राजनीति
‘भक्त नहीं एक्टिविस्ट’: केरला मंत्री ने मानी चूक, कहा सबरीमाला मंदिर सक्रियता दिखाने का स्थान नहीं

सबरीमाला में चल रहे सक्रियता और श्रद्धा के बीच के संघर्ष में केरला सरकार ने दो महिलाओं को मंदिर के मुख्य प्रांगण में प्रवेश करने से पहले वापस भेज दिया है, द न्यूज़ मिनट  ने बताया।

ये दो महिलाएँ, 24 वर्षीय कविता जक्काला जो हैदराबाद आधारित एक न्यूज़ एंकर है और दूसरी एरनाकुलम की रेहना फ़ातिमा है।

सरकार ने उन्हें सबरीमाला निर्णय की पक्षधर कार्यकर्ता बताते हुए साफ किया है कि अपनी सक्रियता दिखाने के लिए मंदिर में प्रवेश कर श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करना सही नहीं है और उन्हें यहाँ आने से मना किया है।

ये दो महिलाएँ पुलिस महानिरीक्षक एस.श्रीजीत और 80 पुलिसकर्मियों के संरक्षण में मंदिर के पवित्र स्थान के निकट तक पहुँच गई थीं। लेकिन देवास्वोम के मंत्री कडकम्पल्ली सुरेंद्रन ने पुलिस महानिरीक्षक को सूचित किया कि सक्रियता दिखाने के लिए मंदिर उपयुक्त स्थान नहीं है और उन दो महिलाओं को और आगे लेकर जाना पुलिस की ग़ैर-ज़िम्मेदाराना हरकत होगी।

सुरेंद्रन ने कहा, “सबरीमाला अपनी सक्रियता की शक्ति दिखाने का स्थान नहीं है। मेरा सभी सक्रिय कार्यकर्ताओं से निवेदन है कि वे न्यायालय के निर्णय का इस प्रकार दुरुपयोग न करें। अगर सच्चे श्रद्धालु आते हैं तो सरकार सन्नीधनम् तक लेकर जाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार सक्रिय कार्यकर्ताओं की सुरक्षा नहीं करेगी।”

हिंदुस्तान टाइम्स  की रिपोर्ट के अनुसार मंत्री ने इन सक्रिय महिलाओं को अंदर जाने की अनुमति देने को अपनी चूक माना।

पहले की रिपोर्टों में सामने आया था कि पुलिस आंदोलनकारियों से सख्ती से पेश आ रही है। कम्युनिस्ट पार्टू कू केरला सरकार ने मुख्य पुजारी और पंडालम के राजसियों को भी यातना दी थी।