राजनीति
गौ तस्करी की घटनाओं पर लॉकडाउन का कोई प्रभाव नहीं, जारी है गौमांस “व्यवसाय”

कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण भारत पिछले डेढ़ महीनों से रुका हुआ है। करोड़ों लोग घरों में बंद हैं और उद्योग व सेवाएँँ भी विराम पर हैं। लेकिन एक “व्यवसाय” है जो निरंतर चल रहा है और यह व्यवसाय है गौ तस्करी का।

8 मई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने रामपुर जिले में मुठभेड़ के बाद आठ गौ तस्करों को पकड़ा। पुलिस को खबर मिली थी कि जंगल में मवेशी चोर गौहत्या कर रहे हैं। जब पुलिस घटनास्थल पर पहुँची तो आरोपियों ने पुलिस पर गोली चलाई लेकिन पुलिस ने उनपर काबू पा लिया। 1 क्विंटल गौमांस और कुछ अवैध हथियार समूह से बरामद किए गए।

ऐसी ही घटना कैराना जिले में हुई जहाँ पुलिस ने दो गौ तस्करों को गौहत्या करते हुए रंगे हाथ पकड़ा। इनमें से एक के ऊपर 15,000 रुपये की पुरस्कार राशि भी थी। उनके पास अवैध हथियार और 3 क्विंटल गौमांस मिला।

उत्तराखंड के बाज़पुर में 9 मई को जब पुलिस ने अवैध कसाईखाने में छापा मारा तो 3 क्विंटल गौमांस मिला। गौ तस्कर भागने में सफल रहे।

इसी दिन राजस्थान की भरतपुर पुलिस ने चेक पोस्ट पर कुछ वाहनों को रोकने का प्रयास किया लेकिन वे रुके नहीं। जब पुलिस ने उनका पीछा किया तो उनपर गोलियाँ चलाई गईं। हालाँकि पुलिस सभी छह वाहनों को रोकने में सफल हुई जिसमें कुल 66 मवेशी मिले। इनमें से 29 गायें थीं और नौ मवेशी मृत थे। हरियाणा के मेवात के ये गौ तस्कर गिरफ्तार करके जेल भेजे गए।

2 मई को निकटवर्ती डीग में हत्या के लिए ले जाए जा रहे 10 मवेशियों से भरे एक मिनी ट्रक को पुलिस ने पकड़ा। पुलिस पर गोली चलाते हुए वाहन छोड़कर गौ तस्कर भाग गए।

इसी दिन मेरठ पुलिस ने गौहत्या करने व गौमांस बेचने वाले 11 गौ तस्करों को पकड़ा। दुग्ध किसान होने की आड़ में वे गौ तस्करी कर रहे थे। आरोपियों के सिर पर 25,000 रुपये की पुरस्कार राशि थी।

5 मई को बुलंदशहर पुलिस ने दो गौ तस्करों को पकड़ा जिनके सिर पर 20-20,000 रुपये की पुरस्कार राशि थी। इसी दिन मुज़फ्फरनगर पुलिस ने दो गौ तस्करों को रंगे हाथ पकड़ा। पुलिस को 1 क्विंटल गौमांस और अवैध हथियार घटनास्थल से मिले।

9 मई की देर रात को उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक चेक पोस्ट पर पुलिस ने बिना नंबर प्लेट की एक बाइक अपनी ओर आते हुई देखी। जब पुलिस ने बाइक को रोकने का प्रयास किया तो वाहनसवारों ने भागने का प्रयास किया।

जब पुलिसकर्मी उनके निकट गए तो उन्होंने गोली चला दी जिससे चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने उन्हें बाद में पकड़ा और पता चला कि बहराइच और गोंडा जिलों में उनके ऊपर 10 से अधिक गौहत्या के मामले दर्ज हैं। उनके पास से अवैध हथियार बरामद हुए।

इसी दिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने अयोध्या में चार गौ तस्करों को गिरफ्तार किया। बदायूं में गायों को चुराकर उनकी हत्या की योजना बना रहे तीन मवेशी चोरों को गिरफ्तार किया गया।

26 अप्रैल को महाराष्ट्र पुलिस ने पाँच गौ तस्करों को नाशिक से गिरफ्तार किया। वे गायों की तस्करी उस वाहन में करते थे जिसपर “जय बजरंग” लिखा हुआ था। इसी दिन राजस्थान पुलिस ने अलवर में दो तस्करों को गिरफ्तार किया जो एक वाहन में 13 मवेशियों को बलपूर्वक भरकर उन्हें हत्या के लिए ले जा रहे थे।

परसों जब उत्तर प्रदेश पुलिस को पीलीभीत में गौ कंकाल मिलने की जानकारी मिली तो उन्होंने तीन कथित तस्करों को गिरफ्तार किया जिनपर गौ हत्या का आरोप है।

10 मई को उत्तर प्रदेश पुलिस को बरेली में जानकारी मिली कि तीन लोग एक कार में गौमांस ले जा रहे हैं। जब पुलिस ने इस वाहन को रोकने का प्रयास किया तो गोली चलाई गई। इन तीनों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया। पुलिस को कार से 5 क्विंटल गौमांस और अवैध हथियार मिले।

हरियाणा के फरीदाबाद में 30 अप्रैल को कुछ गौ तस्कर रात के अंधेरे में गाय चुराने का प्रयास कर रहे थे जब शोर से एक निवासी की नींद खुली। उसने तस्करों से पूछताछ की तो उसपर गोली चला दी गई और तस्कर भाग गए। निवासी ने पुलिस को चोरों की जानकारी दी।

लॉकडाउन के दौरान गौ तस्करी और गौहत्या की घटनाओं में वृद्धि हुई है, इतनी कि विशेष पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव को तस्करोंं को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाना पड़ा।

गौ तस्करी के मामले में हुई गिरफ्तारियों की यह सूची पूरी नहीं है। यह सिर्फ दो सप्ताह की बात नहीं है। ऊपर से ये घटनाएँ सिर्फ वह हैं जो पुलिस कार्रवाई के कारण मीडिया में रिकॉर्ड हुई हैं।

लेकिन यह दर्शाता है कि लॉकडाउन के दौरान जब पूरा देश कोरोनावायरस के कारण थमा हुआ है तब भी गौ तस्कर पहले की ही भाँति कानून के या तथाकथित गौरक्षकों, जिन्हें वामपंथी मुख्यधारा की मीडिया ने तिरस्कृत किया है, के भय के बिना काम कर रहे हैं।

अरिहंत स्वराज्य में वरिष्ठ संपादक हैं।