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भारत का दो टूक जवाब- “हम आंतरिक मुद्दों पर बयान नहीं देते इसलिए चीन भी बचे”
आईएएनएस - 1st November 2019

भारत ने गुरुवार को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के निर्माण पर चीन द्वारा की गई टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। उसने अपने आंतरिक मामलों पर बयान देने से परहेज करने की नसीहत यह कहते हुए दी कि नई दिल्ली भी किसी अन्य देश के आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणी नहीं करता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “चीन का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों के एक बड़े हिस्से पर कब्जा है। उसने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से अवैध रूप से भारतीय क्षेत्रों का अधिग्रहण किया है।

उन्होंने तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर भारत की चिंता को दोहराया। उन्होंने कहा, “हमने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों की स्थापना पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता द्वारा दिए गए बयान को देखा है। चीन इस मुद्दे पर भारत की सुसंगत और स्पष्ट स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है।”

उन्होंने कहा, ” इनके पुनर्गठन की बात भारत का आंतरिक मामला है। हम चीन सहित अन्य देशों से टिप्पणी करने की उम्मीद नहीं करते हैं क्योंकि खुद भारत दूसरे देशों के आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणी करने से परहेज करता है। हम अन्य देशों से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की उम्मीद करते हैं। ”

भारत और चीन के बीच सीमा के प्रश्न पर उन्होंने कहा, “दोनों देश 2005 में राजनीतिक मापदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर शांतिपूर्ण परामर्श से इस मुद्दे पर उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकृत समाधान की तलाश करने के लिए सहमत हुए थे।”

उन्होंने कहा, “यह इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दूसरे भारत-चीन अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में भी दोहराया गया था। दोनों पक्ष सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सहमत हुए थे।”