राजनीति
आदिवासी भूमि पर बने चर्च का नाम ‘सरना भवन’ कर आदिवासियों ने भूमि पर अपना आधिपत्य किया स्थापित

रांची ज़िले के नामकुम खंड के गढ़खटंगा गाँव में लगभग 100 आदिवासियों ने एक चर्च के भवन में से क्रॉस हटा दिया और शनिवार (20 अक्टूबर) को शुद्धि करने के बाद उस भवन का नाम ‘सरना भवन’ रख दिया।

चर्च भवन आदिवासी ज़मीन पर बना हुआ था और ज़मीन अधिकार का मामला एस.डी.ओ. न्यायालय तक पहुँचा था। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत न्यायालय ने अपना फैसला सरना आदिवासियों ते हक में सुनाया, ई.ई. नाडू इंडिया ने रिपोर्ट किया।

ग्रामीण क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक अजीत पीटर डंगडंग ने विवाद के जारी रहने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला केवल भूमि अधिकार के लिए था, भवन के बारे में कुछ नहीं कहा गया था। “भवन उस समय नहीं था जब भूमि का अवैध हस्तातंतरण हुआ”, उन्होंने यह जोड़ते हुए कहा कि भवन न्यायालय के लिए एक मसला हो सकता है।

ग्रामीणों के आदिवासी सरना विकास समिति और अन्य आदिवासी समूहों का समर्थन प्राप्त था। समिति अध्यक्ष मेघा ओराओं ने कि जिस भूमि पर विवाद है, वह ‘पाहन ज़मीन’ है जिस पर समुदाय के ‘पाहन’ का साधिकार होता है। यद्यपि ज़मीन पाहन की आय का साधन है लेकिन ज़मीन का अधिकार गाँव की सरना समिति को होता है।

केंद्रीय युवा सरना समिति के अध्यक्ष सोमा ओराओं ने कहा कि ज़मान के अवैध हस्तांतरण और उसपर निर्माण का विरोध सभी ने उसी समय किया था पर उस वक्त किसी ने ध्यान नहीं दिया था। “इसी के बाद हमने मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दायर की।”, उसने कहा।

दोंनो आदिवासी समूहों के अध्यक्ष ईसाई मिशनरियों की बलपूर्व धर्म परिवर्तन और उनकी भूमि व संसाधनों पर अतिक्रमण के लिए कड़ी निंदा करते आए हैं, दैनिक जागरण ने बताया।

संदर्भ में, भाजपा सरकार ने झारखंड में धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2017 पारित किया था। लोगों का मानना है कि ईसाई मिशनरियों और सरना आदिवासियों के ध्रुवीकरण का असर 2019 के लोक सभा चुनावों पर देखने को मिलेगा।