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चुनावी वादे ना पूरे करने वाले राजनीतिक दलों पर दंडात्मक प्रावधान नहीं- उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र में किए गए चुनावी वादे को पूरा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें जवाबदेह ठहराने का कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चुनाव के भ्रष्ट आचरण को अपनाने के लिए एक पूरे राजनीतिक दल को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत उत्तरदायी नहीं बनाया जा सकता है।

न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने 2 मार्च को खुर्शीदुरहमान एस रहमान द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इसका अवलोकन किया, जिन्होंने एक आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी। इसमें कहा गया था कि भाजपा 2014 के आम चुनाव में किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही।

न्यायालय ने कहा, “किसी भी राजनीतिक दल द्वारा घोषित घोषणापत्र चुनाव के दौरान उनकी नीति, दृष्टिकोण, वादों और प्रतिज्ञा का एक बयान है, जो बाध्यकारी बल नहीं है और इसे न्यायालयों के माध्यम से लागू नहीं किया जा सकता है।”

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा, “यहाँ तक ​​​​कि किसी भी कानून के तहत राजनीतिक दलों को प्रवर्तन अधिकारियों के शिकंजे में लाने के लिए कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है, यदि वे घोषणा पत्र में किए गए अपने चुनावी वादे को पूरा करने में विफल रहते हैं।”

इससे पूर्व, निचली अदालतों ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।