रक्षा
पारस डिफेन्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजीस का व्यापार किन रक्षा खंडों पर करता है निर्भर
सौरव दत्ता - 22nd September 2021

पारस डिफेन्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजीस लिमिटेड ने कल (21 सितंबर को) अपना आईपीओ जारी किया और दूसरे दिन भी इसने निवेशकों का ध्यान खींचा हुआ है। नई इक्विटी जारी करके कंपनी का उद्देश्य 140 करोड़ रुपये जमा करना है।

साथ ही बिक्री का प्रस्ताव भी है जिसमें संप्रति निवेशक और प्रमोटर अपने शेयर बेचेंगे। कंपनी की योजना है कि प्राप्त राशि से वह नई मशीनें खरीदे और कंपनी की उच्च क्रियान्वयन पूँजी आवश्यकताओं को वित्तपोषित करे। इसके अलावा कंपनी का यह भी विचार है कि उसपर जो ऋण जमा हो गया है, उसका कुछ भाग वह चुका दे।

कई प्रकार के रक्षा एवं अंतरिक्ष अभियांत्रिकी उत्पादों को पारस डिज़ाइन, विकसित और विनिर्मित तथा उनका परीक्षण भी करता है। निजी क्षेत्र में भारत की स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित एवं विनिर्मित (आईडीडीएम) श्रेणी की कंपनियों में से पारस एक है।

भारत में अंतरिक्ष उपकरणों के लिए बड़े आकार की ऑप्टिक्स और विसरण ग्रेटिंग्स, आदि के लिए महत्त्वपूर्ण इमेजिंग पुर्जों की आपूर्ति करने वाली एक मात्र भारतीय कंपनी पारस ही है। भारतीय रक्षा क्षेत्र के चार खंडों पर यह ध्यान देती है-

  1. रक्षा व अंतरिक्ष ऑप्टिक्स- इस खंड के अंतर्गत रक्षा एवं अंतरिक्ष उपकरणों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले ऑप्टिक्स का विनिर्माण आता है। इन उपकरणें में थर्मल व अंतरिक्ष इमेजिंग प्रणालियाँ भी सम्मिलित हैं। पारस एकमात्र भारतीय कंपनी है जिसमें स्पेस-ऑप्टिक्स व ऑप्टो-मेकैनिकल एकीकरण की डिज़ाइन क्षमताएँ हैं।
  2. रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स खंड- रक्षा उपकरण परिचालनों में रक्षा उपकरणों के लिए उच्च प्रदर्शन वाले कई प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक एवं कम्प्यूटेशन प्रणालियों को उपलब्ध करवाना होता है। इसमें मिसाइल, टैंक व नौसैन्य कामों के लिए आवश्यक प्रणालियों भी सम्मिलित हैं।
  3. ईएमपी सुरक्षा समाधान- ईएमपी सुरक्षा समाधान खंड में कई प्रकार के समाधानों का डिज़ाइन, विनिर्माण व उन्हें लागू करना आता है। रक्षा क्षेत्र में कंपनी ऐसी विशिष्ट परियोजनाओं पर ध्यान देती है जो सीधे उपयोग के लिए तैयार हों।
  4. भारी अभियांत्रिकी- भारी अभियांत्रिकी श्रेणी में रॉकेट व मिसाइलों के लिए कई महत्त्वपूर्ण पुर्जों को उपलब्ध कराना आता है। यह खंड दूसरे खंडों के लिए सहायक तंत्र के रूप में भी काम करता है।

भारत में मिसाइल अभ्यास

कंपनी के दो विनिर्माण संयंत्र हैं, एक तो अंबरनाथ में और एक नेरूल में। नेरूल एवं बेंगलुरु में इसके शोध केंद्र भी हैं। हालाँकि, कंपनी का राजस्व लगातार घट रहा है। जो वित्तीय वर्ष 2019 में 154 करोड़ रुपये था, वह वित्तीय वर्ष 2020 में 147 करोड़ रुपये व वित्तीय वर्ष 2021 में 143 करोड़ रुपये हो गया।

राजस्व में 3 प्रतिशत की गिरावट आपूर्ति शृंखला के व्यवधानों व इस क्षेत्र में आई मंदी के कारण हुई है। वित्तीय वर्ष 2021 में कंपनी का परिचालन मार्जिन 30 प्रतिशत रहा था। यह गत वर्ष से अधिक है जिसमें मार्जिन 26 प्रतिशत रहा था।

यह बढ़त ऑप्टिक्स खंड में हुई राजस्व वृद्धि के कारण हुई है जो 50 प्रतिशत की भागीदारी रखा है। वहीं, अन्य खंडों की भागीदारी 15-25 प्रतिशत है। पारस के पाँच सबसे बड़े ग्राहकों ने इसके राजस्व में 60-70 प्रतिशत का योगदान दिया था।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इसके सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है जिसका कंपनी के राजस्व में 16 प्रतिशत का योगदान रहा था। यह क्षेत्र बड़ी पूँजी की माँग करता है। इस बात को इससे समझा जा सकता है कि स्थाई परिसंपत्तियों में कंपनी के पास 150 करोड़ रुपये हैं लेकिन राजस्व मात्र 143 करोड़ रुपये का ही है।

इसका अर्थ हुआ कि संयंत्र संपत्ति व उपकरणों में खर्च किए गए हर रुपये के बदले 1 रुपये से कम की बिक्री होती है। कंपनी का ऋण से इक्विटी का अनुपात 0.5 के आसपास रहा है। वित्तीय वर्ष 2021 में जाकर नकद प्रवाह बेहतर हुआ, अन्यथा उससे पहले ऋणात्मक नकद प्रवाह था।

साभार- मार्केटफीड

ऋणात्मक नकद प्रवाह का कारण उच्च क्रियान्वयन पूँजी आवश्यकताएँ हैं। प्रति शेयहर पर 4 रुपये की कमाई से मूल्य और कमाई का अनुपात 43 होगा। इसका कोई प्रत्यक्ष लिस्टेड प्रतिनिधि नहीं है लेकिन अन्य रक्षा कंपनियों की कमतर मार्जिन है।

व्यापार के पूँजी आधारित होने के कारण कई कंपनियों को बढ़ने के लिए बड़ा ऋण लेना होता है। रक्षा क्षेत्र की कई कंपनियाँ पहले दिवालिया हो चुकी हैं। इस उद्योग में सफलता दर कम होती है, इस बात का ध्यान निवेशकों को रखना होगा।

प्रमुख जोखिम

पहला, सरकार पर निर्भरता। रक्षा क्षेत्र का भविष्य सरकार की नीतियों एवं सरकार के खर्च पर निर्भर करता है। यदि सरकार ने खर्च करना बंद कर दिया या निर्णय लिया कि वह अन्य विक्रेताओं से खरीदेगी तो कंपनी के लिए कठिनाइयाँ खड़ी होंगी।

दूसरा, ग्राहक केंद्रीकरण। अपने राजस्व के बड़े भाग के लिए कंपनी कुछ ग्राहकों पर ही निर्भर है। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि शीर्ष पाँच ग्राहकों से कंपनी का 60-70 प्रतिशत राजस्व आता है, एक ग्राहक के खोने से भी कंपनी को बड़ा घाटा होगा।

तीसरा, पूँजी-आधारित होना। कंपनी को स्थिर और क्रियाशील पूँजी की उच्च आवश्यकता है। चौथा, कोविड संबंधित परेशानियाँ। आपूर्ति शृंखला में किसी भी प्रकार का व्यवधान या परिचालन के बंद हो जाने से कंपनी को भारी नुकसान हो सकता है।