राजनीति
2018 विधान सभा चुनाव- छत्तीसगढ़ के चुनावों के साथ जानिए परिणाम प्रभावित करने वाले कुछ डाटा बिंदू

आशुचित्र- छत्तीसगढ़ चुनाव के पहले चरण के साथ कुछ महत्त्वपूर्ण डाटा बिंदुओं पर नज़र

छत्तीसगढ़ चुनाव के पहले चरण में 12 नवंबर को 18 सीटों पर मतदान हुआ। ये 18 सीटें नक्सल प्रभावित क्षेत्र में आती हैं। मुख्यमंत्री रमन सिंह राजनांदगाँव के लिए अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी/भांजी के विरुद्ध पहले चरण में चुनाव लड़ रहे हैं। अन्य 72 सीटों पर 20 नवंबर को चुनाव होगा।

सीटें 

छत्तीसगढ़ के चुनावों में हमेशा भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जाती है। राज्य की स्थापना के बाद से भाजपा ने यहाँ लगातार तीनों चुनाव जीते हैं। दोनों पार्टियों की सीट तालिका लगभग वही रही है, भाजपा 49-50 और कांग्रेस 37-39। राज्य चुनाव द्विपक्षीय ही रहे हैं। बहुजन समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने औसतन रूप से दो-तीन सीट जीती हैं। अजीत जागी और मायावती का गठबंधन इस प्रचलन को तोड़कर बदलाव लाने की उम्मीद कर रहा है।

स्रोत- www.india.votes.com

वोट शेयर

भाजपा और कांग्रेस दोनों ने वोट शेयर में बढ़त अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के मूल्य पर हासिल की है। जहाँ भाजपा का वोट शेयर 2003 में 39.3 प्रतिशत से 2013 में 42.3 प्रतिशत तक लगातार बढ़ा है, कांग्रेस ने भी इस अवधि में वोट शेयर में 5 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है। इससे दोनों पार्टियों के बीच वोट शेयर का अंतर लगातार घटा है और 2003 में 2.7 प्रतिशत के अंतर से 2013 में 0.7 प्रतिशत का अंतर हो गया। बसपा का वोट शेयर 4.4 से 6.1 प्रतिशत के बीच रहा है। इसने हमेशा भाजपा के जीत के अंतर से अधिक वोट शेयर हासिल किया है।

स्रोत- www.india.votes.com

जाति

राजनीति में जाति की अहम भूमिका रही है। लोग अपने समुदाय के लोगों से आसानी से जुड़ते हैं, जिससे उनका मत प्रभावित होता है। 44 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की और 41 प्रतिशत जनसंख्या अन्य पिछड़े वर्गों की है जो सरकार बनाने में मुख्य भूमिका में रहेंगे। राज्य में अल्पसंख्यकों का खास प्रतिनिधित्व नहीं है।

स्रोत- सी एस डी एस रिपोर्ट

 

जातीय आधार पर मतदान

ओ बी सी और उच्च जातिवर्ग भाजपा के पारंपरिक रूप से समर्थक रहे हैं। अनुसूचित जाति के मतदाता भी पिछले कुछ वर्षों में भजपा की ओर रुख कर रहे हैं। अनुसूचित जनजातियों का मत दोनों पार्टियों में बराबर रूप से बँटता है। बसपा को अनुसूचित जातियों से समर्थन मिलता है।

स्रोत- सी एस डी एस रिपोर्ट

 

आरक्षित सीटें

छत्तीसगढ़ में कुल 39 आरक्षित सीटें हैं, अनुसूचित जनजाति के लिए 29 व अनुसूचित जाति के लिए 10। आरक्षित सीटों में भाजपा को लगातार नुकसान हो रहा है। दूसरी तरफ कांग्रेस को इसमें लगातार बढ़त मिल रही है। जहाँ अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटों में भाजपा की बढ़त रहती है, अनुसूचित जनजातियों का मत हर चुनाव में बदलता रहता है।

स्रोत- www.india.votes.com

विजय में अंतर  

जीत में अंतर से चुनाव में कड़ी प्रतिस्पर्धा स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। 90 में से 13 सीटों में बहुत कम अंतर था। इस कड़े मुकाबले में भाजपा आधी से ज़्यादा सीटों पर विजयी हुई। आधी सीटों पर 10,000 मतों से अधिक की बढ़त से प्रत्याशी जीते। भाजपा और कांग्रेस के बीच मतों का औसतन अंतर संपूर्ण रूप से 8,000 मतों के अंतर से अधिक था।

स्रोत- सी एस डी एस रिपोर्ट

क्षेत्र

सी एस डी एस के अनुसार छत्तीसगढ़ को उत्तर, मध्य और दक्षिण के तीन क्षेत्रों में देखा जा सकता है। इन 90 सीटों में से सर्वाधिक मध्य भाग में हैं और न्यूनतम दक्षिण में। दिलचस्प बात है कि भाजपा का प्रभुत्व केवल मध्य भाग में ही रहा है और नक्सल प्रभावित उत्तर व दक्षिण क्षेत्रों में यह पीछे रहा है।

स्रोत- सी एस डी एस रिपोर्ट

स्थानीय रूप से क्षेत्र पाँच क्षेत्रों में विभाजित है- अंबिकापुर, विलासपुर, रायपुर, दुर्ग और बस्तर। 2013 में भजपा ने यह मिथक तोड़ा कि जो भी बस्तर जीतता है, वह राज्य जीतता है। 2013 में अंबिकापुर, बिलासपुर और दुर्ग में कड़ा मुकाबला हुआ था।

स्रोत- politicalbaba.com

भागीदारी

मतदाताओं की भागीदारी चुनाव परिणामों को बहुत प्रभावित करती है। उत्तर और मध्य क्षेत्रों में राज्य के औसत से अधिक भागीदारी देखने को मिलती है। क्षेत्रीय भागीदारी संपूर्ण भागीदारी को प्रभावित करती है। 20143 में भाजपा इस तालिका में अधिकांश (49 में से 44) जगह जीती।

स्रोत- सी एस डी एस रिपोर्ट

क्षेत्रीय वोट शेयर

उत्तर और दक्षिण क्षेत्रों में कांग्रेस का वोट शेयर भाजपा से अधिक रहा है। 2013 में मध्य भाग में भाजपा को 5 प्रतिशत मतों की बढ़त मिली थी। यदि कांग्रेस बसपा के साथ चुनाव लड़ती, तो यह भाजपा से सभी क्षेत्रों में आगे रहती, मध्य भाग में भी।

स्रोत- सी एस डी एस रिपोर्ट

नोटा

नोटा की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है। नक्सल प्रभावित दक्षिणी क्षेत्र में 2013 में 5.5 प्रतिशत का सर्वाधिक नोटा दर्ज किया गया था।

स्रोत- सी एस डी एस रिपोर्ट

 

अवधारण (रिटेंशन) अनुपात

2013 में भाजपा 2008 की 50 जीती हुई सीटों में से केवल 24 (48 प्रतिशत) पर ही जीत दर्ज कर पाई, जबकि कांग्रेस 2008 की जीती हुई 38 सीटों में से मात्र 12 (32 प्रतिशत) सीटें ही बचा पाई। प्रभावी से 60 प्रतिशत सीटों पर सत्ता बदली। यह एक बहुत बड़ा आँकड़ा है।

स्रोत- politicalbaba.com

अमिताभ तिवारी पूर्व कॉर्पोरेट व निवेश बैंकर हैं जो अब चुनाव और राजनीति में रुचि दिखा रहे हैं। लेखक के विचार व्यक्तिगत हैं। वे @politicalbaba द्वारा ट्वीट करते हैं।