राजनीति
अखिलेश यादव ने की बसपा नेता सुखदेव राजभर से भेंट, बसपा के लिए उभरीं परेशानियाँ

समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पाँच बार के विधायक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेता सुखदेव राजभर से लखनऊ में उनके आवास पर भेंट की।

अपनी राजनीतिक उपस्थिति और जीवन में आए बड़े परिवर्तन की वजह से राजभर ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी। वह उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले की दीदारगंज सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

अब राजभर ने इस विकास पर एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उनका बेटा कमलकांत (पप्पू के नाम से जाना जाता है) अखिलेश यादव के नेतृत्व का पालन करेगा। अखिलेश यादव और उनके पिता के मध्य हुई बैठक में कमलकांत भी कथित तौर पर उपस्थित थे।

कमलकांत ने कहा, “मेरे पिता कोविड-19 के बाद की जटिलताओं से पीड़ित हैं। सपा प्रमुख का दौरा भी कोई राजनीतिक नहीं था।” वे सिर्फ पिता सुखदेव राजभर के स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए आए थे।

उत्तर प्रदेश में 2022 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। सपा, बसपा और भाजपा राजभर समुदाय के समर्थन को जीतने और बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं।

अखिलेश यादव के दौरे से पूर्वांचल में राजनीतिक हलचल तेज़ हो सकती है। मीडिया के एक वर्ग का कहना है कि यादव के इस कदम से संकेत मिलता है कि सपा और बसपा के बीच गठबंधन की संभावना कम होती जा रही है। पूर्व में बसपा को राजभर समुदाय के एक वर्ग के समर्थन का लाभ मिला है, विशेषकर मंडल स्तर पर।

2016 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने इस समुदाय के लिए विशेष कदम उठाए। बसपा ने भी समुदाय को भाजपा की ओर झुकते हुए देखा। उत्तर प्रदेश में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से पूर्व मोदी ने समुदाय में ज़ोरदार तरीके से अपनी पहुँच बनानी शुरू की। इस ओर कदम बढ़ाते हुए बहराइच में महाराजा सुहेलदेव की एक प्रतिमा की आधारशिला रखना भी एक अहम रणनीति थी।

नरेंद्र मोदी के इस प्रयास को महाराजा सुहेलदेव के लिए राजभर समुदाय की भावनाओं को जीतने के एक सशक्त प्रयास के रूप में देखा गया। मोदी के महाराजा सुहेलदेव की विरासत को हिंदू धर्म के रक्षक के रूप में रखने के साथ ही भाजपा को राजभर समुदाय के करीब जाने और पूर्वांचल में चुनावी लाभ प्राप्त करने में सहायता मिली।

अखिलेश यादव के सुखदेव राजभर के आवास के दौरे के साथ बसपा ने एक और प्रतिद्वंद्वी का एक और प्रतिस्पर्धी कदम उठते हुए देखा है। वह इस धारणा के बावजूद राजभर समुदाय का समर्थन बरकरार रखना चाहेगी कि उसने समुदाय के कुछ वरिष्ठ नेताओं को निराश किया है।