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“ऑड-इवन योजना के बावजूद प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुँच गया”- सर्वोच्च न्यायालय
आईएएनएस - 16th November 2019

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा, “ऑड-इवन योजना के बावजूद प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुँच गया है।” इस पर अदालत ने फिर से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को तलब करके वायु प्रदूषण को रोकने के लिए विशेष रूप से पराली जलाने से संबंधित किए गए उपायों पर रिपोर्ट मांगी है।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ” ऑड इवन योजना में दोपहिया वाहनों को भी छूट नहीं देनी चाहिए। इसे विधिवत लागू करना चाहिए क्योंकि यह भी प्रभाव डालेगा।” सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने पिछले दो वर्षों में एकत्रित वायु गुणवत्ता सूचकांक डेटा के संबंध में दिल्ली सरकार की ऑड-इवन योजना की छानबीन की। न्यायाधीशों ने दिल्ली सरकार के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी को बताया, “इस योजना का उद्देश्य ऐसी कारों को रखना है, जो कुल प्रदूषण का तीन प्रतिशत हिस्सा हैं।”

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, “दिल्ली का स्थानीय प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। अगर 40 प्रतिशत प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देने वाली पराली की समस्या को बाहर कर दिया जाए।” अधिकारियों ने कहा, “पराली जलाने में अब लगभग 5 प्रतिशत की कमी आई है। हम दिल्ली के स्थानीय वायु प्रदूषण के बारे में चिंतित हैं पर सरकार क्या कर रही है?”

अदालत ने अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार सलाह दी, “ऑड-इवन योजना का हवा की गुणवत्ता में सुधार पर शायद ही कोई प्रभाव पड़ा हो। सवाल है कि आप इस योजना से क्या हासिल कर रहे हैं?

सर्वोच्च न्यायालय ने योजना के सामाजिक पहलू पर आगे टिप्पणी करते हुए कहा, “यह योजना सिर्फ निम्न और मध्यम वर्ग को प्रभावित करेगी लेकिन संपन्न लोगों को नहीं, जिनके पास कई कारें हैं। ऑड-ईवन एक समाधान नहीं है लेकिन सार्वजनिक परिवहन हो सकता है। उस बारे में कुछ नहीं किया गया है।”