इन्फ्रास्ट्रक्चर
पूर्वोत्तर गैस ग्रिड परियोजना कैसे इस क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण का केंद्र बना सकती है

पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख शहरों को गैस ग्रिड से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना की कल्पना प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में की थी जो अब सही दिशा में अग्रसर है। 9,265 करोड़ रुपये की लागत से पहला चरण 2024 तक क्रियान्वित हो जाएगा।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने परियोजना के क्रियान्वयन व प्रशासन के लिए 2018 में इंद्रधनुष गैस ग्रिड लिमिटेड (आईजीजीएल) की स्थापना की जो पाँच सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों- ओएनजीसी, ऑइल इंडिया लिमिटेड, गेल, इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन और नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड- का संयुक्त उद्यम है।

9 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गुवाहाटी दौरे के दौरान परियोजना का शिलान्यास किया था। आईजीजीएल का मुख्यालय असम की राजधानी में स्थित है। अधिकारियों ने स्वराज्य को बताया कि 1,656 किलोमीटर लंबी प्राकृतिक गैस ग्रिड सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ेगी।

व्यवहार्यता वित्तपोषण के तहत केंद्र सरकार 5,559 करोड़ रुपये (परियोजना की 60 प्रतिशत लागत) देगी। इस वित्तपोषण का समय के साथ बढ़ने वाली परियोजना लागत से संबंध नहीं है। देश के प्राकृतिक गैस के कुल आउटपुट- 7.5 करोड़ घन मीटर प्रतिदिन में 20 प्रतिशत योगदान पूर्वोत्तर करता है।

असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में स्थापित गैस उत्पादन क्षमता है, जबकि माना जाता है कि मणिपुर और नागालैंड में भी काफी भंडार है। मार्च 2024 तक पूरा होने वाले परियोजना के पहला चरण में 550 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन गुवाहाटी से नुमालीगढ़ तक बिछाई जा रही है।गोहपुर से इटानगर (अरुणाचल प्रदेश) और देरगाँव से दीमापुर (नागालैंड) तक शाखा लाइनें हैं।

दूसरे चरण में 576 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन गुवाहाटी से सिलचर (जिसकी एक शाखा मेघालय की राजधानी शिलोंग तक जाएगी) और फिर पनिसागर (त्रिपुरा) तक जाएगी जहाँ से ये दो भागों में बटकर- एक त्रिपुरा की राजधानी अगरतला और एक मिज़ोरम की राजधानी आइज़ोल तक जाएगी।

तीसरे चरण में 360 किलोमीटर की पाइपलाइन बिछाई जाएगी- नागालैंड में दीमापुर से राजधानी कोहिमा तक, जहाँ से एक लाइन मणिपुर की राजधानी इंफाल तक और दूसरी पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी से सिक्कीम की राजधानी गंगटोक तक जाएगी।

बिहार के बरौनी से सिलिगुड़ी होते हुए गुवाहाटी जाने वाली एक गैस पाइपलाइन को गेल बना रहा है। इस प्रकार पूर्वोत्तर गैस ग्रिड को प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना के तहत राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना से उद्योगों, वाहनों और घरों के लिए देश भर में स्वच्छ ऊर्जा पहुँच सकेगी जिसकी कल्पना प्रधानमंत्री मोदी ने की है।

पूर्वोत्तर गैस ग्रिड परियोजना बड़े हाइड्रोकार्बन विज़न 2030 का एक महत्त्वपूर्ण भाग है जिसकी परिकल्पना भी प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में की थी। फरवरी 2016 में इस बड़ी परियोजना का विज़न दस्तावेज जारी हुआ था। हाइड्रोकार्बन विज़न 2030 चाहता है कि 2030 तक पूर्वोत्तर में तेल व प्राकृतिक गैस का उत्पादन दोगुना कर दिया जाए।

साथ ही क्षेत्र की 100 प्रतिशत गृहस्थियों को स्वच्छ ईंधन (जैसे एलपीजी या पाइप के माध्यम से प्राकृतिक गैस), वाहनों व औद्योगिक इकाइयों के लिए पूरे क्षेत्र में सीएनजी की उपलब्धता, जैविक ईंधन के उत्पादन को प्रोत्साहन देकर क्षेत्र को जैविक ईंधन उत्पादन का केंद्र बनाना, तेल व गैस संबंधित विनिर्माण उद्योग को क्षेत्र में प्रोत्साहित करना भी विज़न में सम्मिलित है।

प्राकृतिक गैस ग्रिड के विकास जैसे सीएनजी हाईवे एवं शहरी गैस विपणन (सीजीडी) नेटवर्क की भी बात इसमें है। हाइड्रोकार्बन विज़न 2030 में 1.3 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं का उल्लेख है। इनमें से अधिकांश परियोजनाओं को अनुमति मिल गई है और क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।

“पूरे क्षेत्र में एलपीजी और पाइप द्वारा प्राकृतिक गैस की सरल उपलब्धता… क्षेत्र की अधिकांश जनसंख्या इसे उच्च सब्सिडी दरों पर प्राप्त कर सकेगी। इससे कोयले व लकड़ी के जलावन, विशेषकर पूर्वोत्तर के ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों में, से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकेगा।”, एक वरिष्ठ आईजीजीएल अधिकारी ने बताया।

उन्होंने आगे कहा कि वाहनों और उद्योगों का ईंधन जब सीएनजी बन जाएगा तो पूर्वोत्तर एक स्वच्छ ऊर्जा केंद्र के रूप में उभरेगा जो शेष भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भी एक मॉडल होगा। स्वच्छ ऊर्जा पर चलने वाले उद्योग उन्नत देशों के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे जहाँ अधिकांश उत्पाद स्वच्छ ऊर्जा से बनते हैं।

“हमारा दीर्घ अवधि का सपना है कि दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए पूर्वोत्तर स्वच्छ ऊर्जा पर चलने वाला एक विनिर्माण केंद्र बने जो विश्व-स्तरीय उत्पाद बनाए। क्षेत्रीय गैस ग्रिड के माध्यम से उपलब्ध होने वाली स्वच्छ ऊर्जा पूर्वोत्तर के लिए युग परिवर्तक सिद्ध होगी।”, आईजीजीएल अधिकारी ने कहा।

कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर गैस ग्रिड परियोजना पर करीब से नज़र रखे हुए है। आईजीजीएल के कार्यों पर पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय निगरानी रख रहा है। इस वर्ष के जून तक 1,030 करोड़ रुपये आईजीजीएल को आवंटित किए जा चुके थे।

इसके अलावा केंद्र सरकार के 2021-22 बजट अनुमानों में इस परियोजना के लिए विशिष्ट रूप से 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। “वित्त चिंता का विषय नहीं हैं। हमें कहा गया है कि यदि पाइपलाइन पर तेज़ी से काम होगा तो वित्त भी उसी अनुसार उपलब्घ कराया जाएगा।”, आईजीजीएल अधिकारी ने बताया।

जयदीप मज़ूमदार स्वराज्य में नियमित रूप से योगदान करने वाले संपादक हैं। वे @joyincal09के माध्यम से ट्वीट करते हैं।