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लावा चीन से कारोबार समेटकर ला रहा भारत, पाँच साल में करेगा 800 करोड़ रुपये निवेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकल के लिए वोकल बनने की सलाह के बाद घरेलू ब्रांड लावा ने शनिवार (16 मई) को घोषणा की कि वह अपने पूरे मोबाइल शोध एवं विकास, डिज़ाइन और विनिर्माण को अगले छह महीने के भीतर चीन से भारत में स्थानांतरित करेगा। साथ ही उसने नियत समय में 800 करोड़ रुपये निवेश करने की भी घोषणा की है।

लावा अपने मोबाइल फोनों का 33 प्रतिशत से अधिक निर्यात मैक्सिको, अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया जैसे बाज़ारों में करता है। कोविड-19 महामारी के बाद वह इस वर्ष लगभग 80 करोड़ रुपये और अगले पाँच वर्षों में लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश करेगा।

कंपनी ने बयान में कहा, “भारतीय मोबाइल फोन निर्माताओं ने गत माह सरकार द्वारा घोषित प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (पीएलआई) में चीन से अधिक लागत लाभ मिलने के बाद यह कदम उठाया है।”

लावा के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हरिओम राय ने कहा, “हम बेसब्री से अपने पूरे मोबाइल शोध एवं विकास, डिजाइन और विनिर्माण को चीन से भारत में स्थानांतरित करने का इंतजार कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन के साथ दुनियाभर के बाज़ार के लिए हमारी विनिर्माण अक्षमता काफी हद तक पूरी हो जाएगी इसलिए हम इस बदलाव की योजना बना रहे हैं।” पीएलआई योजना भारत में निर्मित सामानों की तेज़ी से बिकवाली पर चार से छह प्रतिशत तक का प्रोत्साहन देती है।

लावा ने पिछले सप्ताह नोएडा में अपनी विनिर्माण सुविधा में 20 प्रतिशत से अधिक उत्पादन क्षमता के साथ काम शुरू किया। कंपनी के राज्य अधिकारियों से सिफारिश मिलने के बाद इसके 3,000 में से करीब 600 कर्मचारी कारखाने में वापस आ गए हैं।