राजनीति
भक्तों की हत्याओं के आरोपों के बीच सरकार ने गाजियाबाद के ‘छोटा हरिद्वार’ का प्रभार अपने हाथों में लिया
मधुर शर्मा - 27th September 2018
भक्तों की हत्याओं के आरोपों के बीच सरकार ने गाजियाबाद के ‘छोटा हरिद्वार’ का प्रभार अपने हाथों में लिया

प्रसंग
  • गाजियाबाद के छोटा हरिद्वार में तीर्थयात्रियों की हत्या पर विवाद तूल पकड़ रहा है जिसके चलते सरकार को इसका प्रशासन अपने हाथ में लेना पड़ा।
  • जिला प्रशासन कई सवालों के जवाब नहीं देने से बगलें झाँक रहा है और पुलिस की जाँच में चूक का दावा किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में स्थित एक लोकप्रिय तीर्थस्थल इस समय पूरी तरह से विवादों के घेरे में है और दावा किया जा रहा है कि बचाव गोताखोर ही भक्तों को इस पवित्र जल में डुबो रहे हैं। छोटा हरिद्वार के नाम से लोकप्रिय इस स्थान से करीब 10 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।

क्या है छोटा हरिद्वार?

कुछ साल पहले, गाजियाबाद के मुराद नगर की ऊपरी गंगा नहर कि किनारे स्नान घाटों के निर्माण, मंदिरों के नवीनीकरण और दुकानें बनाने का काम शुरू किया गया था और नाव की सवारी का भी इंतजाम किया गया था। इस पूरे क्षेत्र को ‘छोटा हरिद्वार’ नाम दिया गया था।

जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि ‘छोटा हरिद्वार’ को उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित हर की पौड़ी के रूप में तैयार किया गया है। मेरठ से एक घंटे की ड्राइव की दूरी पर, राष्ट्रीय राजमार्ग 58 के बगल में स्थित छोटा हरिद्वार को पर्यटकों और तीर्थयात्रियों दोनों को आकर्षित करने के इरादे से बनाया गया था। हालांकि, आज यह स्थान अपवित्रता, चोरी, लूट-पाट और हत्या के लिए जाना जाता है।

विधायक के पत्र से शुरू हुआ विवाद

भक्तों की हत्याओं के आरोपों के बीच सरकार ने गाजियाबाद के ‘छोटा हरिद्वार’ का प्रभार अपने हाथों में लियापहली बार विवाद तब शुरू हुआ जब गाजियाबाद के लोनी जिले से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने जिला मजिस्ट्रेट को एक पत्र लिखा। उनके पत्र में आरोप लगाया गया था कि छोटा हरिद्वार में गोताखोर लोगों को डुबो कर उनकी हत्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि वे पीड़ितों के पहने हुए केवल आभूषणों की चोरी ही नहीं करते हैं बल्कि वे पानी में डूबे हुए शवों को खोजने, बाहर निकालने और उसे परिजनों को वापस सौंपने के लिए भी 20,000 से 25,000 रुपये की मांग करते हैं। उन्होंने बताया कि नहर में रोजाना दो से तीन शवों को निकाला जाता है और पीड़ितों के परिजन, इसमें मंदिर के पुजारी की भागीदारी होने का संदेह कर रहे हैं। गुर्जर ने इस मामले में शामिल “गिरोह” की जाँच की मांग की है।

पत्र में लगाए गए गंभीर आरोपों के कारण यह मामला सनसनीखेज हो गया है। पत्र पर कार्यवाई करते हुए, जिला मजिस्ट्रेट रितु माहेश्वरी ने इस मामले की जांच की जिम्मेदारी मोदीनगर के उपप्रभागीय मजिस्ट्रेट पवन अग्रवाल को सौंप दी है। इसी तरह से, गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण ने पुलिस अधीक्षक (देहात) ए के मौर्या को इस मामले की जांच की जिम्मेदारी दी है।

वीडियो से गंभीर आरोपों को मिला समर्थन

कुछ दिनों पहले एक वीडियो सामने आया था जिसमें एक महिला और उसके कथित बचाने वाले के बीच छीनाझपटी दिखाई गई थी। इस वीडियो में महिला को गोताखोर को हार छीनने का आरोपी ठहराते हुए देखा जा सकता है। यहाँ तक कि स्थानीय भीड़ के इकट्ठा होने और स्थिति को गंभीर होते देख गोताखोर को हार वापस करते हुए देखा जा सकता है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि कोई उसका पैर पकड़ कर खींच रहा था जिसकी वजह से वह डूबने लगी थी।

विधायक गुर्जर ने वीडियो पर टिप्पणी करते हुए मीडिया को बताया कि ऐसी घटनाएं रोज होती रहती थीं और वीडियो में जो एक घटना है वह इनसे अलग नहीं है। उन्होंने आगे बताया कि उन्होनें पानी में डूब चुके लोगों के नौ परिवारों के साथ गाज़ियाबाद के डीएम से मुलाक़ात की। उन्होंने आरोप लगाया कि गोताखोर पहले इन लोगों को पानी में खींचते हैं और फिर उन्हें पानी के नीचे रस्सियों की मदद से पत्थरों से बांध देते हैं, जिससे शव ऊपर पानी की सतह पर नहीं आ पाता।

मुसलमानों को दोषी ठहराते हैं मंदिर के पुजारी

विधायक का आरोप था कि मंदिर के पुजारी भी इसमें शामिल हो सकते हैं, इसकी प्रतिक्रिया में छोटा हरिद्वार के शनि-शिव मंदिर के महंत मुकेश गोस्वामी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।  इसके बजाय उन्होंने इन अपराधों के लिए मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि एक साल पहले जो गोताखोर थे, उनमें ज्यादातर मुस्लिम थे, जिन्हें चोरी में शामिल होने के कारण नौकरी से निकाल दिया गया था। उन्होंने कहा कि तब से मंदिर के ही कर्मचारी गोताखोर के रूप में सेवा कर रहे हैं। महंत ने आस-पास के इलाकों में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के सदस्यों पर भी मंदिरों  के आस-पास घूमने और पर्यटकों तथा तीर्थयात्रियों का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को कई बार इस बारे में सूचित करने और पुलिस की स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) की रिपोर्ट के बावजूद भी इस तरह के उत्पीड़न पर कोई कदम नहीं उठाया गया।

भक्तों की हत्याओं के आरोपों के बीच सरकार ने गाजियाबाद के ‘छोटा हरिद्वार’ का प्रभार अपने हाथों में लिया

छोटा हरिद्वार का एक दृश्य

‘नवभारत टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में वहां के निवासियों का हवाला देते हुए बताया गया है कि जिन गोताखोरों को नौकरी से निकाल दिया गया था वे मुस्लिम समुदाय के थे और वे बदला लेने और क्षेत्र में अशांति फैलाने के लिए नए अपराधों में शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, विधायक गुर्जर इस बात पर कायम रहे कि उन्होंने इस मामले में किसी भी समुदाय का नाम नहीं उछाला है।

जांच रिपोर्ट ने पुलिस को कटघरे में खड़ा किया

मोदीनगर एसडीएम द्वारा इस महीने की शुरुआत में एक रिपोर्ट जारी की गई थी। इससे पहले, गाजियाबाद के एसएसपी ने विधायक के आरोपों से इंकार कर दिया था और कहा था कि विधायक गुर्जर द्वारा किए गए दावों जैसी कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई थी। कुछ स्थानीय लोगों ने भी विधायक के दावों का खंडन करते हुए कहा था कि यह सब महंत गोस्वामी को मंदिर से हटाने और मंदिर पर स्वामित्व पाने की साजिश थी।

हालांकि, प्रशासन की जांच रिपोर्ट ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि उसने अपराधों को रिकॉर्ड करने में चूक की है। रिपोर्ट में डूबने के दो मामलों का उल्लेख किया गया है, जबकि पुलिस ने किसी भी मामले का उल्लेख नहीं किया। उसके बाद एसएसपी ने कहा है कि इन मामलों में जांच के आदेश दिये जाएंगे।

रिपोर्ट में पर्यटकों की सुरक्षा और उस स्थान पर सुविधाओं की कमी पर चिंता व्यक्त की गई है। यह भी पाया गया कि यह स्थान वास्तव में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से संबंधित है। रिपोर्ट की सिफारिशों पर काम करते हुए, डीएम माहेश्वरी ने मोदीनगर के एसडीएम को छोटा हरिद्वार का प्रभार लेने का आदेश दिया है, जो वर्तमान में मंदिरों द्वारा संचालित है। क्षेत्र पर नज़र रखने के लिए छह अधिकारियों की एक समिति बनाई गई है और मोदीनगर के एसडीएम को इसका प्रबंधक बनाया गया है। डीएम ने इस स्थान से ‘छोटा हरिद्वार’ अंकित बोर्डों को भी हटाए जाने का आदेश दिया है।

विशेष रूप से, विधायक गुर्जर ने भी छोटा हरिद्वार चलाने वालों पर लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। उन्होने आरोप लगाया कि ये लोग मुराद नगर की गंग नहर को गंगा नदी के रूप में प्रचारित कर रहे हैं और क्षेत्रीय लोग ही नहीं बल्की दूर दराज, जैसे हरियाणा, के लोग यहां इसे एक नहर ना मानकर असली गंगा मानते हुए गंगा दशहरा के दिन अपने मृतकों की अस्थियों को विसर्जित करने के लिए आते हैं।

प्रश्न खत्म नहीं हुए हैं

हालांकि प्रशासन ने मोदीनगर के एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की है, लेकिन फिर भी बहुत सी चीज़ें  स्पष्ट नहीं हैं। पहली, एसपी (देहात) की अगुवाई में पुलिस द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। साथ ही, प्रशासन की रिपोर्ट और विधायक तथा पीड़ित के परिवारों द्वारा किए गए के दावें मेल नहीं खाते हैं। रिपोर्ट में दो मामलों का हवाला दिया गया है (पुलिस ने कोई भी दर्ज नहीं किया था), जबकि विधायक ने हमेशा यही कहा कि यहां कम से कम नौ परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है।

साथ ही, प्रशासन अब क्षेत्र अपने अधिकार में लेने जा रहा है, फिर भी वहां पर प्रशासन की खुद की भूमिका पर चुप्पी सधी हुई है। ऐसा नहीं है कि छोटा हरिद्वार पिछले कुछ ही महिनों के दौरान उभरकर सामने आया हो। इसे बनाने में और प्रचारित करने में सालों का समय लग गया। जब इसके निर्माण और प्रचारित करने की पहली खबर 2013 में आई थी, तब मेरठ के तत्कालीन आयुक्त मनजीत सिंह ने इसके निर्माण के बारे में जानकारी होने से इंकार कर दिया और उन्होंने कहा कि इसके बारे में जानकारी गाजियाबाद के डीएम से मांगी जाएगी।

महंत मुकेश गोस्वामी ने तब कहा था कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और मंदिर इस जगह को हरिद्वार की हर की पौड़ी जैसा विकसित करेंगे। महंत ने यह भी कहा कि वह आशा करते हैं कि लोग कांवर के लिए हरिद्वार से जल न लेकर केवल वहीं से जल लें, और जिससे छोटा हरिद्वार कांवरियों को भी आकर्षित करे। उसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया था वहां हो रहे इस निर्माण के कारण जमीन की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। छोटा हरिद्वार के पास की 1600 वर्ग गज भूमि के टुकड़ा, जिसकी कीमत पहले 18 लाख थी उसकी कीमत अब 1 करोड़ रुपये हो गई थी।

तो ऐसा नहीं है कि प्रशासन छोटा हरिद्वार में हो रहे गलत कामों से अनजान था। इस मामले के बारे में 2013 की शुरुआत में ही जानकारी दी गई थी, और इसका तब से ही एकमात्र उद्देश्य इस नहर को गंगा नदी के रूप में पेश करके तीर्थयात्रियों को ठगना था, और इस मामले में तब तक कुछ भी नहीं किया गया जब तक विधायक गुर्जर ने डूबने और हत्याओं के मामलों को नहीं उठाया।

मधुर शर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास से स्नातक के छात्र हैं। वह @madhur_mrt पर ट्वीट करते हैं।