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2018 से 2021 तक 2.38 लाख से अधिक शेल कंपनियों को बंद करवाया गया- सरकार

केंद्र सरकार ने मंगलवार (27 जुलाई) को राज्यसभा को बताया कि 2018 से 2021 के बीच 2.38 लाख से अधिक शेल कंपनियों (सिर्फ नाम भर की कंपनी, जो प्रायः कागज़ों पर चलती है) की पहचान की और उन्हें बंद करवा दिया गया।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय कॉरपोरेट मामलों के राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि कंपनी अधिनियम में शेल कंपनी शब्द की कोई परिभाषा नहीं है। यह अमूमन सक्रिय व्यवसाय संचालन के बिना एक कंपनी को संदर्भित करती है या महत्वपूर्ण संपत्ति, जो कुछ मामलों में कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग, अस्पष्ट स्वामित्व, बेनाम संपत्ति जैसे अवैध उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाती है।

उन्होंने आगे कहा कि शेल कंपनियों पर गौर करने के लिए सरकार द्वारा गठित विशेष कार्य बल ने अन्य बातों के अतिरिक्त कुछ खतरे के संकेतकों को इन कंपनियों की पहचान के लिए सतर्क करने के रूप में उपयोग करने की सिफारिश की है।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार मंत्री ने कहा, “सरकार ने गत तीन वर्षों में शेल कंपनियों की पहचान और उन्हें हटाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया है।”

मंत्री ने 2018 और जुलाई 2021 के बीच बंद की गई शेल कंपनियों की संख्या का डाटा भी प्रस्तुत किया। आँकड़ों के अनुसार, गत तीन वर्षों में देश भर में 2,38,223 शेल कंपनियों को बंद करवाया गया।