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विदेशी मुद्रा भंडार पहुँचा $6 खरब पर, प्रबंधन के लिए बाहरी सलाहकार की नियुक्ति संभव

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपना विशाल विदेशी मुद्रा भंडार, जो अब अनुमानित रूप से करीब 600 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गया है, के एक हिस्से का प्रबंधन करने के लिए बाहरी वित्तीय सलाहकारों को नियुक्त कर सकती है। इसका उद्देश्य समय पर लाभ में सुधार करना है क्योंकि ब्याज दरें विश्व स्तर पर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गई हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी मुद्रा कोष जीडीपी के करीब पाँचवें हिस्से के आकार तक बढ़ रही है। ऐसे में कई रास्तों से अंतर्वाह के प्रबंधन की बढ़ती जटिलताओं को देखते हुए आरबीआई भंडार की बेहतर सुरक्षा करना चाहता है।

अपनी नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में भी आरबीआई ने इस बात को रेखांकित किया था कि उसका एजेंडा पोर्टफोलियो विविधीकरण को देखते हुए विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की तैनाती के लिए नए परिसंपत्ति वर्गों, नए अधिकार क्षेत्र और बाज़ारों का पता लगाना जारी रखना था। इस प्रक्रिया में यदि ज़रूरी हो तो बाहरी विशेषज्ञों से सलाह लेना जारी रखना था।

कहा जाता है कि चुनिंदा वैश्विक संस्थानों, जिनमें चार बड़ी सलाहकार कंपनियाँ और वित्तीय संस्थान शामिल हैं, ने भी इस संबंध में अनौपचारिक रूप से आरबीआई से संपर्क किया है। हालाँकि, अब तक कोई औपचारिक नियुक्ति नहीं हुई है।