समाचार
योगी आदित्यनाथ सरकार- अर्थव्यवस्था में तेज़ी के लिए श्रम कानूनों में तीन साल की छूट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने अर्थव्यवस्था को तेज़ करने के लिए एक ऐसे अध्यादेश को स्वीकृति दी है, जो प्रतिष्ठानों, कारखानों और व्यवसायों को अगले तीन वर्षों के लिए सभी तरह के श्रम कानूनों से छूट देता है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुछ श्रम कानूनों में अस्थायी छूट का अध्यादेश 2020 पारित किया, जिसे अब केंद्र की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

अब केवल राज्य के व्यवसायों के लिए जो कानून हैं, वे हैं बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स एक्ट, 1996, कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923, बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976, मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 की धारा 5 और मातृत्व लाभ अधिनियम।

इसका अर्थ है कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम और कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम सहित कम से कम 13 कानून तीन साल के लिए निलंबित रहेंगे।

राज्य सरकार ने कहा है कि यह कदम कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियों के गंभीर रूप से प्रभावित होने के मद्देनज़र उठाया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी के अनुसार, सरकार मौजूदा कर्मचारियों की सुरक्षा करने की उम्मीद करती है। साथ ही उन श्रमिकों को रोजगार भी प्रदान करती है, जो अपने राज्य वापस चले गए हैं।