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पश्चिम बंगाल- संकट के बाद निजी अस्पतालों की 300 नर्सों का त्यागपत्र, लौटीं गृहराज्य

पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े संकट के बाद 300 से अधिक नर्सों ने निजी अस्पतालों से त्यागपत्र दे दिया। साथ ही वे मणिपुर समेत देश के अन्य हिस्सों में अपने घरों के लिए लौट रही हैं।

एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटल्स ऑफ ईस्टर्न इंडिया (एएचईआई) ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा को पत्र लिख मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

निजी अस्पतालों के सूत्रों ने बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में करीब 185 नर्सें मणिपुर रवाना हुईं। शनिवार को 169 नर्सों ने नौकरी छोड़ दी। इनमें 92 मणिपुर, 43 त्रिपुरा, 32 ओडिशा और दो झारखंड के लिए लौट गईं।

एचईआई अध्यक्ष प्रदीप लाल मेहता ने पत्र में कहा, “वे क्यों जा रही हैं, इसकी सही वजह नहीं पता। फिर भी हमने अन्य नर्सों से पता किया कि मणिपुर सरकार उन्हें आकर्षक पेशकश कर रही है। हालाँकि, मणिपुर के मुख्यमंत्री नांगथोमबम बीरेन सिंह ने दावा किया कि राज्य सरकार की तरफ से इस तरह की कोई सलाह जारी नहीं की गई।

उन्होंने कहा, “हम किसी को वापस आने को नहीं बोल रहे हैं। कोलकोता, दिल्ली और चेन्नई में मरीजों की सेवा करते हुए हम उन पर गर्व महसूस करते हैं। हमने पहले ही कहा था कि कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए उन्हें मुआवजा देंगे और पुरस्कृत करेंगे।”

मणिपुर रवाना होने वाली एक नर्स ने कहा था, “सुरक्षा चिंताओं और माता-पिता के दबाव की वजह से हम नौकरी छोड़ रहे हैं। माता-पिता चिंतित हैं और हम तनावग्रस्त हैं क्योंकि यहाँ मामले हर दिन बढ़ रहे हैं। हमारा हरा-भरा राज्य है और हम वापस जाने की इच्छा रखते हैं। हमारी सरकार मदद कर रही है। परिवार और माता-पिता हमारी प्राथमिकता हैं।” इस बीच, स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने कहा कि सरकार ने नर्सों के बारे में जानकारी मांगी है।