समाचार
जल निगम भर्ती घोटाले में आज़म खान को दोषी माना, 1,188 भर्तियाँ सरकार ने की रद्द

सपा नेता आज़म खान को अखिलेश यादव सरकार के दौरान हुए जल निगम भर्ती घोटाले की जाँच कर रही एसआईटी ने दोषी माना है। उनके द्वारा की गईं 1,188 भर्तियों को निरस्त कर दिया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, आज़म खान के तत्कालीन नगर विकास मंत्री कार्यकाल में उत्तर प्रदेश जल निगम में 853 जूनियर इंजीनियर व 335 लिपिकों की हुई भर्तियों को निरस्त कर दिया है। ये सभी वर्तमान में तैनात थे।

इससे पूर्व, 122 सहायक अभियंताओं की भर्तियाँ निरस्त हुई थीं। एसआईटी जाँच में भर्तियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार रात भर्ती निरस्त करने संबंधी आदेश जारी किया। कुल 1300 पदों की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता थी।

2016 में जल निगम ने लिपिक व आशुलिपिक की सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। परीक्षा मध्य मुबंई की मेसर्स एपटैक कंपनी ने करवाई थी। लिखित परीक्षा के बाद वेबसाइट पर आंसर शीट अपलोड नहीं हुई। साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों की सूची जल निगम को दे दी गई थी। निगम ने भी आंसर शीट अपलोड कराने का संज्ञान नहीं लिया था।

आखिर में आशुलिपिक पदों के लिए टाइप परीक्षा में कोई अभ्यर्थी सफल नहीं होने के कारण परीक्षा निरस्त कर दी गई। इस मामले में आजम खां के साथ नगर विकास सचिव रहे एसपी सिंह, जल निगम के पूर्व एमडी पीके आसुदानी, जल निगम के तत्कालीन मुख्य अभियंता अनिल खरे के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

जल निगम के लिपिकों के अलावा सहायक अभियंता व अवर अभियंता के पदों पर भी एपटेक लिमिटेड मुंबई ने ही परीक्षाएँ करवाई थीं। इसमें असफल अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली पारदर्शी न होने की शिकायत इलाहाबाद उच्च न्यायालय में की थी। न्यायालय के आदेश के बाद यहाँ भी निगम के मुुख्य अभियंता स्तर के दो अधिकारियों और एसआईटी द्वारा जाँच में गड़बड़ियाँ मिली हैं।