श्रद्धांजलि
हिंदी साहित्य में आलोचना को स्थान दिलाने वाले लेखक नामवर सिंह का निधन

हिंदी के प्रखर आलोचक नामवर सिंह का देहांत मंगलवार देर रात 11.50 पर हुआ। 92 वर्षीय सिंह एक महीने पहले अपने कमरे में गिर गए थे, उसके बाद उन्हें एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया था। अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। लोधी रोड स्थित श्मशान घाट पर बुधवार दोपहर बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, भास्कर  ने बताया।

हज़ारी प्रसाद द्विवेदी के शिष्य रहे नामवर सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में लंबे समय तक अध्यापन का कार्य किया। बीएचयू से हिंदी साहित्य में एमए और पीएचडी करने वाले सिंह ने हिंदी साहित्य जगत में आलोचना को नया स्थान दिया। वे ‘जनयुग’ और ‘आलोचना’ नाम की दो पत्रिकाओं के संपादक भी रहे।

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सिंह की बकलम खुद, हिंदी के विकास में अपभ्रंश का योगदान, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियांष छायावाद, पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, नई कहानी, कविता के नए प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज प्रमुख कृतियाँ हैं।