक्कर में पुलिस ने धर्मेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया है, धर्मेंद्र निर्दोष है’’।

रकबर के मामले के सलूक ने शर्मा और अन्य गौ रक्षकों और ग्रामीणों को क्रोधित किया है। निःसंदेह, वे आश्वस्त हैं कि हरियाणा के मेवात जिले के कोलगांव गांव का निवासी रकबर एक तस्कर था। उन्होंने सवाल किया “ऐसा कौन सा डेयरी किसान है जो आधी  रात को दूध न देने वाली गाये के साथ घूमता है और वह भी पड़ोसी राज्य में? हमने 18,000 गायों को बचाया है। हम जानते हैं कि वे कैसे काम करते हैं।”

हरियाणा सरकार ने रकबर के परिवार को 8 लाख रुपये मुआवजा देने की जो बात कही है वह शर्मा और उनके समूह के लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रही है। शर्मा का कहना है कि “राज्य सरकार तस्करों को संरक्षण दे रही है।”

निर्दोष आरोपी को रिहा करने का विरोध कर रहा यह समूह, सरकार द्वारा गौ-तस्करों के मामले में पक्षपात की बात कहते हुए सरकार को घेरने की मंशा बना रहा है।

फूल सिंह एक किसान हैं और शर्मा के सहायक भी, कहते हैं, कि हमने तो ठान लिया है कि अगली बार जब किसी गौ-तस्कर को पकड़ेंगे तो उसको फूलों की माला पहनाएंगे और हरियाणा के मुख्यमंत्री एम.एल. खट्टर से उसको सम्मानित करने की माँग करेंगे। सिंह ने कहा कि “हम एक प्रेस कांन्फ्रेंस आयोजित करके कहेंगे कि खट्टर साहब यह आपका बहनोई है, इसको इनाम दो।”

शर्मा और सिंह दोनों इस बात को लेकर गुस्से में हैं कि न तो राजस्थान सरकार और न ही हरियाणा सरकार ने उन किसानों और गौ-रक्षकों को एक फूटी कौड़ी तक दी  जिनको गौ-तस्करों ने घायल कर दिया है या मार डाला है। शर्मा ने कहा, “अनुदान तो भूल जाओ, उन्होंने पशुओं के नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा तक नहीं दिया है।”

गौ-रक्षकों की शिकायत सही हो सकती है। मॉब लिंचिंग के मामलों के विपरीत, मांस माफियाओं ने बहुत से लोगों को गंभीर रूप से घायल किया और बहुतों को मौत के घाट तक उतार दिया। लेकिन इन मामलों में किसी भी राज्य ने मुआवजे की बात नहीं कही है।

सिंह पूछते है कि “उन्होंने पहलू खान के परिवार को नकदी और अन्य लाभ कैसे दे दिए ! क्या पुलिस की जाँच से यह बात सामने नहीं आती कि पहलू एक तस्कर था ।” गौरतलब है कि पहलू खान के मामले में दाखिल किए गए आरोप पत्र में अलवर पुलिस ने कहा था कि वह तस्करी में शामिल था, क्योंकि पहलू और उसके साथियों के पास जरूरी कागजात नहीं थे। यह पहलू खान के परिवार द्वारा किए गए दावे के खिलाफ था, जिसमें  कहा गया था कि 55 वर्षीय पहलू एक डेयरी किसाने था जो जयपुर पशु मेले से गायों को ला रहा था। उसके पास वैध कागजात थे जिनको भीड़ ने फाड़ डाला था। कार्यकर्ताओं ने आरोप पत्र का विरोध किया था, जिसमें पहलू की हत्या के लिए भी नौ लोगों को आरोपी ठहराया गया था।

शर्मा ने बताया कि “उन लोगों को ग्रेटर नोएडा में एक फ्लैट और लाखों रुपये दिए गए थे। हमें पता है ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दिल्ली की मीडिया जितना गौवध करने वालों का समर्थन करती है उतना गौरक्षकों का नहीं करती।”

सिंह ने बताया, “दिल्ली के पत्रकार हमारा इंटरव्यू लेने के लिए आते रहते हैं। उनके कहने पर, हम उन्हें यह दिखाने के लिए मैदान में ले जाते हैं कि तस्करों से गायों को कैसे बचाया जाता है। हम लोग तस्करों की गाड़ियों को रोकते हैं, उन्हें पकड़ते हैं, उन पर अपनी बंदूक तान देते हैं, पुलिस को बुलाते हैं और गायों को गौशालाओं में भेज देते हैं, यह पूरा मामला पत्रकारों के सामने ही होता है। पिछले साल, एक फोटो जर्नलिस्ट हमारे साथ था उसने पैंट में ही शौच कर दिया था, फिर हमने उसके कपड़े बदलवाए थे।” ऐसा कहकर सिंह हंसने लगे। सिंह का कहना है कि “मैं नहीं जानता कि वे अंग्रेजी में क्या लिखते हैं। लेकिन सुना है कि वे वापस जाकर हमारे खिलाफ ही लिखते हैं।”

शर्मा की पत्नी पत्रकारों से काफी जिज्ञासा से पूछती है कि “दीदी, मुझे सच बताओ क्या आप और दूसरे पत्रकार गायों की पूजा नहीं करते हैं? या आप भी गोमांस खाते हैं?”

नवल किशोर शर्मा, जो विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) से संबद्ध हैं और पुलिस के साथ मिलकर गुप्त रूप से काम करते हैं, के विपरीत अलवर शहर का रहने वाला किसान रमेश दशकों से गायों को गौ तस्करों से बचाने के लिए अपने घर के चारों ओर रात भर पहरा देता है। उसके घर के पास खाली पड़ी जमीन ‘गोचर भूमि‘ के रूप में गायों के चरने के काम आती है, जहाँ रात में बड़ी संख्या में गायें आश्रय की उम्मीद से आती हैं। यह जगह स्वाभाविक रूप से तस्करों का टारगेट थी। जब हम उससे उसके घर पर मिले, उसके दोनों बेटे उसके बगल में खड़े थे, उसने कहा, “वे दिन में जायजा लेने के लिए मोटसाइकिल पर और रात में वाहनों से आते हैं। लेकिन हमारी बस्ती उनसे टक्कर लेती है। कई मौकों पर तो उन्होंने हमें गोली से भी मारना चाहा।

पिछले महीने, शर्मा ने सक्रियता दिखाते हुए गोचर भूमि के इर्द-गिर्द बड़े-बड़े पत्थर रख दिये, इसलिए अब गायें वहां से कहीं और नहीं जा सकतीं।

शर्मा के अनुसार वह पहले 10 गायों के मालिक थे लेकिन अब यह संख्या कम हो गई है। 2010 से, लगातार तस्करी के कारण वह अपने मवेशियों को खोते जा रहे हैं। उनका धैर्य तो तब समाप्त हुआ, जब कुछ महीने पहले उनकी चार गायें एक साथ तस्करी कर ली गईं। वह दुखी होकर कहते हैं, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भ्रष्ट हो गया है और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार कोई काम की नहीं।”

उसने कहा, “हमने [कांग्रेस] सरकार से तो कभी कुछ उम्मीद ही नहीं की। लेकिन यदि इस सरकार के तहत भी गायों की रक्षा नहीं की जाती है, तो मेरा इससे कोई लेना-देना नही है। मैं एक स्वाभिमानी गौ रक्षक हूं लेकिन फिर भी मैं ये पत्थर लेकर आया और गोचर भूमि को अवरुद्ध कर दिया।”

शर्मा ने कहा, “ताबूत में आखिरी कील तब जड़ी गई जब मैंने गोवा के एक भाजपा नेता को टेलीविजन पर गर्व से यह कहते हुए सुना कि वह गोमांस खाते हैं, और अपनी चोरी हो चुकी गायों की स्थिति के बारे में पता करने के लिए पुलिस हेल्पलाइन को फोन किया। फोन पर दूसरी तरफ से व्यक्ति ने दवाब दिया कि जाँच चल रही है और फोन रख दिया।  उन्होंने कहा, “आपने इसे स्वयं देखा है। गायों की रक्षा करने का दिखावा करने वाली इस सरकार के अंतर्गत गायों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “तस्करी करने वाले लोग रास्ते में पड़ने वाली पुलिस चौकियों में रुपये की गड्डियां फेंक देते हैं और बदले में उन्हें आगे की यात्रा करने की छूट मिल जाती है। और यह सब प्रशासन की नाक के नीचे होता है।”

उनका बेटा पास की खाली पड़ी गौशाला दिखाते हुए रोने लगता है और कहता है कि उनके बच्चों को बाहर का दूध पीने  के लिए मजबूर होना पड़ता है। वे कहते हैं, “मैं यह सोच भी नहीं सकता कि उन्होंने मेरी गायों के साथ क्या किया होगा।”

वह कड़वाहट के साथ कहते हैं, “हमने अपनी गायों को खो दिया और मॉब लिंचिंग का एक नया पाठ सीखा है। हम इससे क्या समझे कि एक चोर आपके घर आता है तो आप हाथ जोड़कर खड़े हो जाते है उसे स्वयं को लूटने देते हैं। यदि आप विरोध करते हैं तो वे कहते हैं कि मॉब लिंचिंग हो गई है।”

शर्मा कहते हैं, “संघ युवा लड़कों का उपयोग कर रहा है। वे उन युवा लड़कों को भड़काते हैं और परिणामस्वरूप वे लड़के तस्करी करने वाले या गायों को ले जाने वाले किसी भी व्यक्ति को मारते हैं। लेकिन जब लड़कों को बुक कर लिया जाता है, तो संघ दूसरा रास्ता अपनाता है। उन्होंने रकबर मामले में निर्दोष लड़कों को आरोपी बना दिया।”

शर्मा गुस्से से पूछते हैं, “पुलिस ने सिर्फ एक कॉलोनी से 221 गायों की खाल बरामद की है। अब संघ कहां है?” शर्मा इस महीने की शुरुआत में अलवर के गोबिंदगढ़ में हुए एक चौंकाने वाले मामले का जिक्र कर रहे हैं, जहाँ पुलिस ने चेतावनी देने के बाद एक घर पर छापा मारा और 60 किलोग्राम गोमांस को प्लास्टिक के पैकेट में पैक कर रही तीन महिलाओं को पकड़ा। पता चला है कि घर का मालिक सकील, जो एक कसाई है,  ने जंगल में एक गाय को मार डाला था और मांस को पैक करने और ग्राहकों को भेजने के लिए अपने घर लाया था। आगे की जाँच ने पुलिस को चौंका दिया: उसी कॉलोनी में 221 गायों की खाल से भरे हुए दो गोदामों का पता लगाया गया, विशेषज्ञों ने बताया कि बरामद की गई 221 गायों की खालें एक महीने से अधिक पुरानी नहीं थीं। स्थानीय मीडिया ने इसे हाल के दिनों में अलवर में गोवध का सबसे बड़ा मामला बताया है।

जब ‘स्वराज्य’ ने विश्व हिंदू परिषद के अलवर जिला अध्यक्ष केशव चंद्र शर्मा से मुलाकात की, तो उन्होंने आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि वे रकबर की मौत के लिए गिरफ्तार तीन “निर्दोषों” की रिहाई के लिए बहुत दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम सरकार से स्वतंत्र होकर कार्य करते हैं। हम गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।”

शर्मा के अनुसार, लगातार हो रही गाय तस्करी के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि, “जिन क्षेत्रों में मुसलमान बहुतायत संख्या में हैं उन क्षेत्रों की गोचर भूमि का वे अतिक्रमण कर लेते हैं।” हरियाणा के मेवात में एक कानूनी कार्यवाही के लिए बुलाए जाने के बाद एक समाधान के रूप में सुझाव देते हुए उन्होंने बताया, “जब गायों के लिए कोई स्थान नहीं होता है तो वे आवासीय क्षेत्रों में जाती हैं। वे चारों ओर भटकती हैं और उन्हें तस्करी करने वाले ले जाते हैं। गायों को फिर से वहीं ले जाने की जरूरत है जहाँ से वे आई हैं। उन्होंने बताया, “अगर मेवात में छापा डाला जाए तो गो तस्करी में साठ प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। यदि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में गोमांस पूरी तरह से निषिद्ध कर दिया जाय तो इस पर रोक लग जाएगी।”

जब गौ रक्षकों द्वारा मॉब लिंचिंग की घटनाओं के बारे में पूछा गया तो अलवर पुलिस प्रमुख राजेंद्र सिंह ने बताया कि कानूनन ऐसे लोगों के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव किया जाता है। उन्होंने बताया, “जब मैं कहता हूँ तो गौ रक्षक हमारी मदद करते हैं, मेरा मतलब उन कार्यकर्ताओं से है जो हमारे मुखबिर के रूप में कार्य करते हैं। मेरा मतलब उन गौ रक्षकों से नहीं है जो भ्रष्ट हैं। ऐसे मामले हमारे सामने आए हैं जहाँ गो रक्षक केवल धमकी देकर पैसे वसूलने के चक्कर में तस्करों को पकड़ लेते हैं।”

विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) के कुछ कार्यकर्ताओं ने ‘स्वराज्य’ को बताया कि पुलिस नियमित रूप से छापे या गो तस्करों को पकड़ने में साथ देने के लिए संगठन से 10-15 गो रक्षकों की माँग करती है। एक वरिष्ठ वीएचपी कार्यकर्ता ने ‘स्वराज्य’ को बताया, “तस्कर पुलिस से नहीं डरते हैं लेकिन वे पटका (केसरिया गमछा) से डरते हैं।”

लेकिन सिंह ने इस पर इनकार करते हुए कहा, “गो रक्षक केवल मुखबिरों के रूप में कार्य करते हैं और उन्हें इस बात का खुलासा भी नहीं करना चाहिए।”

सिंह ने कहा कि अलवर में गो तस्करी की आशंका अधिक है। उन्होंने कहा, “जिले में करीब 3,000 वांछित अपराधी हैं, जिसमें 500 गाय तस्कर हैं। इनमें से छठा भाग केवल गो तस्करी जैसे अपराध में शामिल है। मीडिया में दावों के विपरीत, हमारी कड़ी कानूनी कार्यवाही की वजह से गो तस्करी में सचमुच गिरावट हो रही है। उन्होंने कहा, “2016 से लेकर आज तक हम आरबीए (राजस्थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रवर्जन या निर्यात का विनिमयन) अधिनियम, 1995) के तहत करीब 800 लोगों को पकड़ चुके हैं।

सिंह ने कहा कि पुलिस ने हाल ही में इन वांछित गो तस्करों (जो बार-बार यह अपराध करते हैं) साथ ही तस्करों से धमकी देकर पैसे वसूलने वाले ‘गौ रक्षकों’ का डेटाबेस तैयार किया है।

स्वाती गोयल शर्मा स्वराज्य में एक वरिष्ठ संपादक हैं। इनका ट्विटर हैंडल @swati_gs है।