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वीर सावरकर, सरदार पटेल के योगदान पाठ्य पुस्तकों में जोड़ने पर वेंकैया नायडू का ज़ोर

उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने गुरुवार (23 जनवरी) को राष्ट्रीय अनुप्रतीक सरदार वल्लभभाई पटेल और वीर सावरकर जैसे अन्य महापुरुषों के योगदान को उजागर करने के लिए इन महापुरुषों को इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में शामिल करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

एशियन न्यूज इंटरनेशनल (एएनआई) की रिपोर्ट के अनुसार यह कहते हुए कि राष्ट्र के प्रथम केंद्रीय गृह मंत्री पटेल और स्वतंत्रता सेनानी सावरकर को उनके अपार योगदान के लिए उचित सम्मान नहींं दिया गया, उप-राष्ट्रपति नायडू ने रेखांकित किया, “वीर सावरकर को दो आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी और उन्हें कुख्यात सेलुलर जेल में 10 साल की कैद हुई जहाँ उनके साथ अमानवीय व्यवहार हुआ था।”

उप-राष्ट्रपति नायडू ने एक कार्यक्रम के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण करते हुए सावरकर के राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को कम करने के लिए कुछ वर्गों के प्रयासों पर असहमति व्यक्त की।

नेताजी की प्रतिमा का अनावरण उनकी 123वीं जयंती पर किया गया। यह प्रतिमा तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के राजभवन में स्थित है। उन्होंने राष्ट्र के लिए उनके अपार योगदान को याद करते हुए बताया कि कैसे नेताजी ने 30 दिसंबर 1943 को पोर्ट ब्लेयर में तिरंगा फहराया और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को ब्रिटिश शासन से मुक्त होने वाला पहला भारतीय क्षेत्र घोषित किया था।