राजनीति
एम नागेश्वर राव: एक ऐसे व्यक्ति जिनकी सीबीआई को तत्काल है आवश्यकता

प्रसंग
  • सरकार में या कानून-व्यवस्था तंत्र के हिस्से के रूप में पिछली भूमिकाओं में एम नागेश्वर राव के प्रदर्शनों से संकेत मिलता है कि सीबीआई में शीर्ष पद पर उनकी उपस्थिति जाँच एजेंसी और देश के लिए अच्छी हो सकती है।

जुलाई 2013 में, एम नागेश्वर राव को ओडिशा के अग्निशमन सेवा और होमगार्ड विभाग का अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) नियुक्त किया गया था। दो महीने के ही अंतराल पर इस तटीय राज्य को फैलिन (चक्रवात) का सामना करना पड़ा। यह, ओडिशा में 1999 में आए तूफान के बाद, एक ऐसा प्रचंड तूफान था जिसने उड़ीसा में भूस्खलन को बढ़ावा दिया और राज्य को तहस-नहस कर दिया जिससे भारी मात्रा में विनाश हुआ और 10,000 से अधिक लोग काल के गाल में समा गए।

लेकिन इतिहास ने 2013 में स्वयं को नहीं दोहराया। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पास सरकारी अधिकारियों के लिए एक सरल और स्पष्ट निर्देश था: शून्य दुर्घटना। हालाँकि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका, नुकसान को सीमित करने में राज्य प्रशासन की सफलता पर देश-विदेश ने प्रशंसा की। करीब 44 दुर्घटनाएँ हुई थीं।

चक्रवात के बाद प्रारंभिक खोज में लगभग दस लाख से अधिक लोगों की जान बचाई गई। कई वर्षों की योजनाओं, आपदा जोखिम शमन बुनियादी ढाँचे के निर्माण, निकासी प्रोटोकॉल की स्थापना, घरेलू समुदायों के लिए संभावित सुरक्षित इमारतों की पहचान और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि समुदायों और समुदाय आधारित स्थानीय संगठनों के साथ काम करने से यह संभव बना दिया गया था, जैसा कि विश्व बैंक ने इसे एक ज्ञापन में वर्णित किया था।

चक्रवात के दिनों में जमीन पर किया गया कार्य आपदा को रोकने के लिए महत्वपूर्ण था। इस उपलब्धि के लिए, एम नागेश्वर राव जैसे सक्षम अधिकारियों के साथ ही साथ जिला कलेक्टरों, पुलिस अधिकारियों, तटीय क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय के नेताओं और सैकड़ों पुरुष और महिलाएँ जिन्होंने उनके साथ काम किया और उनके सान्निध्य में काम किया आदि लोगों को इसका श्रेय जाता है। राव के सान्निध्य में ओडिशा की अग्निशमन सेवा और होमगार्ड इकाई ने आपदा प्रबंधन में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। राव ने 1,000 से अधिक कर्मचारियों को संगठित किया जिन्होंने चक्रवात के बाद हजारों लोगों को निकालने और पेड़ और अन्य मलबा हटाकर सड़क साफ करने के लिए दिन-रात काम किया जिससे सड़क संचालन सुनिश्चित हो सके, जो राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है।

उस समय उनके सराहनीय काम के लिए, पटनायक ने राव और उनके सहायकों को शासन और लोक सेवा वितरण में उत्कृष्टता और नवीन पद्धति के लिए ‘फर्स्ट एवर चीफ मिनिस्टर्स अवार्ड’ से सम्मानित किया। इस पुरस्कार के साथ 5 लाख रुपये का अनुदान दिया गया, जो अग्निशमन कल्याण कोष के नाम कर दिया गया।

ठीक एक साल बाद, राज्य को एक और चक्रवात ‘हुदहुद’ का सामना करना पड़ा, जिसके लिए अग्निशमन सेवा और होमगार्ड कर्मियों को भी संकट का सामना करने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित किया गया था। लेकिन कुदरत ने हार मान ली और ओडिसा को ज्यादा नुकसान नहीं पहुँचाया। हालांकि इसने आंध्र प्रदेश पर कहर ढा दिया। मुख्यमंत्री पटनायक ने राव और उनके 450 से अधिक सहायकों को पड़ोसी राज्य के दुर्घटनाग्रस्त जिलों में जाने का आदेश दिया। इन दलों को वहाँ रहने के दौरान सभी आवश्यक सभी चीजें- भोजन पानी से लेकर इलेक्ट्रॉनिक आरी और सभी प्रकार के औजार- उपलब्ध कराई गए थे।

उस समय, उनके लिए राव के स्पष्ट निर्देश थे: लोगों को जो भी सहायता चाहिए, उन्हें प्रदान करें, लेकिन उन्हें पानी के लिए भी न पूछें। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए अग्निशमन सेवा और होमगार्ड कर्मियों की सराहना की और धन्यवाद दिया। घर वापस पहुँचने पर पटनायक ने उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया।

इस साल की शुरुआत में, ओडिशा इकाई बचाव और राहत अभियान में सहायता के लिए बाढ़-ग्रस्त केरल पहुँची- इसने 5,000 से ज्यादा लोगों की जान बचाई। एक बार फिर राज्य का नाम रोशन करने के कारण, पटनायक ने अग्निशमन कल्याण कोष के लिए 25 लाख रुपये का वार्षिक पुरस्कार घोषित किया।

2013 से 2015 तक राव की अध्यक्षता में अग्निशमन सेवा, होमगार्ड सेवा और नागरिक सुरक्षा सेवा के चलते यह विभाग एक कमजोर हो रहे सरकारी विभाग से ऐसे विभाग में बदल गया है जिस पर राज्य गर्व महसूस कर सकता है। राव ने प्रशिक्षण और संचालन के तरीकों के साथ-साथ कर्मचारियों को अच्छे उपकरण उपलब्ध कराने में सुधार किया। राव ने स्वराज्य को बताया, “एक बार मुख्यमंत्री पटनायक ने फैनिन के दौरान हमारे काम का अवलोकन किया, तो उन्होंने हमें पूरा समर्थन दिया। हमने डेढ़ सालों में तीन प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की, जो किसी और प्रकार से संभव नहीं थे।”

उन्होंने बताया, “कुछ लोग कह सकते हैं कि यह तैनाती अच्छी है या बुरी है। लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता है। यह सेवा आपको लोगों के जीवन में विभिन्नता लाने का एक शानदार अवसर प्रदान करती है।”

अग्निशमन सेवा अन्य राज्यों के अनुकरण के लिए एक मिसाल बन गई है। अब, यह हमेशा तैयार है और ज़रूरत के समय में अन्य भारतीय राज्यों की मदद करने के लिए भी तैयार है जैसा कि आंध्र प्रदेश और केरल में देखा जा चुका है। इतना ही नहीं, यहाँ तक कि अन्य देश भी आपदा के लिए तुरंत तैयार इस इकाई से सबक लेना चाहते हैं। पिछले साल, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चक्रवात द्वारा नियमित रूप से पीड़ित 14 प्रशांत द्वीप राष्ट्रों के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण का अनुरोध करते हुए इससे संपर्क किया था।

अग्निशमन सेवा या सरकार की ऐसी कम-महत्वपूर्ण सेवाओं में स्थानान्तरण को अधिकारी “दण्डस्वरूप सेवाकार्य” मानते हैं। लेकिन राव के लिए, हर नौकरी देश की सेवा करने का अवसर है।

राव ने स्वराज्य को बताया, “यह इस देश के लिए लानत की बात है। हम छोटे काम करने से कतराते हैं जिन्हें हम कर सकते हैं और यह काम लोगों के जीवन पर एक बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। लेकिन हम सभी बड़े काम करना चाहते हैं, जिन्हें करने में हम सक्षम नहीं हैं। इसलिए, जो हम नहीं कर सकते हैं और जो हम करना नहीं चाहते हैं आदि चीजों के बीच पड़कर हम कुछ भी नहीं कर रहे हैं। मैं छोटी चीजें करने में विश्वास करता हूँ। कोई नौकरी सजा नहीं है। हर जगह सुधार करने का अवसर है।”

इस रवैये से शायद पता चलता है कि राव संस्था निर्माण में सफल क्यों हुए, जैसा कि अग्निशमन सेवा के शीर्ष पर उनके काम से पता चलता है, जब उनकी तरह अन्य लोग लंबी अवधि के लिए प्रभारी रहने के बावजूद भी कोई छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में उनके कार्यकाल के दौरान राव की सेवा ने उन्हें पुरस्कार दिलाया है। 2005 के दौरान मणिपुर में जब वह संचालन के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) थे, तो नागालिम की राष्ट्रीय समाजवादी परिषद (एनएससीएन-आईएम) ने 50 दिनों से अधिक समय के लिए राज्य के प्रमुख मार्ग, इम्फाल-दीमापुर राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया था। मणिपुर में अन्य प्रमुख मार्ग, बराक घाटी से होते हुए इम्फाल-सिलचर मार्ग, नागालैंड खापलांग (एनएससीएन-के) की राष्ट्रीय समाजवादी परिषद के नियंत्रण में था। राव के नेतृत्व में सीआरपीएफ की चार बटालियनों ने यह रास्ता साफ किया, जहाँ वे दो महीने से अधिक समय तक शिविर में रहे। इस वैकल्पिक मार्ग ने संचार की सुविधा प्रदान की और आवश्यक वस्तुओं का परिवहन आसान बना दिया, इस प्रकार इम्फाल-दीमापुर राजमार्ग पर नाकाबंदी का प्रभाव क्षीण कर दिया गया।

जून 2009 में, पूर्वी क्षेत्र में इंस्पेक्टर जनरल (आईजी), सीआरपीएफ, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और सिक्किम पर अधिकार क्षेत्र के साथ, राव ने व्यक्तिगत रूप से मिदनापुर जिले के लालगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अभियानों का संचालन किया। उन्होंने खतरे वाली जगह का अपने साथियों के साथ भ्रमण किया, जो कि राव जैसे वरिष्ठ अधिकारी के लिए बहुत असामान्य था। शीर्ष माओवादी कमांडर मल्लोजुला कोटेश्वर राव, जिसे किशनजी के नाम से भी जाना जाता है, को इस अभियान के दौरान गोली मार दी गई थी। हालाँकि उसकी जान बच गई थी लेकिन बाद में पता चला कि उसे अवसाद हो गया था। 2011 में उसे एक अन्य मुठभेड़ में मारा गया था। लालगढ़ अभियान की शुरुआत के तीन- चार महीनों में ही, सीआरपीएफ और पश्चिम बंगाल पुलिस बंगाल के उस हिस्से में नागरिक प्रशासन और शांति स्थापित करने में सक्षम रहे। सीआरपीएफ का खुलकर नेतृत्व करते हुए राव ने पश्चिम बंगाल पुलिस के अधिकारियों में नक्सलियों से लोहा लेने का जज्बा जगाया जो पहले नहीं था।

अपने सीआरपीएफ कार्यकाल के दौरान, राव ने सेनाबल की कोबरा बटालियन की स्थापना में और संबलपुर में सीआरपीएफ के दूसरे समूह केंद्र की मंजूरी मिलने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लालगढ़ से पहले कंधमाल था। 2008 में ओडिशा के इस जिले में दंगे हुए थे जब हिंदू संत स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को गोली मार दी गई थी और ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्म-परिवर्तन का विरोध करने के कारण उनका शरीर विकृत हो गया था। हिंसा बढ़ने पर सीआरपीएफ की 50 से अधिक टोलियों को तैनात किया गया था। राव पूर्वी क्षेत्र में सीआरपीएफ के आईजी थे, और यह इलाका उनके अधिकार क्षेत्र में था। जब हालात राज्य पुलिस के नियंत्रण से बाहर हो गए, तो सीआरपीएफ ने शांति स्थापित की।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के ओडिशा राज्य सचिव अली किशोर पटनायक ने आरोप लगाया है कि कंधमाल में राव ने शाम छः बजे से लेकर सुबह छः बजे तक सीआरपीएफ टुकड़ियों के अभियान को प्रतिबंधित करने का आदेश पारित किया, जिससे “संघ परिवार के हिंसक दुश्मनों को रात के दौरान ईसाइयों के खिलाफ आग लगाने और दंगों को जारी रखने का बढ़ावा मिला।”

राव ने पटनायक द्वारा किए गए आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “यह बहुत ही बेहूदगी की बात है। इस तरह के संकट के दौरान हमारे पास हर समय बहुत सारे निर्देश होते हैं। कुल मिलाकर बात यह है कि सीआरपीएफ ने दंगों पर रोक लगाई है। आगजनी वाले इलाकों में सीआरपीएफ तैनात किए जाने के बाद ही कुछ दंगाई मारे गए और हिंसा कम हो गई। वे जो चाहें लिख सकते हैं, लेकिन सीआरपीएफ ने मेरे नेतृत्व में शांति स्थापित की।”

यह भी दिलचस्प है कि अब पटनायक राव जैसे प्रतिष्ठित अधिकारी पर कंधमाल जैसा लांछन लगा रहे हैं, उनकी पार्टी सीपीआई (एम) थी जिसने 2009 में ओडिशा के राज्यपाल के सामने कंधमाल में सीआरपीएफ की तैनाती जारी रहने की माँग करते हुए एक ज्ञापन प्रस्तुत किया।

उनकी सेवा के लिए, राव को दो बार राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है: पहला मेधावी सेवा के लिए और दूसरा विशिष्ट सेवा के लिए। इसके अलावा, उन्हें ओडिशा गवर्नर पदक और विशेष ड्यूटी पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।

ऐसा नहीं है कि राव ने केवल पुलिस सेवाओं के सर्वोच्च पदों पर प्रतिभा अर्जित की है। 1989-90 में तालचर के उप मंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के रूप में उन्होंने पहला पद ग्रहण किया था। कोयला तस्करी माफिया और आपराधिक गतिविधियों के तेजी से बढ़ते केंद्र के रूप में कुख्यात, तालचर उन दिनों दूसरा धनबाद माना जाता था। एसडीपीओ के रूप में, अपने वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों की मदद से राव ने माफिया पर कड़ी कार्यवाही की और तस्करी को प्रबंधनीय स्तर पर लाकर छोड़ा। इस अभियान से सबसे बड़ा नुकसान आंध्र प्रदेश के ईंट भट्ठी निर्माताओं को हुआ था, क्योंकि तालचर से तस्करी किए गए कोयले को नेल्लोर और आंध्र के अन्य क्षेत्रों में ले जाया गया था और ज्यादातर ईंटों को पकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

ईंट भट्ठी मालिकों का एक प्रतिनिधिमंडल राव से मिलने के लिए तालचर के पास आया और माफिया से सावधान रहने के लिए उनसे अनुरोध किया क्योंकि वहाँ तेलुगु लोग आर्थिक रूप से पीड़ित थे। उनकी लागत बढ़ गई थी और मुनाफा कम हो गया था क्योंकि उन्हें बाजार दरों पर कोयला खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि तस्करी किए गए सस्ते कोयले पर रोक लगा दी गई थी। हालाँकि राव से उनके द्वारा किया गया अनुरोघ असफल रहा और उन्होंने इससे इनकार कर दिया।

हाल ही में, एक ऑनलाइन ब्लॉगर, जो संदिग्ध दावे करने और लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए खबरों में था, ने आरोप लगाया था कि चेन्नई में अपनी पोस्टिंग के दौरान सीबीआई के संयुक्त निदेशक राव ने कथित भ्रष्ट व्यापार सौदे की जाँच नहीं की थी क्योंकि आरोपी तेलुगू लोग ही थे। यह ब्लॉगर कुछ महीनों तक राव पर व्यंग्य भरे पोस्ट करता रहा। हालाँकि ब्लॉगर के हमले का एक कारण यह हो सकता है कि उस पर एक महिला की अश्लील तस्वीर पोस्ट करने के लिए एक सीबीआई मामला दर्ज किया गया था। उसको तमिलनाडु उत्पीड़न रोकथान अधिनियम के तहत आरोपी ठहराया गया, वह मामले की रफ्तार को कम करने में कामयाब रहा है लेकिन राव द्वारा चेन्नई क्षेत्र का प्रभार संभालने के बाद इस मामले को गति मिली थी।

राव के खिलाफ दूसरा आरोप यह था कि उनकी पत्नी के पास संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के फ्लोरिडा में एक संपत्ति थी, इस आरोप को जितनी जल्दी लगाया गया था उतनी जल्दी इसे खारिज भी कर दिया गया। शायद आरोप लगाने वाले लोग तब थोड़ा उत्साहित हो गए थे जब उन्होंने देखा था कि संपत्ति के मालिक का नाम और राव की पत्नी का नाम एक जैसा था, बाद में केवल यह पता चला कि यह दोनों अलग-अलग महिलाएँ थीं।

एक प्रेस विज्ञप्ति में हर आरोप को रद्द करने के बाद राव के खिलाफ वित्तीय अनियमितता के आरोप भी अचानक कम हो गए। कुछ आरोप तो इतने हास्यपद हैं कि वे प्रतिक्रिया देने के लायक भी नहीं हैं, जो बताते हैं कि पत्रकारों को शायद वित्त और बैंकिंग का कुछ प्रशिक्षण लेने की जरूरत है।

जब राव मयूरभंज जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) थे तब उन्होंने लोधाओं को सुधारने के लिए जिला कलेक्टर हवा सिंह चहर के साथ काम किया था, यह आपराधिक अनुसूचित जनजाति थी, राव ने उनको अपराध-जेल-अपराध के कभी न खत्म होने वाले लूप से मुक्त कर दिया था। जगतपुरसिंह के पुलिस अधीक्षक के रूप में वह उड़ीसा में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग करने वाले पहले व्यक्ति थे, जिससे एक किशोर के बलात्कार के मामले का पर्दाफाश करने में मदद मिली थी और आरोपियों को सात साल की सजा सुनाई गई थी। क्राइम ब्रांच के एक पुलिस अधीक्षक होने के नाते उन्होंने 1992 में कटक शराब त्रासदी में शराब के सरगना बेलू दास पर मुकदमा चलाया था, इस त्रासदी में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 600 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था।

राव के ट्रैक रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह अपने लक्ष्यों को हासिल करने वाले व्यक्ति हैं। उन्हें कैसी भी ड्यूटी दी जाए, वह अपना काम पूरी तन्मयता से करते हैं। चाहे वह अपराध, भ्रष्टाचार, नक्सलियों से लड़ाई हो, या एक जर्जर संस्थान में सुधार करना हो, उनके पास निपुणता के साथ उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने की कुशलता है।

एक संस्था निर्माता, राव हर समय के लिए एक आदमी हैं। वह ऐसे नेता हैं जिनकी सीबीआई को जरूरत है।

अरिहंत स्वराज्य के डिजिटल कंटेंट मैनेजर हैं।