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ओपेक देशों की रूस को सौदे से निलंबित कर स्वयं तेल उत्पादन बढ़ाने की योजना- रिपोर्ट

पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (ओपेक) कथित तौर पर रूस को तेल उत्पादन समझौते से बाहर करने पर विचार कर रहा है। इस पर गत वर्ष सहमति बनी थी और अब उनके उत्पादन में वृद्धि हो सकती है क्योंकि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की वजह से मास्को की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है।

रूस के समझौते से बाहर होने के साथ सऊदी अरब, यूएई और अन्य ओपेक सदस्य उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अधिक कच्चे तेल का उत्पादन करेंगे।

रूस के इस वर्ष की शुरुआत में यूक्रेन पर सैन्य आक्रमण शुरू करने के बाद वैश्विक तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बढ़ गई हैं। दरअसल, अमेरिका और उसके अन्य सहयोगियों ने विश्व के तीन सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक मास्को पर प्रतिबंध लगाए हैं।

अमेरिका सहित कई देशों ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन से तेल की कीमतों को नीचे लाने के लिए उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया है।

रूस ओपेक प्लस का एक प्रमुख सदस्य है। इसका गठन 2016 में किया गया था। ओपेक देशों और रूस के अतिरिक्त संगठन में पूर्व-सोवियत राज्य और अन्य देश भी इसके सदस्य हैं।

डब्ल्यूएसजे की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन के 13 सदस्य और रूस के नेतृत्व में 10 गैर-ओपेक निर्माता गुरुवार (2 जून) को मिलने वाले हैं, जब उनसे प्रतिदिन 432,000 बैरल की योजनाबद्ध वृद्धि को स्वीकृति देने की अपेक्षा है।

गत वर्ष एक तेल-उत्पादन सौदे में रूस ने ओपेक और 9 गैर-ओपेक देशों के साथ हर माह अधिक कच्चे तेल के उत्पादन के लिए सहमति व्यक्त की थी।

हालाँकि, प्रतिबंधों के कारण रूस की अधिक तेल उत्पादन की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। संगठन के कुछ सदस्यों ने किसी भी संभावित रूसी कमी को पूरा करने के लिए आगामी कुछ माह में उत्पादन में वृद्धि की योजना बनानी शुरू की है।