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जिहाद के नाम पर अफगान सैनिकों से लड़ रहे पाकिस्तानी, अब तालिबान लौटा रहे शव

अफगानिस्तान में आतंकवादी संगठन तालिबान से चल रहे गृह युद्ध में पाकिस्तान के कई जिहादी भी सम्मिलित हुए। अब उनमें से कई के शव वापस लौटाए जा रहे हैं।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान ने पाकिस्तानी धार्मिक मदरसों के कई छात्रों को उग्रवादियों की श्रेणी में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित किया था। इसे उन्होंने जिहाद के रूप में वर्णित किया था। पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में मौलवी भी अफगान-तालिबान के लिए समर्थन मांग रहे और चंदा भी एकत्रित कर रहे हैं।

हालाँकि, इस्लामाबाद इससे मना करता आ रहा है कि देश से जिहादी अफगानिस्तान जा रहे और चमन-स्पिन बोल्डक एवं तोरखुम सीमा पार से अपने नागरिकों के शव प्राप्त किए जा रहे हैं।

उत्तर-पश्चिम में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत और दक्षिण-पश्चिम में बलूचिस्तान में स्थानीय लोगों के अनुसार, गत कुछ माह में अफगानिस्तान में तालिबान के साथ अफगान बलों के विरुद्ध लड़ते हुए दर्जनों पाकिस्तानी मारे गए। सैकड़ों लोग पाकिस्तानी लड़ाकों के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। जुलाई में रशीद को उत्तर पश्चिम में पेशावर शहर के उपनगरीय क्षेत्र में दफनाया गया था। रशीद के परिवार के अनुसार, वह मई में जिहाद के लिए अफगानिस्तान गया था।

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में सैकड़ों लोगों ने अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया, जहाँ तालिबान के सफेद झंडे दिखाए गए थे। क्वेटा और बलूचिस्तान के अन्य हिस्सों में कई स्थानीय लोगों और गवाहों ने दावा किया कि उनके क्षेत्रों में तालिबान समर्थक गतिविधियों में वृद्धि हुई है।

पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख रशीद अहमद ने स्वीकारा था कि देश में आने वाले शव अफगान तालिबान के थे क्योंकि उनमें से कई के परिवार पाकिस्तान में रहते हैं। कभी उनके शव आते हैं तो कभी उपचार के लिए अस्पताल आते हैं।