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पेटा के वेगन दूध पर अमूल का जवाब- “आप भरेंगे 10 करोड़ दुग्ध उत्पादकों का पेट”

पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) द्वारा अमूल इंडिया को डेयरी दूध की बजाय वेगन दूध का उत्पादन करने के लिए कहने के बाद जीसीएमएमएफ के प्रबंध निदेशक ने उनके सवाल का जवाब दिया है। अमूल गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जीसीएमएमएफ) प्रबंधित एक भारतीय डेयरी सहकारी समिति है।

इसके एमडी आरएस सोढ़ी ने पेटा से सवाल किया कि अगर डेयरी सहकारी वेगन दूध में परिवर्तित हो जाती है तो क्या वे 10 करोड़ डेयरी किसानों को आजीविका दे पाएँगे। उन्होंने रसायनों और सिंथेटिक विटामिन से बने प्रयोगशाला निर्मित कारखाने के भोजन का खर्च उठाने पर भी सवाल किए।

आरएस सोढ़ी ने एक ट्वीट में कहा, “क्या वे 10 करोड़ डेयरी किसानों (70 प्रतिशत भूमिहीन) को आजीविका देंगे। उनके बच्चों की विद्यालय शुल्क का भुगतान कौन करेगा। कितने लोग महंगे लैब निर्मित कारखानों में रसायनों व सिंथेटिक विटामिन से बने भोजन का खर्च उठा सकते हैं।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने आरोप लगाया कि पेटा अमीर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आनुवंशिक रूप से संशोधित सोया को अत्यधिक कीमतों पर बाज़ार में लाना चाहती है, जिसे औसत निम्न मध्यम वर्ग के लोग वहन नहीं कर सकते हैं।

इस पर पेटा ने उत्तर दिया कि वह सिर्फ अमूल को वेगन खपत के मौजूदा रुझानों के बारे में सूचित कर रहा था और सहकारी को मौजूदा रुझानों के जवाब में बेहतर व्यावसायिक विकल्प बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था।