राजनीति
बिहार चुनाव की 5 महत्वपूर्ण बातें; मोदी का स्ट्राइक रेट राहुल गांधी के दोगुने से अधिक

बिहार विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली भाजपा ने बेहतरीन प्रदर्शन करके 74 सीटें जीतीं। यह प्रदर्शन साबित करता है कि पार्टी का स्ट्राइक रेट 2014 से 2020 तक लगातार बढ़ता जा रहा है। बिहार में भाजपा, जद-यू, हम और वीआईपी के गठबंधन वाली एनडीए ने 125 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है।

बिहार चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्ट्राइक रेट की राहुल गांधी से तुलना की जाए तो लगभग दोगुने से अधिक रहा। नरेंद्र मोदी ने कुल 12 सभाएँ कीं लेकिन उन्होंने डिजिटल व्यवस्थाएँ करके करीब 93 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया। सभाओं वाले 12 क्षेत्रों में 9 प्रत्याशियों को वह जिताने में सफल रहे। राहुल गांधी ने 8 सभाएँ कीं, जिसमें से तीन ही विजय रह पाए। इस तरह मोदी का स्ट्राइक रेट 75 प्रतिशत और राहुल का 37 प्रतिशत रहा।

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे, जिसमें से 19 ही जीत की लकीर खींच पाए। इस तरह उसकी जीत का स्ट्राइक रेट 27.1 प्रतिशत रहा। उससे अच्छा प्रदर्शन वीआईपी जैसे क्षेत्रीय दलों का रहा। इसके अलावा, महागठबंधन की लेफ्ट पार्टियों ने भी 16 सीटें जीतकर अपना स्ट्राइक रेट कांग्रेस से बेहतर ही रखा।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की बात करें तो उसके परिणामों ने सबकों चौंका दिया। पार्टी ने 20 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें से 14 उम्मीदवार सीमाँचल क्षेत्र की सीटों पर थे। सीमाँचल में मुस्लिमों की आबादी अच्छी है। इन पर अभी तक कांग्रेस और राजद के उम्मीदवार जीतते आए हैं। हालाँकि, ओवैसी के 5 सीटों के जीतने से बाकी दलों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं।

उम्दा प्रदर्शन की बात करें तो इसमें राजद ने बाजी मारी। उसने सबसे अधिक 75 सीटों पर जीत हासिल की। इसके बाद दूसरे पायदान पर भाजपा है। तेजस्वी यादव की अगुआई वाली पार्टी के सहयोगी दलों से उतना योगदान नहीं मिला, वरना पार्टी बड़ा उलटफेर करने में इस बार सक्षम दिख रही थी। खुद तेजस्वी यादव ने राघोपुर विधानसभा से 37,000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की है।

उधर, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने एनडीए से अलग होकर 137 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे लेकिन उसे जीत सिर्फ एक सीट पर ही मिल सकी। हालाँकि, पार्टी ने सबसे अधिक नुकसान अपने चिर विरोधी नीतीश कुमार की जद-यू को पहुँचाया है। यही वजह है कि नीतीश कुमार की पार्टी 43 सीटों पर ही दबदबा बना सकी। दरअसल, चिराग का पूरा कैंपेन ही नीतीश विरोधी था।