श्रद्धांजलि
एक युग समाप्ति की ओर – अटल बिहारी वाजपेयी

भारत अटल भारतीयता अटल,

और भारत का हर इंसान भी अटल है

अटल बनी रहे अपनी पहचान सदा

इसीलिए अपना प्रधान भी अटल है

 

ये पंक्तियाँ 2002 में अटल जी की शान में लखनऊ के महरिषि विद्या मंदिर पब्लिक स्कूल के हिन्दी के अध्यापक श्री कृष्ण पाल सिंह “दिनकर” जी द्वारा लिखी गयी थी। उस वक़्त मैं कक्षा 10 में था लेकिन इन पंक्तियों का असर कुछ ऐसा हुआ की मैं पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर भारत रत्न अटल जी का मुरीद बन गया। अटल जी पर बहुत कुछ लिखा गया है और अटल जी ने खुद बहुत कुछ लिखा है लेकिन सच्चाई यह है उन पर कितना भी लिख लिया जाए वो कम है ।

मैं उनसे इतना ज्यादा प्रभावित था कि मैंने उन्हे सामाजिक मुद्दों पर और मिलने का समय देने के लिए पत्र लिखना शुरू किया । हालांकि उनका खुद का जवाब नहीं आया लेकिन उनके दफ्तर से उनकी एक तस्वीर और साथ में एक पत्र मिला  कि “प्रधानमंत्री जी आपके अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य कि कामना करते हैं“। वह पत्र आज भी मेरे लिए एक उपलब्धि से कम नहीं है और हर किसी को मैं इसे अपनी एक कामयाबी बताता हूँ  । उनके दफ्तर से मिली तस्वीर ही इस लेख कि मुख्य तस्वीर है ।

अटल जी अपने नाम के अनुरूप ही अपने आदर्शों और विचारधारा पर अटल रहे । आज उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है सभी उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं लेकिन इस लेख में मैं इस सत्य को मानते हुए कि म्रत्यु भी अटल है और हर किसी को आनी है उस बात पर प्रकाश डालना चाहूँगा कि अटल जी की उनुपस्थिति में उनकी कौन से विशेषताएँ हैं जो हमेशा याद की जाएंगी ।

  • अद्वितीय वाकपटुता  –

भाषण कला में निपुण नेताओं की अगर फेरिस्त बनाई जाए तो कई नाम सामने आएंगे जिसमें कुछ नाम – शुषमा स्वराज, प्रमोद महाजन, अरुण जेटली के हो सकते हैं लेकिन अटल जी का अंदाजे बयान इन सबसे अलग रहा है । अपने वाक्यों के बीच में समय लेकर अपनी विचारों को शब्द देना और जनता को बांधे रहना उनकी खासियत रही है । उनके बाबरी मस्जिद प्रकरण के बाद दिया गए भाषण में उनका आक्रोश और वहीं यूनाइटेड नेशन्स के भाषण में उनकी विनम्रता उनके दो अलग अंदाज़ बयान करते हैं और अगर आपको संसद का वो भाषण याद हो जब एक वोट से गठबंधन की सरकार गिरी थी “ संख्याबल के सामने हम सर झुकाते हैं और आपको विश्वास दिलाते हैं की जो कार्य हमने अपने हाथ में लिया है और जब तक राष्ट्र के उद्देश्य को पूरा नहीं कर लेंगे तब तक आराम से नहीं बैठेंगे” । उस आवाज में एक गुस्सा था और एक भरोसा था कि हम जा तो रहे हैं लेकिन लौंटेंगे जरूर ।

  • विरोधी बहुत थे पर दुश्मन कोई नहीं

आज लोग महागठबंधन के बारे में बहुत चर्चा कर रहे हैं लेकिन इसकी संभावनाएं बहुत कम दिख रही हैं क्यूंकी महागठबंधन के लिए कोई ऐसा चेहरा ही नहीं है जिस पर सभी दल एक राय बना सकें । लेकिन अटल जी एक अकेली ऐसी शख्सियत हैं जो 20 से ज्यादा दलों को साथ लेकर पाँच साल सरकार चलाने कि ताकत रखते हैं । किसी ने बहुत सही कहा है कि अटल जी के विरोधी बहुत रहे पर दुश्मन कोई नहीं । सही कार्य में अपने विरोधियों की प्रशंसा करने में भी अटल जी कभी नहीं हिचके ।

  • काव्य रचना और काव्य पाठ –

कवियों को राजनीति में आते देखा गया है लेकिन किसी राजनीतिक व्यक्ति कवि बनके अपना लोहा मनवाया हो ऐसी मिसाल शायद दूसरी नहीं मिलेगी । अटल जी की कविताओं में आशा, उम्मीद, भरोसा, साहस और मनोबल ऊंचा रखने के लिए सारी सामाग्री थी । उनकी कविताओं से उनका व्यक्तित्व समझ में आता है कि उन्हे देश के लिए बहुत कुछ करने की चाह थी लेकिन स्वास्थ्य ने उनका साथ नहीं दिया ।

मेरे जैसे बहुत से लोग उनके मुरीद हैं जिनहे कभी उनसे मिलने का मौका नहीं पाया लेकिन लगा हमेशा ऐसा लगा की अगर मिलूंगा तो पहचान लेंगे । आत्मीयता और उदारवादी सोच उन्हे सबसे अलग करती है । जो आया है वो जाएगा बल्कि पिछले कुछ दिनो में ही गयी दिग्गज राजनेताओं का देहांत हुआ लेकिन अटल जी के जाने के विचार से ही मन भारी है और सच कहूँ तो मीडिया और नेताओं के जमावड़े को देखर उम्मीद कम लगती है की अटल जी अब दुबारा मौत से लड़ाई जीत पाएंगे । और शायद जब तक यह प्रकाशित हो अटल जी हमारे बीच न हों ऐसा सुनने में आ रहा है ।

यह लेख मात्र उनके योगदान को याद करने और उन्हे नमन करने के लिए है । अंत में मैं केवल इतना कहूँगा  कि – अटल बिहारी बाजपई केवल राजनेता नहीं, केवल कवि नहीं, केवल भारत रत्ना नहीं बल्कि अटल जी एक विचारधारा हैं तो कभी समाप्त नहीं हो सकती । अटल जी कि कुछ पंक्तियों के साथ आपसे विदा लेता हूँ –

 

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।