राजनीति
मध्य प्रदेश मतदान के लिए तैयार, जानिए ये 15 बड़ी बातें

प्रसंग

  • यहाँ आगामी मध्य प्रदेश चुनाव में क्षेत्रीय गतिशीलता, जातीय विभाजन और अन्य प्रभावी मुद्दों पर आपकी जानकारी के लिए आँकड़े दिए जा रहे हैं।

28 नवंबर को मध्य प्रदेश में चुनाव होने हैं तो आइये कुछ ऐसे आँकड़ों पर नज़र डालें जो चुनाव के नतीजों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

1. सीटों की गणना

मध्य प्रदेश के द्विभाजन और छत्तीसगढ़ के निर्माण के बाद पहले चुनाव साल 2003 में आयोजित किए गए थे। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य में एक दशक से शासन कर रही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) को बहुत ही शानदार ढंग से हरा दिया था। पिछले 15 सालों से, राज्य की राजनीति में भाजपा हावी है। साल 2003 में भाजपा का 173 सीटों पर कब्जा था जो साल 2008 में घटकर 143 ही रह गईं क्योंकि उमा भारती (पूर्व मुख्यमंत्री) ने पार्टी छोड़ दी थी और भारतीय जन शक्ति पार्टी का गठन कर लिया था। साल 2013 में पार्टी ने शिवराज सिंह चौहान फैक्टर और उमा भारती की घर वापसी की बदौलत दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया था। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) राज्य में तीसरी सबसे मजबूत पार्टी के रूप में उभरने में नाकाम रही।

स्रोत: www.indiavotes.com

2. वोट शेयर

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राज्य में ‘दूसरों’ को झटका देते हुए वोट शेयर हासिल करते रहे हैं। साल 1980 में निर्दलीय और अन्य पार्टियों का वोट शेयर 22.1 फीसदी था जो साल 2013 में घटकर 12.5 फीसदी ही रह गया था। दूसरी ओर बसपा का वोट शेयर 7 फीसदी से 9 फीसदी तक ही रहा। साल 2008 में भाजपा के वोट शेयर में गिरावट की बड़ी वजह उमा भारती का पार्टी छोड़ना था जिन्होंने 4.7 फीसदी वोट शेयर दर्ज किया था।

स्रोत: www.indiavotes.com, www.politicalbaba.com

3. जातीय गतिशीलता

जाति एक अहम तत्व है, यह तय करती है कि जनता कैसे मतदान करती है और बदले में चुनाव का नतीजा क्या होता है। यहाँ पर उच्च जाति की 22 फीसदी, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की 33 फीसदी और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) की 37 फीसदी आबादी है। हर पार्टी हर सीट पर एकदम सही जातीय समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है। कई जातियाँ एक दूसरे के प्रति विरोधी हैं और एक साथ मतदान नहीं कर सकते हैं जैसे कि ब्राह्मण और राजपूत। मुस्लिमों की जनसंख्या केवल 6 प्रतिशत है और इस तरह वे मध्य प्रदेश चुनाव में प्रमुख भूमिका नहीं निभाते हैं।

स्रोत: सीएसडीएस रिपोर्ट, www.politicalbaba.com

4. साल 2013 में पार्टियों के वोट शेयर

भाजपा के करीब 80 फीसदी वोट शेयर के लिए उच्च जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता जिम्मेदार हैं। जबकि कांग्रेस के 75 फीसदी वोट शेयर के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाता जिम्मेदार हैं।

स्रोत: सीएसडीएस रिपोर्ट, www.politicalbaba.com

5. आरक्षित सीटें

भाजपा की लगातार तीन बार की जीत में, आरक्षित सीटों पर ज्यादातर भाजपा का ही कब्जा रहा है। राज्य विधानसभा की कुल 230 सीटों में से 82 सीटें आरक्षित हैं, जिसमें से 35 सीटें अनुसूचित जाति तथा 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए हैं। कुछ सालों से आरक्षित सीटों पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत हुई है जो इसने मुख्य रूप से अन्य पार्टियों से या भाजपा से हासिल की है। भाजपा ने साल 2013 में 47.3 फीसदी वोट शेयर अनुसूचित जाति की सीटों से तथा 43.6 फीसदी वोट शेयर अनुसूचित जनजाति की सीटों से हासिल किया था। दोनों वर्गों (एससी/एसटी) के लिए नोटा (नन ऑफ दि एबॉव, हिंदी अनुवाद – इनमें से कोई नहीं) का प्रतिशत क्रमशः 1.9 और 3.1 था, जो राज्य औसत से ज्यादा था।

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अनुसूचित जाति की मतदान वरीयता

अनुसूचित जनजाति की मतदान वरीयता

स्रोत: सीएसडीएस रिपोर्ट, www.politicalbaba.com

6. जातिगत मतदान, 2013

उच्च जाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग भाजपा का वोट बैंक रहे हैं जबकि अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति कांग्रेस के पारंपरिक मतदाता रहे हैं, लेकिन साल 2013 के चुनावों में ये भी भाजपा की तरफ चले गए थे। कांग्रेस केवल मुस्लिम मतदाताओं के बीच आगे है। यहाँ पर भी दूसरे राज्यों के मुकाबले भाजपा को मुस्लिमों का ज्यादा समर्थन हासिल है।

स्रोत: सीएसडीएस रिपोर्ट

ब्राह्मणों की मतदान वरीयता

स्रोत: सीएसडीएस रिपोर्ट, www.politicalbaba.com

अन्य पिछड़े वर्गों की मतदान वरीयता

स्रोत: सीएसडीएस रिपोर्ट, www.politicalbaba.com

7. जीत का अंतर

2013 में भाजपा की जीत बहुत सहज थी। 165 में से 122 सीटों पर इसकी जीत का अंतर 10,000 से अधिक वोट का था, जिसे विधानसभा चुनावों के लिए बहुत अधिक माना जाता है। 27 सीटों पर कांटे की टक्कर थी (जीत का अंतर 3000 वोटों से भी कम था)। इन सीटों में भाजपा को 15 और कांग्रेस को 9 सीटें मिलीं। बसपा और दूसरों की जीत का औसत अंतर राज्य औसत से कम था, जिससे स्पष्ट होता है कि उन्हें मुख्यतः कठिन संघर्षों का सामना करना पड़ा।

स्रोत-सीएसडीएस रिपोर्ट, www.politicalbaba.com

8. क्षेत्रीय औसत मतदान

2013 के चुनावों के दौरान मध्य प्रदेश में 72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव आयोग द्वारा संचालित जागरूकता स्तर और अभियानों के चलते सभी क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज की गई। महाकोशाल में भाजपा का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा जहाँ 77 प्रतिशत का सर्वाधिक मतदान दर्ज किया गया था।

स्रोत-सीएसडीएस रिपोर्ट

9. क्षेत्रानुसार वोट शेयर

भाजपा मध्य भारत में सबसे अधिक प्रभावी और विंध्य क्षेत्र में सबसे कमजोर है। मालवा निमाड़ में कांग्रेस का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ था। इसने ग्वालियर चंबल, महाकोशाल और विंध्य में भाजपा को कड़ी टक्कर दी। अगर बसपा और कांग्रेस ने गठबंधन किया होता और एक साथ चुनाव लड़ा होता तो वे तीन क्षेत्रों में जीत सकते थे।

स्रोत- www.politicalbaba.com

10. जनसांख्यिकीय मतदान वरीयता

भाजपा ने 2013 में सभी सामाजिक-आर्थिक वर्गों में, विशेष रूप से मध्यम वर्ग (46 प्रतिशत) और निम्न वर्ग (45 प्रतिशत) में, अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि, उच्च वर्ग के मतदाताओं (15 प्रतिशत) के बीच इसका प्रदर्शन सबसे अच्छा था। पुरुषों (44 प्रतिशत) की अपेक्षा महिला (46 प्रतिशत) मतदाताओं के बीच भाजपा अधिक लोकप्रिय थी। ऐसा कांग्रेस के साथ भी है। हालाँकि भाजपा को महिला मतदाताओं का ज्यादा समर्थन प्राप्त हुआ।

स्रोत-सीएसडीएस रिपोर्ट, www.politicalbaba.com

11. चौहान बनाम मोदी फैक्टर

तथाकथित ‘मोदी लहर’ ने विभिन्न राज्यों में भाजपा के लिए वोट जुटाने के लिए अनुकूल तरीके से काम किया था। हालाँकि मध्य प्रदेश में ‘मामा’ फैक्टर मोदी की तुलना में अधिक प्रभावी है। 2013 के विधानसभा चुनावों में, मोदी फैक्टर राज्य में केवल 15 प्रतिशत वोट हासिल कर सका, जो राष्ट्रीय स्तर पर 27 प्रतिशत था।

स्रोत-सीएसडीएस रिपोर्ट, www.politicalbaba.com

12. 2013 के मुद्दे

2013 में मध्य प्रदेश में मूल्य वृद्धि और रोजगार’’ जैसे बड़े मुद्दे क्रमश: 20 प्रतिशत और 11 प्रतिशत के स्कोर पर थे। 2018 की इंडिया टुडे पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरदाताओं द्वारा 47 प्रतिशत बेरोजगारी और 45 प्रतिशत कृषि संकट को 2018 के चुनावों के प्रमुख मुद्दे बताया गया है। स्वच्छ भारत रैंकिंग के अनुसार, इंदौर और भोपाल भारत के दो ऐसे शहर हैं जो स्वच्छता में सबसे आगे हैं, हालाँकि 40 प्रतिशत के साथ स्वच्छता एक बड़ा मुद्दा है।

स्रोत: सीएसडीएस रिपोर्ट और इंडिया टुडे पीएसई रिपोर्ट

13. क्षेत्रवार सीटें

भाजपा ने 2013 में मालवा क्षेत्र से 65 सीटों में से 55 सीटों पर जीत हासिल करते हुए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इसका दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन मध्य भारत में था जहाँ इसने 39 सीटों में से 32 सीटें जीतीं। कांग्रेस का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन महाकोशल और विंध्य में (दोनों स्थानों पर 12-12 सीटें) दर्ज किया गया था।

स्रोत- http://www.indiavotes.com, www.politicalbaba.com

14. क्षेत्रों का विवरण

मध्य प्रदेश को छह क्षेत्रों में बांटा गया है जिसके अंतर्गत विभिन्न जनपद निम्नानुसार हैं:

स्रोत- www.politicalbaba.com

15. चुनावी परिणामों का पूर्वानुमान

यह अनुमान लगाने के लिए कि 2018 में सत्ता की बागडोर किसके हाथ में होगी, विभिन्न एजेंसियाँ राजनीतिक सर्वेक्षण कर रही हैं। अगर इन सर्वेक्षणों की मानें तो भाजपा 117 सीटों पर जीत हासिल करेगी जबकि कांग्रेस को 103 सीटें मिलेंगी। भाजपा द्वारा राज्य में चौथी बार जीत हासिल किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

स्रोत- विभिन्न एजेंसियों का ओपिनियन पोल

चुनावी रणभेरी बज चुकी है, जीतना वही चाहिए, जो बेहतर हो………

पंखुड़ी तिवारी के इनपुट के साथ

अमिताभ तिवारी एक पूर्व कॉर्पोरेट और निवेश बैंकर हैं जो अब राजनीति और चुनावों में विशेष रुचि ले रहे हैं। उपरोक्त विचार इनके व्यक्तिगत हैं। इनका ट्विटर हैंडल @politicalbaaba है।