श्रद्धांजलि
सोनिया गांधी के विरुद्ध मुखर होने के लिए फर्नान्डिस को बनाया जाता था निशाना

आशुचित्र- मंगलवार (29 जनवरी) को 88 वर्ष की आयु में पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नान्डिस का निधन हो गया। जानें सोनिया गांधी के विरुद्ध बोलने पर उन्हें कैसे निशाना बनाया गया था।

2001 में जब वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार केंद्र शासन कर रही थी, तब मीडिया द्वारा देश में “कॉफिनगेट” का कोलाहल मचाया गया। आरोप लगाया गया कि कॉफिन (ताबूत) की खरीद में वित्तीय अनियमितताएँ हैं, जबकि असल में वे कॉफिन नहीं 1999 कारगिल युद्ध के लिए एल्युमीनियम कास्केट (डब्बे) थे जिन्हें मीडिया ने आकर्षण बढ़ाने के लिए कॉफिन बोलना पसंद किया।

तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नान्डिस को कफन-चोर कहने में कांग्रेस ने कोई देरी नहीं की और उनके त्यागपत्र की मांग करने लगे। राज्य सभा और लोक सभा की कई बैठकों की कांग्रेस के हंगामे के चक्कर में बलि चढ़ गई।

समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली द्वारा लिखित एक लेख पर आधारित स्वराज्य ने जाँच की और हमें यह मिला-

जॉर्ज फर्नान्डिस पर दोषपूर्ण हमले

गांधी परिवार के विरुद्ध बोलने वालों को कांग्रेस द्वारा नीचा दिखाया जाना कोई नई बात नहीं है। दुर्भाग्यवश यह है कि लोग पार्टी के इस सामूहिक कृत्य को जल्द ही भूल जाते हैं। पार्टी के लिए गांधियों के अलावा कुछ पवित्र नहीं है।

कांग्रेस के इस ढोंग को समझाने के लिए “कॉफिनगेट” से बेहतर कोई उदाहरण नहीं है।

जॉर्ज फर्नान्डिस ही क्यों?

क्योंकि फर्नान्डिस सोनिया गांधी के सबसे मुखर प्रतिद्वंदी रहे हैं। न कोई और नेता, न कोई और पार्टी, यहाँ तक कि भाजपा ने भी इतनी मुखरता से सोनिया गांधी पर निशाना नहीं साधा जैसे फर्नान्डिस किया करते थे। इस वीडियो के माध्यम से यह देखा जा सकता है-

लेकिन घोटाले का क्या?

इस मामले में सीबीआई जाँच में फर्नान्डिस के विरुद्ध कुछ नहीं मिला और न ही सीबीआई चार्जशीट में उनका कहीं नाम था। हालाँकि ये आरोप ज़रूर लगाया गया कि सीबीआई सरकार के हाथों की कठपुतली है इसलिए केंद्रीय मंत्री के विरुद्ध कुछ मिलना मुश्किल है। दूसरे परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो इस वाक्य में सत्यांश अवश्य है।

लेकिन जॉर्ज के मामले में चार्जशीट 2009 में दायर की गई थी जब सोनिया गांधी स्वयं सत्ता में थी और तब फर्नान्डिस का नाम इसमें न होने को अनसुना कर दिया गया। मीडिया भी इसी पटकथा के अनुसार चली। 2001 में जहाँ फर्नान्डिस के विरुद्ध सनसनीकेज़ खुलासे किए ज रहे थे, वहीं 2009 में सबने चुप्पी साध ली थी।

जेटली क्या कहते हैं

जेटली के अनुसार जिसे घोटाले के रूप में प्रदर्शित किया गया, वह असल में एक मध्यम स्तरीय वित्त अधिकारी द्वारा टाइपोग्रफिकल (टंकण संबंधी) त्रुटि थी। और 5 करोड़ रुपये से कम के क्रय की फाइलें रक्षा मंत्री के पास नहीं जाया करतीं। इसलिए फर्नान्डिस को निशाना बनाया जाना विशुद्ध प्रतिशोध था।

जेटली के कथनों से समझा जा सकता है कि सोनिया गांधी के विरुद्ध बोलने वाले पर हमला करने के लिए कांग्रेस न तर्कों और न तथ्यों की चिमता करती है, न संस्थानों की और न प्रक्रिया की। इसके लिए यह देश की अखंडता पर भी वार करने से नहीं घबराती।

कारगिल युद्ध में दिखाए गए शौर्य के लिए देश सेना का कृतज्ञ है। इसमें राजनीतिक भूमिका की भी सराहना की गई। किसी भी रूप से शहीदों के लिए कास्केट क्रय में भ्रष्टाचार का आरोप पैशाचिक है, और एक लोकतांत्रिक देश में विपक्ष को ऐसा आरोप पूर्ण तथ्यों के आधार पर ही लगाना चाहिए। यदि गलत सिद्ध हुए तो विपक्ष नेता को माफी भी मांगनी चाहिए और सभी पदों से त्यागपत्र भी देना चाहिए।

लेकिन, दुखपूर्ण यह है कि ऐसा भारत में नहीं होता। फर्नान्डिस पर लगाए आरोपों के गलत सिद्ध होने के बाद भी सोनिया गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बनी रहीं व यूपीए का नेतृत्व करती रहीं।