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विश्व ऊर्जा मंच के सूचकांक में भारत ने सुधारा स्थान, ऊर्जा क्षेत्र में चीन है पीछे

ऊर्जा संक्रांति सूचकांक के दूसरे संस्करण में भारत ने अपनी जगह दो स्थानों से बढ़ाकर सूचकांक में 75वें स्थान पर पहुँच है। भारत इस सूचकांक में चीन से पांच स्थान आगे है लेकिन विकासशील अर्थव्यवस्थाओं जैसे ब्राज़ील और इंडोनेशिया से पीछे है।

स्वीडन इस सूची में शीर्ष स्थान पर है। स्विट्ज़रलैंड और नॉर्वे इस सूची में स्वीडन के बाद हैं। यह सूचकांक विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) द्वारा प्रकाशित की गया है, जिसमें 115 देशों को उनके अभी के ऊर्जा प्रणाली प्रदर्शन के हिसाब से स्थान दिया गया है। और साथ ही यह देश किस तरह भविष्य में ऊर्जा प्रणाली को सुरक्षित, टिकाऊ, सस्ता और समावेशी बनाएँगे इसके आधार पर स्थान दिया गया है। 

इस रिपोर्ट में भारत को विश्व स्तर पर शीर्ष तीन देशों में से पहला स्थान दिया गया है, उसकी 2017 की नवीकरणीय नीतियों के कारण। इन तीन स्थानों पर भारत, जर्मनी और यूनाइटेड किंंगडम हैं। साथ ही इस रिपोर्ट में एनडीए के सार्वभौमिक ऊर्जा उपयोग के वादे की भी सराहना की गई है।

भारत के जीवंत अक्षय ऊर्जा उद्योग के बारे में टिप्पणी करते हुए रिपोर्ट में कहा गया, “भारतीय बाज़ार दुनिया में सबसे बड़ा और सबसे ज़्यादा प्रतिस्पर्धी बाज़ार है जिसने केवल साल 2017 में सूर्य और वायु शक्ति से 10.5 गीगावाट का ग्रहण किया है”।