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पाक सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय सभा बहाल की, 9 अप्रैल को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का भविष्य तब अधर में लटक गया, जब सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को भंग संसद की बहाली और अविश्वास प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान करवाने के लिए 9 अप्रैल को एक सत्र बुलाने का आदेश दिया।

इस ऐतिहासिक निर्णय में मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल की अगुआई वाली पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से उप सभापति कासिम सूरी के निर्णय को खारिज कर दिया, जिसमें खान के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव को खारिज किया गया था।

इमरान खान के संसद के निचले सदन में विपक्षी दलों के गठबंधन द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव से बचने की अपेक्षा नहीं थी। उनको प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए विपक्ष के पास 342 सदस्यीय सदन में 172 से अधिक वोट थे।

पाक की सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय सुनाया कि उप-सभापति का अविश्वास प्रस्ताव व राष्ट्रीय सभा को भंग करने और राष्ट्रपति द्वारा जल्द चुनाव कराने का आदेश दोनों ही असंवैधानिक थे।

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन) के नेता शहबाज शरीफ, जिन्हें व्यापक रूप से प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में देखा जाता है, ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया और कहा, “पाकिस्तान और उसके संविधान को बचाया लिया गया है। इस निर्णय ने न्यायपालिका की संप्रभुता को मजबूत किया और संविधान की पवित्रता को बनाए रखा है।”

जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फज़ल के नेता मौलाना फजलुर रहमान, जिन्होंने खान के विरुद्ध विपक्ष के अभियान का नेतृत्व किया, ने कहा कि कार्यकर्ता अब खुशी मनाएँगे और कृतज्ञता की प्रार्थना करेंगे।

बता दें कि तहरीक-ए-इंसाफ के नेताओं ने आरोप लगाया था कि सरकार के विरुद्ध विदेशी षड्यंत्र रचा गया था। मीडिया रिपोर्टों में अज्ञात पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा गया कि इस तरह के षड्यंत्र का कोई साक्ष्य नहीं मिला है और अमेरिकी प्रशासन ने बार-बार आरोपों का खंडन किया है।