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“भीम आर्मी एंबुलेंस को निकलने नहीं दे रही थी”- हाथरस पीड़िता की अंत्येष्टि पर सरकार

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल किए अपने शपथ पत्र में बताया कि क्यों हाथरस में सामूहिक दुष्कर्म पीड़ित दलित युवती की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार रात में ही करवाने का निर्णय लिया गया। सरकार ने इसमें बाबरी मस्जिद, कोविड-19 और भीम आर्मी का जिक्र किया है।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, योगी सरकार ने कहा, “हिंसा से बचने के लिए परिवार की मर्जी के साथ रात में करीब 2.30 बजे पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया।” शपथ पत्र में राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों को जाति विभाजन के प्रयास के लिए दोषी ठहराया गया है।

शपथ पत्र के बिंदु नंबर 10 में बताया गया कि अयोध्या-बाबरी मामले में फैसले की संवेदनशीलता और कोरोना प्रोटोकॉल के मद्देनजर परिवार की मर्जी से पीड़िता का अंतिम संस्कार करवाया गया। पीड़िता का शव रात 9.30 बजे दिल्ली से चला और रात 12.45 बजे हाथरस गाँव पहुँचा। इस दौरान पुलिस के साथ पीड़िता के पिता और भाई मौजूद थे।

सरकार ने कहा, “भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर और उनके सदस्य बड़ी संख्या में रास्ते में मौजूद थे और एंबुलेंस को निकलने नहीं दे रहे थे। पीड़िता का शव जब पहुँचा तो वहाँ करीब 200-250 लोग मौजूद थे और पुलिस भीड़ को नियंत्रित कर रही थी। उन्होंने एंबुलेंस को रोक दिया और अंतिम संस्कार रोकने के लिए घेराव किया। शव 2.30 तक परिवार के साथ था।”

हाथरस प्रशासन को 29 सितंबर से ही ऐसी कई खुफिया जानकारियाँ मिल रही थीं कि सफदरजंग अस्पताल के बाहर धरना प्रदर्शन हुआ है और इस मामले को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। 29 सितंबर की रात में सूचना मिली कि दोनों समुदाय के लाखों लोग 30 सितंबर की सुबह गाँव में एकत्रित होंगे। इससे हिंसा की संभावना बढ़ जाती और कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो जाती।