रक्षा
पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ की चूक का क्या अर्थ निकालें हम

कई बार एक ट्वीट 240 अक्षरों की सीमा को लांघकर सहस्रों शब्द कह जाता है। यदि वह किसी आडंबर को अर्थपूर्ण प्रत्युत्तर से खोखला करता है तो हम हँसते हैं, जब वह सूत्र-रूप में होता है तो हम सीखते हैं, और जब पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ गलती से कुछ उजागर कर देते हैं, तो हम ध्यान देते हैं।

हाल में युसूफ से जो चूक हुई, वह 20 अक्टूबर का एक ट्वीट है जिसमें पाकिस्तानी नौसेना द्वारा उसके जलक्षेत्र में घुसने से भारतीय पनडुब्बी को रोकने का दावा किया गया था। इसमें सामान्य की भाँति प्रोपगेंडा का रंग था कि भारत एक युद्धरत देश है और क्षेत्र के लिए खतरा है।

साक्ष्य के रूप में उन्होंने एक अस्पष्ट आधिकारिक वीडियो का संदर्भ दिया जिसे उनके अधिष्ठान के ऑनलाइन नौकरों ने रिलीज़ किया था। इसमें एक अज्ञात पेरिस्कोप देखा जा सकता था जो शांत पानी में आगे बढ़ रहा था।

ट्विटर पर ही ऐसी प्रतिक्रिया मिल गई कि भारत सरकार को परिश्रम नहीं करना पड़ा और सिर्फ इसी से युसूफ के दावे का खंडन हो गया। एक तथ्य तो यह है कि वीडियो में बताए गए कॉर्डिनेट्स के अनुसार पनडुब्बी कराची से सैकड़ों किलोमीटर दक्षिण में थी।

इसके अलावा कई हैंडलों ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार किसी भी देश के अनन्य समुद्री आर्थिक क्षेत्र में या उसके निकट यात्रा करते हुए पनडुब्बियों को सतह पर रहना चाहिए जिससे अच्छा उद्देश्य दिखाया जा सके।

इसमें फिर भारत के युद्धरत देश होने या पाकिस्तान द्वारा भारतीय पनडुब्बी का पता लगा लेने की बात कहाँ से आई? यह मात्र एक घटिया नाटक था। लेकिन युसूफ के ट्वीट का वास्तविक आयात समझने के लिए कुछ संदर्भों की आवश्यकता है।

प्रोपगेंडा के अलावा यहाँ हम एक प्रयास देखते हैं पाकिस्तानी नौसेना की छवि और महत्त्व को बड़ा दिखाने का, वह भी उस समय जब भारतीय उपमहाद्वीप में तनाव काफी है। यहाँ पिछली मुद्राओं से एक अंतर यह है कि पाकिस्तानी सेना, वायुसेना और परमाणु हथियारों की बजाय भारतीय नौसेना की भूमिका दिखाई गई।

दुर्भाग्यवश, उरी के बाद आतंकी शिविरों पर भारतीय कमांडो की स्ट्राइक और पुलवामा के बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक से भारत के युद्धरत देश होने की कहानी को हवा मिलती है। एक परमाणु शक्ति दूसरी परमाणु शक्ति से लड़ रही हो तो अवरोध को आवश्यक दिखाया जा सकता है।

समुद्र यानी नौसेना का तत्व ही बचा था, चार विकल्पों में से एकमात्र जिसका उपयोग भारत ने पाकिस्तान के विरुद्ध नहीं (शेष तीन- मिसाइल, साइबर और आर्थिक) किया है। ऐसे में कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाने पर प्रतिक्रिया अपेक्षित थी, वह भी समुद्री मोर्चे से।

लेकिन यही वह स्थान है जहाँ वाचाल युसूफ एक ट्वीट कुछ ज़्यादा ही आगे चले गए। उन्हें यह संकेत नहीं देना चाहिए था कि भारत की नौसैनिक चुनौती से निपटने के लिए पाकिस्तानी सेना तैयार है। यह आखिरी चीज़ है जो कहनी चाहिए, वह भी तब जब ज़मीनी वास्तविकता इसके विपरीत है। तो फिर यह ट्वीट क्यों?

इसके तीन संभव कारण हैं। पहला, जब कुछ और नहीं होता तो रावलपिंडी इसी प्रकार की शेखी बघारने लगता है। दूसरा, पाकिस्तान और चीन मिलीभगत से जो बातें बनाते हैं, यह उसी का भाग है जिसका उद्देश्य सर्दी के निकट आते-आते दबाव बनाने का होता है।

चीनी राजदूत के साथ मोईद युसूफ

तीसरा, यह जोखिम कम करने की तैयारी है। चीन अपेक्षा कर रहा है कि पाकिस्तानी अरब सागर में मोर्चा संभाले रहें और चीन स्वयं तिब्बती पठार पर दबाव बनाए। यदि पहला कारण है तो उसे अनदेखा किया जा सकता है।

यदि दूसरा कारण है तो दबाव वह तब ही बना सकता है, जब नई दिल्ली उसे दबाव बनाने दे। और यदि तीसरा कारण है तो इसका कोई लाभ नहीं होने वाला क्योंकि वे चाहते हैं कि भारत के जिन को आज्ञाकारी, मौन और पंचशील बोतल में उतारा जाए।

इसी संदर्भ में, साथ-साथ यह भी ध्यान दें कि चीन और पाकिस्तान, दोनों को अपने चरित्र से अलग व्यवहार करना पड़ रहा है, जबसे दशकों पुरानी यथास्थिति, जो हमारे पक्ष में नहीं थी औऱ क्षेत्र का संतुलन बिगाड़ती थी, उसका अंत 2017 में डोकलाम गतिरोध के साथ हो गया।

अलग व्यवहार यूँ कि चीन को तिब्बती पठार पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती करनी पड़ी और पाकिस्तान को, जैसा कि युसूफ के ट्वीट से दिखता है, समुद्री क्षेत्र पर ध्यान लगाना पड़ा। ऐसा लगता है कि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि भारत में इस नई व्यवस्था का कैसे सामना करें।

इसके अलावा, उन्हें यह भी समझना चाहिए कि भारत उनकी हर गतिविधि (और ट्वीट) पर दृष्टि रख रहा है। पाकिस्तानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अपने बयानों से दिखा देते हैं कि क्यों वरिष्ठ सुरक्षा सदस्यों को सार्वजनिक रूप से इतना नहीं बोलना चाहिए।

लेकिन अब उन्होंने एक कदम आगे बढ़कर यह भी बता दिया है कि अधिष्ठान की सोच क्या है। इसिलए, यदि युसूफ सच में पाकिस्तान की सेवा करना चाहते हैं को उन्हें इतने ट्वीट करने से बचना चाहिए, नहीं तो उनकी सरकार को कोई गंभीरता से नहीं लेगा।

वेणु गोपाल नारायणन एक स्वतंत्र पेट्रोलिम कन्सल्टेन्ट हैं जो ऊर्जा, भूराजनीति, समसामयिक विषयों व चुनावी आँकड़ों पर दृष्टि रखते हैं। वे @ideorogueके नाम से ट्वीट करते हैं।