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एनआईए ने न्यायालय को बताया, “मनसुख हिरेन की हत्या के लिए दिए गए 45 लाख रुपये”

निलंबित पुलिसकर्मी सचिन वाझे सहित गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध आरोप-पत्र जमा करने के लिए 30 दिनों की मांग वाली व्यापक दलीलों में एनआईए ने मंगलवार (3 जुलाई) को विशेष न्यायालय को बताया कि एक आरोपी ने व्यवसायी मनसुख हिरेन को मारने के लिए 45 लाख रुपये का भुगतान किया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के पास विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो मिली थी। आरोप था कि 4 मार्च को स्कॉर्पियो के मालिक हिरन की हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष ने बताया कि मनसुख हिरेन कमज़ोर कड़ी था और पूरे षड्यंत्र से अवगत था। अगर वह जीवित होता तो बड़ा षड्यंत्र विफल हो जाता।

एनआईए ने कहा कि हिरन का फोन लंबे समय से बंद था और बाद में इसे नष्ट करने से पहले पालघर में चालू कर दिया गया था। वह यह पता लगाना चाहती है कि किस आरोपी ने ऐसा किया है। मामले में जैश-उल-हिंद की संलिप्तता और टेलीग्राम पर जहां से पत्र अपलोड किया गया था, उसकी जाँच की जा रही है। आरोपी आतंकवादी कृत्य को दर्शाने के एक बड़े षड्यंत्र में सम्मिलित थे।

जाँच एजेंसी ने कहा कि आरोपी खतरनाक हैं और उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए। चार से पाँच गवाहों को धमकाया गया और उन्हें पुलिस सुरक्षा दी गई, जबकि कुछ अन्य ने अपनी जान के डर से आगे आने से मना कर दिया। मनसुख हिरेन की हत्या के बाद कुछ आरोपी नेपाल और दुबई गए थे।

एनआईए ने न्यायालय से अनुरोध किया कि यह पता लगाने की आवश्यकता है कि सचिन वाझे ने नागपुर स्थित एक सौर कंपनी से जिलेटिन की छड़ें कैसे प्राप्त कीं। इसके लिए करीब 50 व्यापारियों से बात करने की आवश्यकता है।