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भारत का चीन से वार्ता के दौरान स्पष्ट संदेश, “देश की अखंडता से कोई समझौता नहीं”

भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की तरफ मोल्दो में कमांडर स्तर की वार्ता के नवीनतम दौर में भारतीय प्रतिनिधित्व ने स्पष्ट रूप से चीनी समकक्ष को अवगत कराया कि भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 11 घंटे तक चली लंबी वार्ता के दौरान भारत ने स्पष्ट रूप से पैंगोंग त्सो तथा पूर्वी लद्दाख में विवाद के कुछ अन्य स्थानों से चीनी सैनिकों की वापसी जल्द से जल्द पूरी करने का दबाव डाला।

भारत ने दबाव डाला कि पूर्वी लद्दाख के सभी क्षेत्रों में यथास्थिति की बहाली दोनों देशों के बीच समग्र संबंधों के लिए अनिवार्य है। चीनी पक्ष ने अब भी पैंगोंग त्सो क्षेत्र में फिंगर फोर और आठ क्षेत्रों से सैनिकों को वापस नहीं लिया है। इसके अलावा, गोगरा क्षेत्रों से सेना की वापसी भी अब तक चीनी की ओर से अधूरी है।

रविवार (2 अगस्त) को हुई वार्ता के बाद भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवाणे को सोमवार को हुई वार्ता के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में समग्र स्थिति पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ चर्चा हुई।

ऐसा कहा जाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और केंद्रीय विदेश मामलों के मंत्री एस जयशंकर को भी घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी गई थी।