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प्रशांत भूषण को सर्वोच्च न्यायालय की फटकार, “जब विश्वास नहीं तो क्यों सुनें आपकी”

प्रवासी श्रमिकों को उनके घर भेजने की अनुमति देने की केंद्र सरकार से मांग को लेकर वकील प्रशांत भूषण ने याचिका दायर की थी। याचिका पर सोमवार (27 अप्रैल) को सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने उन्हें जमकर फटकार लगाई।

लाइव लॉ  की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कौल ने कहा, “प्रशांत भूषण न्यायपालिका पर कलंक लगा रहे हैं कि जब भी वह यहाँ आते हैं तो उन्हें कभी राहत नहीं मिलती है। जब आपको विश्वास ही नहीं है तो हम आपको कैसे सुन सकते हैं। एक आदेश की हमेशा आलोचना ही की जा सकती है।”

बाद में प्रशांत भूषण ने दावा किया कि न्यायालय सत्यापन के बिना सरकार के दावों को स्वीकार कर रही है। इस पर न्यायमूर्ति ने कहा, “आपको न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है! आप कहते हैं कि आप इस संस्था के साथ 30 वर्ष से हैं। आप जानते हैं कि कुछ आदेश अनुकूल हैं, कुछ नहीं हैं। आपको इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए।”

सरकार की ओर से मामले की सुनवाई के लिए मौजूद महाधिवक्ता तुषार मेहता ने भी प्रशांत भूषण की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब वह ऐसे मामलों में हार जाते हैं तो वह बाहर जाकर मीडिया के सामने उस निर्णय को काला दिन कहते हैं।

जब प्रशांत भूषण ने प्रवासी श्रमिकों को अंतर-राज्यीय परिवहन के जरिए घर वापस भेजने की केंद्र सरकार से अनुमति देने की बात कहीं तो महाधिवक्ता ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि यह अधिकार आपकी सीमा में नहीं आता है। सरकार इस संबंध में आवश्यक कदम उठाएगी। महाधिवक्ता ने कहा कि आप जनहित याचिकाकर्ता के रूप में सरकार नहीं चला सकते हैं।