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अमित शाह ने देश में बाढ़ की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए की उच्चस्तरीय बैठक

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (3 जुलाई) को देश के प्रमुख बाढ़-ग्रस्त क्षेत्रों में मानसून और बाढ़ की स्थिति से निपटने के उपायों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की। यह बैठक असम में विनाशकारी बाढ़ का सामना करने को लेकर की गई, जिसमें अब तक 33 लोग मारे जा चुके हैं।

अमित शाह ने अधिकारियों से कहा, “वे बाढ़ के पूर्वानुमान और देश के प्रमुख जलग्रहण क्षेत्रों में जल स्तर की वृद्धि के लिए एक स्थायी प्रणाली रखने को एजेंसियों से बेहतर समन्वय स्थापित करें।” उन्होंने इस तरह के क्षेत्रों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तर पूर्वी राज्यों में वर्षभर बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर भी कहा।

गृह मंत्री अमित शाह ने जल शक्ति और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को पानी समय पर छोड़ने और बाढ़ की रोकथाम सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रमुख बांधों की वास्तविक भंडारण क्षमता के आँकड़ों की समीक्षा व आँकलन करने के भी निर्देश दिए।

बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अधिकारियों के साथ जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

सरकार ने बयान में कहा, “बैठक में लिए गए निर्णय देश के लाखों लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करेंगे, जिन्हें अपनी फसलों, संपत्ति, आजीविका और अपने बहुमूल्य जीवन के लिए बाढ़ के प्रकोप का सामना करना पड़ता है।”

भारत में कुल 40 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ की आशंका से ग्रसित रहता है। इसमें गंगा और ब्रह्मपुत्र मुख्य बाढ़ग्रस्त क्षेत्र हैं। असम, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सबसे अधिक बाढ़ग्रस्त राज्य हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में बाढ़ की स्थिति के बारे में असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से भी बात की है।