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आदिवासियों को मारने के बयान से पलटे राहुल गांधी, कहा- ‘जल्दबाज़ी में निकला’

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के नोटिस के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार के आदिवासियों को गोली मारने की इजाजत देने वाले नए वन संरक्षण कानून को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान जल्दबाजी में गलती से ऐसा निकल गया था।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 23 अप्रैल को मध्य प्रदेश के शहडोल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया था, “नरेंद्र मोदी जी ने नया कानून बनाया है। इसके तहत पुलिस आदिवासियों को गोली मार सकती है। वे आपकी जमीन, जंगल और पानी छीन लेते हैं और फिर कहते हैं कि आदिवासियों पर गोली चलाई जा सकती है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सरकार भारतीय वन अधिनियम 1927 के प्रावधानों को संशोधित करके उसे कठोर तरीके से लागू करना चाहती है। मीडिया रिपोर्ट्स का संज्ञान लेते हुए एनसीएसटी ने 3 मई को राहुल गांधी को नोटिस जारी किया था। अब उसके जवाब में राहुल गांधी के वकील ने कहा, “कांग्रेस प्रमुख ने टिप्पणी एक राजनीतिक भाषण के प्रवाह में कर दी थी।”

एनसीएसटी ने ऐसे आरोपों को स्पष्ट करते हुए कहा, “प्रस्तावित संशोधन अपराध को रोकने के लिए शक्ति से संबंधित है। संशोधन के बाद इसे भारतीय वन अधिनियम 2019 कहा जाएगा।”

एनसीएसटी अधिकारी ने आगे कहा, “अगर वन अधिकारी किसी व्यक्ति को वन भूमि में अपराध जैसे तस्करी करना या हथियार ले जाते हुए गिरफ्तार करता है तो उसके खिलाफ मामला दर्ज करने का उसका अधिकार होगा।

राहुल गांधी को इस बयान को लेकर चुनाव आयोग से कारण बताओ नोटिस भी मिला था। इसमें उन्होंने जवाब दिया था, “मैंने राजनीतिक भाषण के दौरान सरल भाषा में भारतीय वन अधिनियम में संशोधन को संक्षेप में प्रस्तुत करने की कोशिश की थी।”