राजनीति
संभाजी महाराज और संत तुकाराम पर आपत्तिजनक टिप्पणी, महाराष्ट्र सरकार को वापस लेनी पड़ी पुस्तकें

महाराष्ट्र राज्य सरकार ने दो पुस्तकों को स्थायी रूप से वापस ले लिया है जो सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत चलाई जा रही थी। द इंडियन एक्सप्रेस  ने रिपोर्ट किया कि इन पुस्तकों में कथित तौर पर क्षत्रपति संभाजी महाराज और संत तुकाराम पर आपत्तिजनक सामग्री थी।

महाराष्ट्र राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के विद्या प्राधिकरण ने एक परिपत्र जारी किया जिसके अनुसार सरकारी विद्यालयों में सर्वशिक्षा अभियान के ‘एकभाषिक पूरक वचन पुस्तक योजना’ के अंतर्गत बाँटी गई पुस्तकों में से दो पुस्तकों को वापस लेने का आदेश है।

इन किताबों को पहले अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। इस योजना के अंतर्गत प्रदान की गई अन्य किताबों को अस्थायी रूप से राज्य शिक्षा विभाग ने रोककर रखा है क्योंकि एक समीक्षा समिति इन किताबों की समीक्षा करेगी।

इन दो किताबों में से एक शुभा साठे द्वारा लिखित और महाराष्ट्र राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा प्रकाशित किताब ‘समर्थ श्री रामदास स्वामी’ में उल्लेख है कि संभाजी महाराज मद्यपान के आदी थे और बुरी संगति में रहते थे।

गोपीनाथ तलवलका द्वारा लिखित ‘संताचे जीवन प्रसंग’ के लिए रिपोर्ट किया गया है कि इस पुस्तक में संत तुकाराम और उनकी पत्नी के विषय में आपत्तिजनक उल्लेख है। डी.एन.ए. ने बताया कि पुस्तक में तुकाराम की पत्नी को एक चिड़चिड़े मिजाज़ की महिला के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो लोगों से बात करने में कलुषित और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करती थी। लेखक ने यह तक कहा है कि वह अपने पति, संत तुकाराम को पागल आदमी कहती थी।

महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यों की एक समिति नियुक्त की है और विपक्षी दलों, संभाजी ब्रिगेड व अन्य संगठनों द्वारा तीव्र आलोचना के बाद पुस्तकों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।

महाराष्ट्र विद्या प्राधिकरण के निदेशक सुनिल मगर ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “जब विशेषज्ञ समिति ने कहा कि पुस्तकों में आपत्तिजनक सामग्री है, तब उन्हें वापस ले लिया गया।”