समाचार
“सरकारी राहत के बिना, यह वोडाफोन-आइडिया की कहानी का अंत”- कुमार मंगलम बिड़ला

शुक्रवार (06 दिसंबर) को कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि वोडाफोन-आइडिया को सरकार से राहत की ज़रूरत है और ऐसा ना होने पर कंपनी को बंद करना होगा।

बिज़नेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार हिंदुस्तान टाइम्स नेतृत्व सम्मेलन के दौरान बोलते हुए आदित्य-बिड़ला समूह के प्रमुख कुमार मंगलम बिड़ला ने बताया कि उन्हें भारत में तीसरे सबसे बड़े मोबाइल सेवा प्रदाता वोडाफोन-आइडिया को बंद करना होगा अगर सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए पिछले वैधानिक बकाए से राहत नहीं देती है।

गौरतलब है कि समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बीच 50,922 करोड़ रुपये के अपने उच्चतम तिमाही घाटे की पृष्ठभूमि से कुमार मंगलम बिड़ला द्वारा यह घोषणा की गई है।

अपने भाषण में उन्होंने बताया कि समूह कंपनी में कोई भी निवेश नहीं करेगा यदि सरकार सहायता नहीं करती है। बिड़ला ने कहा, “इस बात का कोई तुक नहीं है कि अच्छे पैसे को बुरे पैसे का पालन करना चाहिए,” और कंपनी को राहत के अभाव में दिवाला मार्ग चुनना होगा।

12 नवंबर को वोडाफोन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) निक रीड ने लंदन में कहा कि जब तक सरकार मोबाइल स्पेक्ट्रम शुल्क की मांगों पर ढील नहीं देती, वोडाफोन-आइडिया के परिसमापन के लिए आगे बढ़ सकते हैं।

निक रीड ने कहा, “आर्थिक रूप से असमर्थित विनियमन, अत्यधिक करों और इसके शीर्ष सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के माध्यम से हम पर भारी बोझ पड़ा है। ”

बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने ऑपरेटरों से पिछले बकाया में 92,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने को कहा है।

वोडाफोन अब चाहता है कि सरकार टेलीकॉम ऑपरेटरों को स्पेक्ट्रम भुगतान पर दो साल की रोक सहित एक राहत पैकेज का अनुदान दे, लाइसेंस शुल्क और कर कम हो और न्यायालय के मामले में ब्याज और दंड की छूट मिले जो विनियामक शुल्क पर केंद्रित है।