राजनीति
सबरीमाला की समीक्षा याचिका पर सुनवाई मुक्त न्यायालय में नहीं, बल्कि बंद कक्ष में

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायाधीश आर एफ नरीमन, ए एम खानविलकर, डी वाई चंद्रचूद और इंदू मल्होत्रा की बेंच आज (13 नवंबर को) सबरीमाला की समीक्षा याचिका की सुनवाई करेगी, लाइव लॉ  ने रिपोर्ट किया।

सर्वोच्च न्यायालय के 28 सितंबर के निर्णय, जिससे सभी आयुवर्गों की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिल गई, पर समीक्षा के लिए 48 याचिकाएँ दायर की गई थीं। इन याचिकाओं की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश के कक्ष में होगी, न कि मुक्त कोर्ट में।

याचिकाकर्ता यह मुद्दा उठाएँगे कि कोई भी महिला जो अयप्पा की भक्त है, वह सबरीमाला में प्रवेश नहीं करना चाहेगी और न्यायालय ने उस याचिका पर निर्णय सुनाया है जिसे दायर करने वाले मंदिर की परंपराओं और आचार से अनभिज्ञ हैं।

समीक्षा याचिकाकर्ता पीपल फॉर धर्मा का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील साईं दीपक के तर्कों को भी दोहराएँगे कि देवता के पास अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है जैसे कि नैश्तिक ब्रह्मचर्य जो अनुच्छेद 25 (1) के अंतर्गत संरक्षित होना चाहिए और अनुच्छेद 21 के अनुसार देवता को उनके निजित्व का भी अधिकार है।

समीक्षा याचिका में बेंच से सहमत न होने वाली न्यायाधीश इंदू मल्होत्रा की बात को भी उद्धृत किया गया है जिन्होंने कहा था कि धार्मिक भावनाओं के साथ न्यायालय को छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए जब तक कि सच में याचिकाकर्ता किसी प्रथा के कारण पीड़ित न हो। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया था कि अनुच्छेद 25 के अनुसार ब्रह्मचारी अयप्पा और उनसे जुड़ी परंपराएँ संरक्षित होनी चाहिए।

समीक्षा याचिका पर पुरानी बेंच द्वारा ही सुनवाई होने के नियम के कारण वही न्यायाधीश याचिका पर चर्चा करेंगे जिनकी बेंच ने महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी, केवल दीपक मिश्रा के स्थान पर मुख्य न्यायाधीश गोगोई सुनवाई करेंगे क्योंकि मुख्य न्यायाधीश मिश्रा सेवानिवृत्त हो चुके हैं।