राजनीति
सरसंघसंचालक मोहन भागवत- राम मंदिर का निर्माण आत्म-सम्मान का विषय, सरकार जारी करे अध्यादेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघसंचालक मोहन भागवत ने गुरु वार को कहा कि सरकार को एक अध्यादेश के द्वारा अयोध्याम में राम मंदिर के निर्माण की राह साफ कर देनी चाहिए, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस  ने रिपोर्ट किया।

संघ के मुखिया ने अपने वार्षिक विजयादशमी संबोधन में कहा, “आत्म-सम्मान के दृष्टिकोण से मंदिर का निर्माण आवश्यक है। इससे देश में सद्भाव और एकता का वातावरण बनेगा।”

उन्होंने दावा किया कि संघ से जुड़े सभी व्यक्तियों की भावना करोड़ों भारतीयों के साथ है जो राम की जन्मभूमि पर एक भव्य मंदिर बनाना चाहते हैं। “जन्मभूमि स्थल अभी भी मंदिर के निर्माण के लिए आवंटित नहीं हुआ है, हालाँकि सभी तथ्यों द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि उस स्थान पर एक मंदिर था।”, उन्होंने कहा।

भागवत ने उंगली उठाते हुए कहा, “कुछ तत्व हैं जो नए-नए दावे करके न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना चाह रहे हैं और निर्णय को रोकना चाह रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अकारण ही समाज के सब्र की परीक्षा लेना किसी के हित में नहीं है।

“कुछ कट्टरपंथी देशहित के आड़े आ रहे हैं, ये वही ताकतें हैं जो स्वार्थ सिद्धि के लिए सामुदायिक राजनीति को बढ़ावा देते हैं। राजनीति के कारण राम मंदिर निर्माण में देरी हो रही है।”, उन्होंने कहा। उसके इस बयान से अनुमान लगाया जा रहा है कि सरसंघसंचालक को नए मुख्य न्यायाधीश द्वारा मुकजमा खींचे जाने की आशंका।

भागवत ने कहा कि सभी बाधाओं के बावजूद भूमि अधिकार का निर्णय जल्द लिया जाना चाहिए और सरकार को उपयुक्त कानूनी व्यवस्था के माध्यम से भव्य मंदिर के निर्माण हेतु सहायता करनी चाहिए।