राजनीति
असम में हिंदू धार्मिक स्थलों व सरकार की भूमि पर से अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू

बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों द्वारा मंदिरों और वैष्णवी मठों जैसे हिंदू धार्मिक स्थलों से संबंधित भूमि पर से अतिक्रमण हटाने के लिए असम ने एक अभियान शुरू किया है।

रविवार (6 जून) को अधिकारियों ने दर्रांग जिले के सिपाझर के पास ढालपुर गाँव में एक प्राचीन शिव मंदिर से संबंधित 120 बीघा भूमि को बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों से मुक्त करवाया, जिस पर उन्होंने अधिकार जमा रखा था।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान धार्मिक संस्थाओं और सरकारी भूमि पर से सभी अतिक्रमण हटाने का वादा किया था। राज्य सरकार ने पहले भी आरक्षित वनों सहित सरकारी भूमि से सैकड़ों अतिक्रमणकारियों को हटाया था।

कुछ वर्ष पूर्व काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से बड़ी संख्या में अवैध कब्ज़ा करने वालों और अवैध निवासियों को हटाया गया था। राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, सिपाझर में शिव मंदिर की करीब 180 बीघा भूमि पर बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों ने अवैध कब्जा किया था।

एक जिला अधिकारी ने कहा, “हमने इन घुसपैठियों को 120 बीघे से हटा दिया और बाकी में जल्द अतिक्रमण अभियान चलाएँगे।” बता दें कि कांग्रेस जब यहाँ सत्ता में थी, तब भी अतिक्रमण अभियान चलाए गए थे। हालाँकि, वे आधे-अधूरे थे। निगरानी के अभाव में अतिक्रमण करने वाले कुछ समय बाद मंदिर की भूमि पर पुनः कब्ज़ा कर लेते थे।

हालाँकि, इस बार अतिक्रमण अभियान पूरी तरह चला। यहाँ तक कि अतिक्रमणकारियों द्वारा बनाए गए घरों और अर्द्धनिर्मित घरों या स्थायी भवनों को भी ध्वस्त कर दिया गया। मंदिर की भूमि पर पुनः कब्ज़ा करने की कोशिश को लेकर अतिक्रमणकारियों को कड़ी चेतावनी भी जारी की गई।

जिला अधिकारियों ने कहा कि संदेश दे दिया गया है कि अगर अतिक्रमणकारी पुनः आते हैं तो उन्हें सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और दंगा करने जैसे कड़े कानूनों के तहत गिरफ्तार किया जाएगा। रविवार को मुस्लिम बहुल होजई जिले में लंका के पास काकिनी में एक और अतिक्रमण अभियान चलाया गया था।

एक सरकारी स्वामित्व वाले रबर प्लांटेशन के अंदर करीब 275 बीघा भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त करवाया गया। वहाँ पर फिर से बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों ने घर बनाकर हल्दी की खेती शुरू कर दी थी।

राज्य क्षेत्र के असम प्लांटेशन क्रॉप्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा संचालित रबर प्लांटेशन 1986 में स्थापित किया गया था। बांग्लादेश से अवैध घुसपैठियों के लगभग 15 परिवार करीब 12 वर्ष पहले आ गए थे और कई रबर के पेड़ों को काटकर उन्होंने हल्दी की खेती शुरू कर दी थी।

होजई जिले के अधिकारियों ने अतिक्रमणकारियों के घरों और हल्दी की फसल को गिराने के लिए भारी उपकरणों का उपयोग किया था। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के अतिक्रमण अभियान अब से नियमित तौर पर चलाए जाएँगे।

राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम अवैध कब्जे के तहत हर एक इंच भूमि को मुक्त करवाने के लिए संकल्पित हैं। इस तरह के अतिक्रमणों का डाटा पूरे राज्य से एकत्र किया जा रहा है।”

असम के मुख्यमंत्री इन अभियानों पर व्यक्तिगत रूप से अपनी नज़र गड़ाए हुए हैं। हिंदू धार्मिक संस्थानों, राज्य व केंद्र सरकार, चाय बागानों और अन्य की बहुत सी हज़ारों एकड़ भूमि पर कांग्रेस शासन के दौरान अधिकतर बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था।