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देवप्रयाग से हरिद्वार तक गंगा का पानी दशकों में पहली बार हुआ पीने योग्य- आईआईटी

आईआईटी रुड़की के एक अध्ययन से पता चला है कि उत्तरकाशी जिले के देवप्रयाग से गंगा नदी का पानी जो हरिद्वार में हर की पौड़ी तक पहुँच रहा है, वो दशकों में पहली बार पीने योग्य हो गया है।

न्यू इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष अबरार अहमद खान ने बताया, “हमारे वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा किए गए परीक्षणों से पता चला है कि देवप्रयाग से हर की पौड़ी तक आने वाला गंगा नदी का पानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ए श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है। इसका मतलब है कि पीने के लिए यह पानी बिल्कुल उपयुक्त है।

गंगा के पानी में एमपीएन/ 100 मिलीलीटर के नमूने में कोई बैक्टीरिया नहीं है। 3 मिलीग्राम/लीटर से नीचे जैव रासायनिक ऑक्सीजन का स्तर भी कम है। गंगा में 22 नालों के जरिए बहाए जाने वाले अपशिष्ट पदार्थ फिलहाल लॉकडाउन के चलते सील हैं, जिसके बाद यह परिणाम निकलकर आया है।

उत्तराखंड पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आर के कठैत के अनुसार, नदी के पास मानवजनित गतिविधियाँ बिल्कुल कम हो गई हैं, जिससे नदी को फिर से साँस लेने का मौका मिल गया है।

इसके परिणामस्वरूप यहां का पानी भारतीय मानक ब्यूरो के 28 मापदंडों को पार कर रहा है, जिसकी वजह से इसे पीने के लिए उपयुक्त बताया जा रहा है। हालाँकि, अधिकारियों ने लोगों से गंगा का पानी पीने से पहले उसे क्लोरिनेट करने का गुजारिश की है।